Hardoi News: मानक विहीन बना मिला रिसोर्स रिकवरी सेंटर, जिम्मेदारों से होगी रिकवरी।
भरावन विकास खंड की गोंडवा ग्राम पंचायत के निरीक्षण में आरआरसी सेंटर मानक विहीन बना मिला। लाखों रुपये की ...
- निरीक्षण में बदहाल मिला गांव, विकास कार्यों से संबंधित अभिलेख न दिखा सके प्रधान सचवि
हरदोई: भरावन विकास खंड की गोंडवा ग्राम पंचायत के निरीक्षण में आरआरसी सेंटर मानक विहीन बना मिला। लाखों रुपये की लागत से बने आरआरसी (रिसोर्स रिकवरी सेंटर) का संचालन भी नहीं होता हुआ मिला। सरकारी धनराशि के दुरुपयोग के मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी ने प्रधान, सचिव, कंसल्टिंग इंजीनियर, खंड प्रेरक की जवाबदेही तय करते हुए दुरुपयोग की गई धनराशि की वसूली के निर्देश दिए हैं।
जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया ग्राम पंचायत के निरीक्षण के दौरान उन्हें आरआरसी (रिसोर्स रिकवरी सेंटर) में टीन डालने के लिए बनाए गए स्ट्रक्चर में पिलर के ऊपर प्लेटें नहीं लगी मिलीं। जबकि कंस्ल्टिंग इंजीनियर व खंड प्रेरक को पूर्व में ही पिलर की सरियों के साथ प्लेटें लगाने के निर्देश दिए गए थे, जिससे टीन तेज हवा अथवा आंधी में न गिर सकें। कंसल्टिंग इंजीनियर ने बताया ठेकेदार को प्लेट लगाने को कहा गया था, हालांकि इस बाबत पूछने पर वह न तो ठेकेदार का नाम बता पाया न ही उसे मौके पर बुला सका। जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया अनियमितता के चलते प्रधान, सचिव, कंसल्टिंग इंजीनियर, खंड प्रेरक पर 25-25 प्रतिशत वसूली की जवाबदेही तय की गई है।
ग्राम पंचायत में बना सामुदायिक शौचालय भी निरीक्षण में अधूरा मिला जिसके लिए प्रधान एवं सचिव को दोषी मानते हुए नोटिस जारी किया गया है। पंचायत भवन में गंदगी पसरी हुई थी, हैंडपंप, खंबा, गली के रजिस्टर भी नहीं थे। करवाए गए विकास कार्यों से संबंधित पत्रावलियां भी नहीं मिलीं। जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया ग्राम पंचायत सचिव को अभिलेख अद्यतन करने, पंचायत सचिवालय में सुरक्षा व्यवस्था कर सभी अभिलेख सुरक्षित रखने, सीसीटीवी लगवाए जाने के निर्देश दिए।
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सेप्टिक टैंक बना कर मल नाली में बहा रहा था लाभार्थी, वसूली के निर्देश
कोथावां विकास खंड की सिकंदरपुर नगवां ग्राम पंचायत के औचक निरीक्षण पर पहुंचे जिला पंचायत राज अधिकारी को निरीक्षण के दौरान एक शौचालय में सोकपिट के स्थान पर सेप्टिक टैंक बना दिखा, जिसको नाली से जोड़ा गया था। जिला पंचायत राज अधिकारी ने मानक अनुरूप शौचालय न बनाने को सरकारी धनराशि का दुरुपयोग मानते हुए शौचालय निर्माण के लिए मिली धनराशि की रिकवरी के निर्देश दिए। यही नहीं ग्राम पंचायत सचिव को गांव में बने हुए सभी शौचालयों के सत्यापन करने एवं रिपोर्ट प्रेषित करने के भी निर्देश दिए
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