अमेरिका के टैरिफ खतरे पर बाबा रामदेव का कड़ा ऐलान: 'भारत को आंख दिखाने वाले की आंखें निकाल लेंगे', आत्मनिर्भर भारत पर जोर।
योग गुरु और पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव ने अमेरिका के हालिया टैरिफ बढ़ाने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "भारत को जो आंख दिखाएगा, उसकी आंखें हम निकाल
योग गुरु और पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव ने अमेरिका के हालिया टैरिफ बढ़ाने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "भारत को जो आंख दिखाएगा, उसकी आंखें हम निकाल लेंगे।" यह बयान 17 अक्टूबर 2025 को हरिद्वार में एक सभा के दौरान आया, जहां बाबा रामदेव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर निशाना साधा। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जिससे आयुर्वेदिक उत्पादों और हर्बल एक्सपोर्ट्स पर असर पड़ सकता है। बाबा रामदेव ने इसे भारत की आर्थिक संप्रभुता पर हमला बताते हुए आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने का आह्वान किया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। पतंजलि के उत्पादों का बड़ा हिस्सा अमेरिका निर्यात होता है, इसलिए यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत भी है। बाबा रामदेव ने कहा कि भारत अब किसी की दया पर नहीं चलेगा बल्कि अपनी ताकत से जवाब देगा। यह बयान न केवल आर्थिक मुद्दे पर है बल्कि राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी लगता है।
बाबा रामदेव का जन्म 25 दिसंबर 1965 को उत्तराखंड के साईं गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही योग और आयुर्वेद की ओर उनका झुकाव था। राममूर्ति देवी के पुत्र रामकिशन यादव ने 1995 में कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे आसनों को लोकप्रिय बनाया। 2002 में उन्होंने पतंजलि योगपीठ की स्थापना की, जो आज दुनिया का सबसे बड़ा योग केंद्र है। पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड 2006 में बनी, जो हर्बल उत्पादों का साम्राज्य चला रही है। कंपनी का टर्नओवर 2024 में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक रहा। बाबा रामदेव ने कोविड-19 के दौरान कोरोनिल किट लॉन्च की, जो विवादास्पद रही लेकिन करोड़ों लोगों ने इस्तेमाल किया। वे राजनीतिक रूप से भी सक्रिय रहे और 2014 में आम आदमी पार्टी से जुड़े, लेकिन बाद में अलग हो गए। भाजपा के समर्थक बने और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा दिया। अमेरिका के टैरिफ फैसले ने उन्हें भड़का दिया, क्योंकि पतंजलि के 20 प्रतिशत निर्यात अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं। हर्बल चाय, दवाइयां और कॉस्मेटिक्स जैसे उत्पाद प्रभावित होंगे। बाबा रामदेव ने कहा कि यह ट्रंप की चुनावी चाल है, लेकिन भारत इसका जवाब देगा।
अमेरिका का टैरिफ बढ़ाने का फैसला 15 अक्टूबर 2025 को आया, जब ट्रंप ने चाइना के बाद भारत को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगेगी, खासकर फार्मा, टेक्सटाइल और हर्बल सेक्टर पर। इसका कारण भारत का व्यापार घाटा बताया गया, जो 2024 में 30 बिलियन डॉलर पहुंच गया। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां 80 बिलियन डॉलर का कारोबार होता है। टैरिफ से भारतीय कंपनियों को नुकसान होगा, लेकिन पतंजलि जैसे ब्रांड्स पर ज्यादा असर पड़ेगा। बाबा रामदेव ने अपनी सभा में कहा कि अमेरिका भारत को कमजोर समझ रहा है, लेकिन हमारी अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ रही है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे भारत ने कोविड वैक्सीन निर्यात कर दुनिया को बचाया। अब टैरिफ का जवाब आयुर्वेदिक निर्यात बढ़ाकर देंगे। बाबा रामदेव ने युवाओं से अपील की कि वे आयुर्वेद अपनाएं और विदेशी उत्पादों का बहिष्कार करें। यह बयान आंख निकालने वाला विवादास्पद है, लेकिन उनके समर्थक इसे राष्ट्रवाद का प्रतीक मान रहे हैं। विपक्ष ने इसे उकसावे वाली भाषा कहा है।
बाबा रामदेव के बयान की प्रतिक्रिया तेजी से आई। सोशल मीडिया पर #BabaRamdevEyeThreat ट्रेंड करने लगा। उनके ट्विटर अकाउंट पर 50 लाख फॉलोअर्स हैं, जहां पोस्ट को लाखों लाइक्स मिले। एक यूजर ने लिखा कि बाबा जी ने सही कहा, भारत अब मजबूत है। लेकिन कुछ ने कहा कि यह हिंसक भाषा है, जो अंतरराष्ट्रीय संबंध खराब करेगी। अमेरिकी मीडिया ने इसे कवर किया और कहा कि भारत का राष्ट्रवादी चेहरा उभर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन सुषमा स्वराज फाउंडेशन ने टैरिफ पर बातचीत की जरूरत बताई। पतंजलि के प्रवक्ता आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि कंपनी अमेरिकी बाजार को डाइवर्सिफाई करेगी। वे अब यूरोप और अफ्रीका पर फोकस करेंगे। बाबा रामदेव ने सभा में योग सेशन भी कराया, जहां सैकड़ों लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर से ही मजबूत अर्थव्यवस्था बनेगी। यह मुद्दा भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि भारत को समझौता करना होगा। लेकिन मोदी सरकार आत्मनिर्भरता पर अड़ी है।
यह बयान बाबा रामदेव की पुरानी शैली को दर्शाता है। वे अक्सर आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। 2011 में विदेशी निवेश पर उन्होंने कहा था कि एफडीआई का मुंह तोड़ देंगे। कोका कोला पर बहिष्कार का आंदोलन चलाया। रामदेव ने स्वदेशी आंदोलन को नया रूप दिया। पतंजलि ने 5000 से अधिक उत्पाद लॉन्च किए, जो केमिकल फ्री हैं। कंपनी का वैल्यूएशन 1 लाख करोड़ है। लेकिन विवाद भी रहे। 2021 में मिसली ब्रांड पर कोर्ट केस हुआ। बाबा रामदेव ने माफी मांगी। कोविड दवा पर भी सवाल उठे। फिर भी उनके करोड़ों अनुयायी हैं। योग दिवस पर वे दुनिया भर में कार्यक्रम करते हैं। अमेरिका में पतंजलि के 100 स्टोर हैं। टैरिफ से बिक्री 15 प्रतिशत गिर सकती है। बाबा रामदेव ने कहा कि हम अमेरिका को आयुर्वेद सिखाएंगे, न कि दबेंगे। यह बयान राष्ट्रवाद को भुनाने का प्रयास लगता है। भाजपा ने चुप्पी साधी, लेकिन आरएसएस ने समर्थन किया। विपक्षी नेता लालू यादव ने कहा कि बाबा जी व्यापार की बात करें, राजनीति छोड़ें।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैरिफ युद्ध जारी है। अमेरिका ने चाइना पर 60 प्रतिशत टैरिफ लगाया। भारत को चेतावनी दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम डब्ल्यूटीओ के नियमों का पालन करेंगे। लेकिन बाबा रामदेव का बयान पॉपुलिस्ट है। यह छोटे उद्योगों को हौसला देता है। पतंजलि ने नया प्लांट हरिद्वार में खोला, जो निर्यात बढ़ाएगा। बाबा रामदेव ने युवाओं से कहा कि वे स्टार्टअप करें। आयुर्वेद मार्केट 2025 में 50 हजार करोड़ का होगा। अमेरिका में डिमांड बढ़ रही है। बाबा रामदेव ने सभा में प्राणायाम सिखाया। लोग तालियां बजा रहे थे। यह बयान मीडिया हेडलाइंस बन गया। एनडीटीवी ने इसे प्रमुखता दी। बाबा रामदेव ने कहा कि भारत की आंखें मजबूत हैं। यह प्रतीकात्मक है। लेकिन डिप्लोमेसी में सावधानी बरतनी होगी। ट्रंप चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए आक्रामक हैं। भारत ने जवाबी टैरिफ की योजना बनाई है। अमेरिकी स्टील पर 10 प्रतिशत बढ़ा सकते हैं। बाबा रामदेव का बयान इस बहस को नया मोड़ देगा।
बाबा रामदेव की लोकप्रियता योग से है। वे सुबह 4 बजे उठते हैं और ध्यान करते हैं। पतंजलि विश्वविद्यालय चलाते हैं। महिलाओं के लिए विशेष कैंप लगाते हैं। अमेरिका दौरे पर वे योग सिखाते हैं। टैरिफ मुद्दे पर उनका गुस्सा जायज है। छोटे निर्यातक प्रभावित होंगे। सरकार ने एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल बनाई। बाबा रामदेव ने कहा कि हम आयुर्वेद को वैश्विक बनाएंगे। यह बयान एक चेतावनी है। भारत अब कमजोर नहीं। अर्थव्यवस्था ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत है। बाबा रामदेव ने समर्थकों से योग करने को कहा। सभा में 5000 लोग थे। यह घटना बाबा रामदेव को फिर सुर्खियों में लाई। वे राजनीति से दूर रहने का दावा करते हैं लेकिन बयान राजनीतिक लगते हैं।
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