Sambhal: विदेशों में गूंज रही सम्भल की कारीगरी, ODOP से बदली हॉर्न-बोन इंडस्ट्री की तस्वीर, रोज़ बन रहे 90 हजार बटन।
सम्भल जनपद की पारंपरिक कारीगरी आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना चुकी है। थाना हयातनगर क्षेत्र के रसूलपुर
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल जनपद की पारंपरिक कारीगरी आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना चुकी है। थाना हयातनगर क्षेत्र के रसूलपुर धतरा में स्थित ‘कॉमन फैसिलिटी सेंटर’ में तैयार हो रहे हॉर्न और बोन से बने बटन अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहे, बल्कि जापान, ऑस्ट्रेलिया, चीन, अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों तक निर्यात हो रहे हैं।
कॉमन फैसिलिटी सेंटर में कार्यरत कारीगर बबलू अहमद बताते हैं कि यहाँ कच्ची हड्डी से लेकर फिनिश्ड बटन तक का पूरा काम आधुनिक मशीनों से किया जाता है। बटन निर्माण की प्रक्रिया आठ अलग-अलग मशीनों से होकर गुजरती है, जिसमें डिज़ाइन, शेपिंग और फिनिशिंग शामिल है। मशीनों की क्षमता के अनुसार एक दिन में 80 से 90 हजार बटन तैयार किए जा सकते हैं, हालांकि उत्पादन पूरी तरह ऑर्डर पर निर्भर करता है। वर्तमान में बटनों की डिमांड “ठीक-ठाक” बनी हुई है और अधिकतर ऑर्डर विदेशों से मिल रहे हैं। कारखाने में काम करने वाली महिला कर्मचारी वीरवती बताती हैं कि महिलाएं न सिर्फ मशीनों पर बटन बनाती हैं, बल्कि उनकी छंटाई और फिनिशिंग का जिम्मा भी संभालती हैं। उन्होंने कहा कि सम्भल में बनी चीज़ों का विदेशों तक जाना गर्व की बात है। फिलहाल इस यूनिट में 5 से 6 लोग कार्यरत हैं। ODOP (One District One Product) योजना के तहत हॉर्न एंड बोन इंडस्ट्री को मिली पहचान ने इस कारीगरी की तस्वीर ही बदल दी है। इस विषय में जानकारी देते हुए कमल कौशल ने बताया कि वर्ष 2018 में जब इस उत्पाद को ODOP में शामिल किया गया, तब से यहाँ तेज़ी से विकास हुआ। सरकार की ओर से कॉमन फैसिलिटी सेंटर की सुविधा मिली, साथ ही सम्भल के इन उत्पादों को दो GI टैग भी दिलाए गए। उन्होंने बताया कि पहले जिसे लोग बेकार और लुप्तप्राय कला मानते थे, आज वही हुनर रोज़गार और सम्मान का जरिया बन गया है। ODOP के बाद इस उद्योग का सालाना टर्नओवर 100–150 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 450 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है और सम्भल से सीधा निर्यात हो रहा है। बटन के अलावा यहाँ सींग के चश्मे, सीटी, आर्टिफिशियल ज्वेलरी और सजावटी वस्तुएँ जैसे फोटो फ्रेम, ट्रे, नेपकिन होल्डर, कैंडल होल्डर भी बनाए जाते हैं, जिनकी विदेशों में अच्छी मांग है। कारीगरी और आधुनिक तकनीक के इस मेल ने सम्भल का नाम वैश्विक मंच पर रोशन कर दिया है, जिसमें स्थानीय कारीगरों के साथ-साथ प्रशासन की भूमिका भी अहम मानी जा रही है।
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