Agra : उटंगन और खारी नदी के जल प्रवाह को व्यवस्थित करने की मांग उठी
सिविल सोसायटी की ओर से कहा गया कि आगरा जनपद से गुजरने वाली नदियों का तंत्र पांच जलवायु क्षेत्रों की जलधाराओं से पोषित होता है। जनपद में भूजल प्रबंधन और सत
आगरा जनपद में उटंगन और खारी नदी के पानी के प्रवाह को व्यवस्थित करने की मांग उठाई गई है। इससे भूगर्भ जल स्तर में सुधार होगा और खेती-किसानी को फायदा पहुंचेगा। सिविल सोसायटी ऑफ आगरा ने जिला पंचायत अध्यक्ष से उनके कैंप कार्यालय पर मुलाकात कर यह मुद्दा उठाया।
सिविल सोसायटी की ओर से कहा गया कि आगरा जनपद से गुजरने वाली नदियों का तंत्र पांच जलवायु क्षेत्रों की जलधाराओं से पोषित होता है। जनपद में भूजल प्रबंधन और सतही जल के ठहराव की संभावनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। वाटरशेड योजना को पूरी तरह से अनदेखा किया गया है। सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के सचिव अनिल शर्मा ने कहा कि आगरा प्रशासन को कुशल ड्रोन पायलट के नेतृत्व में उटंगन नदी की सिरौली गांव, मोतीपुरा, अरनोटा और रिहावली गांव जैसे स्थानों पर नदी के प्रवाह और जल विस्तार का चित्रण करवाना चाहिए। मोतीपुरा में खारी नदी उटंगन में मिलती है। इससे नदी के जल प्रबंधन की सही स्थिति समझ में आएगी और आगे की योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के सदस्य राजीव सक्सेना ने कहा कि जगनेर की बंधियों के जल संचय को प्रभावित करने वाले कोट बांध के स्लूस गेटों की मरम्मत के लिए आगरा प्रशासन को भरतपुर प्रशासन को पत्र लिखना चाहिए। कोट बांध में विद्या पहाड़ी श्रृंखला की अंतिम छोर की पहाड़ियों से वाटरशेड का भरपूर पानी पहुंचता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के लिए उपयोगी होने के बावजूद यह अव्यवस्थित रूप से निकलता रहता है। फोटो जर्नलिस्ट असलम सलीमी ने कहा कि आगरा की जल संचय संरचनाएं रखरखाव और प्रबंधन के इंतजार में हैं। अब उन्हें इन संरचनाओं की मजबूती के लिए किए जा रहे छोटे-छोटे प्रयासों को कैमरे में कैद करने में ज्यादा रुचि है।
जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू भदौरिया ने कहा कि उटंगन नदी और उसके जल स्रोत आगरा के गिरते जल स्तर को रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं। वह सिंचाई विभाग की आगरा नहर के निचले हिस्से के बारे में लगातार ध्यान दिलाती रही हैं। ड्रोन मैपिंग करवाने और राजस्थान सरकार को पत्र लिखने के लिए वह फिर से प्रयास करेंगी। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि मानसून के वर्षा जल की हर बूंद को ज्यादा से ज्यादा समय तक संचित रखा जाए और व्यवस्थित तरीके से उसका निकास हो। इससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और पर्यावरण संतुलन बना रहेगा।
मुलाकात करने वालों में सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना और असलम सलीमी शामिल थे। इस चर्चा से उम्मीद है कि नदियों के जल प्रबंधन पर ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे स्थानीय किसानों और समुदाय को लाभ मिलेगा।
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