Lucknow News: उ0प्र0 राजकीय अभिलेखागार में कार्यशाला का आयोजन औैर प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। 

अन्तर्राष्ट्रीय अभिलेख दिवस के अवसर पर दिनांक 09 से 14 जूनए 2025 के मध्य अपराह 3ः00 बजे से सायं 5ः00 बजे तक उत्तर प्रदेश राजकीय....

Jun 15, 2025 - 09:46
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Lucknow News: उ0प्र0 राजकीय अभिलेखागार में कार्यशाला का आयोजन औैर प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। 

लखनऊः अन्तर्राष्ट्रीय अभिलेख दिवस के अवसर पर दिनांक 09 से 14 जूनए 2025 के मध्य अपराह 3ः00 बजे से सायं 5ः00 बजे तक उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार परिसर के अन्तर्गत शहीद स्मृति भवन में श्अभिलेख के प्रबन्धन एवं संरक्षणश् विषयक 06 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में छठवें दिन दिनांक 14-06-2025 को डॉ० एस०एन० चौबे, विभागाध्यक्ष, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, विशिष्ट अतिथि दिलीप कुमार गुप्ता, वित्त नियंत्रक, संस्कृति निदेशालय, उ० प्र०. एसोसिएट प्रो० डॉ० सुशील कुमार पाण्डेय को निदेशक, उ० प्र० राजकीय अभिलेखागार श्री अमित कुमार अग्निहोत्री ने अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में 137 शोधार्थी उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि डॉ० एस०एन० चौबे द्वारा कार्यशाला के सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

प्रथम सत्र में श्री शिव कुमार यादव, क्षेत्र सहायक, उ० प्र० राजकीय अभिलेखागार द्वारा श्अभिलेखागार में रोजगार की संभावनायेंश् विषय पर व्याख्यान दिया गया। उन्होंने बताया कि बर्तमान समय में 735 से अधिक अभिलेखागार कार्यशील हैं, जिनमें समय समय पर आर्काइविस्ट एवं अन्य पद विज्ञापित होते रहते हैं, जिसमें युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सकता है। राष्ट्रीय अभिलेखागार, भारत सरकार तथा अन्य अभिलेखागारों में एक वर्षीय आर्काइवल डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इच्छुक अभ्यर्थी डिप्लोमा प्राप्त कर समय समय पर विज्ञापित विभिन्न पदों पर सेवा का अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

विशिष्ट अतिथि डॉ० सुशील कुमार पाण्डेय दिलीप कुमार गुप्ता तथा डॉ० एस०एन० चौबे ने प्रशिक्षार्थियों को अपने उद्बोधन में कहा कि बिना अभिलेखागार के शोध की परिकल्पना नहीं की जा सकती तथा ऐसे शोध प्रमाणिक भी नहीं माने जाते हैं। अतः अभिलेखागार में संरक्षित अभिलेखों का शोधार्थियों को उपयोग करना चाहिए। पूर्वाग्रह से ग्रसित इतिहास लेखन नहीं किया जाना चाहिए। इतिहास का पुनर्लेखन भारतीय दृष्टिकोण से किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

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इसके अतिरिक्त कतिपय शोधार्थियों ने भी छः दिवस तक चले कार्यशाला के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन कम से कम प्रत्येक वर्ष में 02 बार अवश्य किए जाने चाहिए, जिससे शोधार्थियों को अभिलेखागार में संरक्षित अभिलेखों के विषय में जानकारी प्राप्त हो सके।

अभिलेख सप्ताह में आयोजित इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को अभिलेखागार का महत्व, अभिलेखागारों में शोध की संभावनायें, अभिलेख व पाण्डुलिपियों के संरक्षण की वैज्ञानिक विधियां एवं अभिलेखागार में रोजगार की संभावनाओं के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध करायी गयी। 

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