बिहार चुनाव 2025: गोपालगंज की बरौली सीट से जेल में बंद अपराधी धर्मेंद्र क्रांतिकारी ने हथकड़ी लगाए नामांकन दाखिल किया, JJD से तेज प्रताप के उम्मीदवार।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन प्रक्रिया के बीच गोपालगंज जिले की बरौली विधानसभा सीट से एक अनोखी घटना ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। जेल में बंद
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन प्रक्रिया के बीच गोपालगंज जिले की बरौली विधानसभा सीट से एक अनोखी घटना ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। जेल में बंद कुख्यात अपराधी धर्मेंद्र सिंह उर्फ क्रांतिकारी ने हथकड़ी लगाए हुए गोपालगंज जिला समाहरणालय पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। वे जनशक्ति जनता दल (JJD) से चुनाव लड़ रहे हैं, जो राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेज प्रताप यादव द्वारा हाल ही में गठित की गई नई पार्टी है। यह नामांकन 17 अक्टूबर 2025 को दोपहर के समय हुआ, जब चुनाव आयोग के नियमों के तहत जेल अधिकारियों और पुलिस की सख्त सुरक्षा में उन्हें कोर्ट की अनुमति से लाया गया। धर्मेंद्र पर हत्या, अपहरण, जबरी वसूली और रंगदारी जैसे कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, फिर भी वे दावा कर रहे हैं कि यह उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जहां लोग इसे बिहार की अपराधी राजनीति का प्रतीक बता रहे हैं। बरौली सीट पहले चरण में 6 नवंबर को मतदान के दायरे में है, और यह घटना एनडीए व महागठबंधन दोनों के लिए सिरदर्द बन सकती है।
धर्मेंद्र क्रांतिकारी का नाम गोपालगंज और सीवान के अपराधी जगत में कुख्यात है। वे मूल रूप से गोपालगंज के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखते हैं, जहां से उन्होंने 2000 के दशक में अपराध की दुनिया में कदम रखा। स्थानीय लोगों के अनुसार, धर्मेंद्र ने शुरुआत में छोटे-मोटे विवादों से अपना नाम कमाया, लेकिन जल्द ही हत्या, लूट और जबरी वसूली के मामलों में फंस गए। 2018 में गोपालगंज पुलिस ने उन्हें एक रंगदारी वसूली के मामले में गिरफ्तार किया था। उसके बाद 2020 में एक व्यापारी अपहरण केस में फिर पकड़े गए। कुल मिलाकर उनके खिलाफ 12 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से चार हत्या से जुड़े हैं। गोपालगंज एसएसपी ने बताया कि धर्मेंद्र पर सरगना का आरोप है और वे जेल से ही अपने गुर्गों को निर्देश देते रहे हैं। बावजूद इसके, उन्होंने कई बार जमानत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में उनकी बेल याचिका खारिज कर दी। जेल में रहते हुए भी वे राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे और तेज प्रताप यादव से संपर्क में आए। तेज प्रताप की JJD, जो अगस्त 2025 में बनी, ने उन्हें टिकट देकर विवाद खड़ा कर दिया है।
नामांकन की प्रक्रिया बेहद सतर्कता से की गई। सुबह गोपालगंज जेल से धर्मेंद्र को स्पेशल वैन में लाया गया। उनके हाथों में हथकड़ी और कमर में चेन बंधी थी। जिला निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय में पहुंचते ही सुरक्षा घेराबंदी बढ़ा दी गई। लगभग 50 पुलिसकर्मी और जेल गार्ड तैनात थे। नामांकन पत्र भरते समय धर्मेंद्र ने कहा कि वे जेल की सलाखों के पीछे से भी जनता की आवाज बनेंगे। उनके समर्थक बाहर नारे लगा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें दूर रखा। नामांकन फॉर्म में उन्होंने JJD के लालटेन सिंबल का जिक्र किया और शपथ पत्र में आपराधिक मामलों का उल्लेख किया। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, जेल में बंद कैदी को नामांकन भरने का अधिकार है, बशर्ते कोर्ट अनुमति दे। गोपालगंज कोर्ट ने 16 अक्टूबर को इसकी मंजूरी दी थी। इस दौरान कोई हंगामा नहीं हुआ, लेकिन वीडियो में धर्मेंद्र का रोते हुए नामांकन भरना साफ दिख रहा है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। न्यूज24 और प्रभात खबर जैसे चैनलों ने इसे लाइव दिखाया।
बरौली विधानसभा क्षेत्र गोपालगंज जिले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां कुल आबादी करीब दो लाख है। यह सीट अनारक्षित है और यहां यादव, भूमिहार, ब्राह्मण और मुस्लिम वोटर प्रमुख हैं। 2020 के चुनाव में भाजपा के रामप्रवेश राय ने आरजेडी के रेयाजुल हक को 14,155 वोटों से हराया था। कुल मतदान 58 प्रतिशत रहा। इस बार एनडीए ने बरौली सीट जदयू को दी है, जहां से बैकुंठपुर के पूर्व विधायक मंजीत सिंह उम्मीदवार हैं। महागठबंधन से आरजेडी ने रेयाजुल हक को ही टिकट दिया है। लेकिन धर्मेंद्र का नामांकन निर्दलीय जैसा असर पैदा कर सकता है, क्योंकि उनके पास अपराधी समर्थक वोट बैंक है। तेज प्रताप यादव ने कहा कि JJD बिहार की नई राजनीति लाएगी और क्रांतिकारी जैसे नेताओं को मौका देगी। लेकिन विपक्ष ने इसे अपराधीकरण का प्रमाण बताया। भाजपा ने कहा कि ऐसे उम्मीदवारों से लोकतंत्र खतरे में है।
यह घटना बिहार की राजनीति में अपराध और चुनाव के गठजोड़ को फिर से उजागर करती है। बिहार में जेल से चुनाव लड़ने की परंपरा पुरानी है। 1990 के दशक में शहाबुद्दीन जैसे नेता जेल से ही सांसद बने। 2020 में भी कई उम्मीदवारों पर मामले थे। चुनाव आयोग ने आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों पर सख्ती की है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नामांकन वैध है। धर्मेंद्र के वकील ने कहा कि उनके क्लाइंट निर्दोष हैं और मामले राजनीतिक साजिश हैं। समर्थकों का कहना है कि क्रांतिकारी ने गरीबों के लिए काम किया है। लेकिन स्थानीय व्यापारी डरते हैं कि उनका चुनावी उतरना हिंसा बढ़ा सकता है। गोपालगंज एसपी ने सुरक्षा बढ़ाने का आश्वासन दिया है। JJD की स्थापना तेज प्रताप ने आरजेडी से अलग होकर की, जो लालू परिवार के आंतरिक कलह का नतीजा है। पार्टी का फोकस युवा और पिछड़े वर्ग पर है। बरौली से टिकट देकर JJD ने अपना पहला बड़ा दांव खेला है।
नामांकन के बाद धर्मेंद्र को वापस जेल भेज दिया गया। उनके समर्थक जिला समाहरणालय के बाहर जश्न मना रहे थे। वीडियो में वे रोते हुए कहते दिख रहे हैं कि जेल की दीवारें तोड़ देंगे। सोशल मीडिया पर #DharmendraKrantikari ट्रेंड कर रहा है। कुछ यूजर्स उनकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ अपराधीकरण पर सवाल उठा रहे हैं। प्रभात खबर ने रिपोर्ट किया कि नामांकन के दौरान कोई गड़बड़ी नहीं हुई। यह घटना बिहार चुनाव को और रोचक बना रही है। पहले चरण के नामांकन 18 अक्टूबर तक चलेंगे। बरौली में कुल 20 से अधिक उम्मीदवार हो सकते हैं। एनडीए और महागठबंधन अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। तेज प्रताप ने कहा कि JJD बिहार को नई दिशा देगी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उम्मीदवार वोट बांट सकते हैं। गोपालगंज में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यह नामांकन बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ रहा है। अपराधी से राजनेता बनने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जनता का फैसला अंतिम होगा। बरौली के मतदाता इन समीकरणों को समझेंगे। चुनाव आयोग ने सभी पार्टियों को चेतावनी दी है कि आचार संहिता का पालन करें। फिलहाल गोपालगंज में चुनावी माहौल गर्म है।
What's Your Reaction?