Politics News: विदेश मंत्री एस. जयशंकर का सख्त संदेश- भारत के साथ सहयोग से पड़ोसियों को लाभ, दूरी से नुकसान, पाकिस्तान को बताया अपवाद। 

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में भारत की पड़ोसी देशों के साथ विदेश नीति को लेकर एक सशक्त बयान दिया। 22 जून 2025 को एक कार्यक्रम...

Jun 23, 2025 - 13:22
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Politics News: विदेश मंत्री एस. जयशंकर का सख्त संदेश- भारत के साथ सहयोग से पड़ोसियों को लाभ, दूरी से नुकसान, पाकिस्तान को बताया अपवाद। 

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में भारत की पड़ोसी देशों के साथ विदेश नीति को लेकर एक सशक्त बयान दिया। 22 जून 2025 को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "हर पड़ोसी को समझना चाहिए कि भारत के साथ मिलकर चलने से फायदा और दूरी बनाने से नुकसान है। हालांकि, पाकिस्तान एक अपवाद है, वहां की सेना की सोच भारत विरोधी है और वही वहां देश चलाती है।" यह बयान भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और क्षेत्रीय कूटनीति के प्रति उसके दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। जयशंकर ने भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों की जटिलताओं पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण रिश्तों पर, जो हाल के वर्षों में और गहरे हुए हैं।

  • जयशंकर का बयान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22 जून 2025 को एक कार्यक्रम में भारत की विदेश नीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक हितों को बढ़ावा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की नीति हमेशा सहयोग और साझेदारी पर आधारित रही है, लेकिन यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि सभी पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते हमेशा सुगम रहेंगे।

जयशंकर ने अपने बयान में पड़ोसी देशों को दो श्रेणियों में बांटा: वे जो भारत के साथ सहयोग के लाभों को जल्दी समझ लेते हैं, जैसे श्रीलंका और बांग्लादेश, और वे जिन्हें इसे समझने में समय लगता है, जैसे मालदीव और नेपाल। उन्होंने पाकिस्तान को एक अपवाद के रूप में चिह्नित किया, जहां "सेना की भारत-विरोधी सोच" देश की नीतियों को संचालित करती है। उन्होंने कहा कि भारत की नीति स्पष्ट है: "हम पहले छेड़ते नहीं, लेकिन अगर कोई छेड़ता है, तो हम छोड़ते भी नहीं।" यह बयान भारत की सख्त और रणनीतिक विदेश नीति को दर्शाता है, जो शांति और सहयोग को बढ़ावा देती है, लेकिन राष्ट्रीय हितों की रक्षा में कोई समझौता नहीं करती।

  • पाकिस्तान के साथ तनाव

जयशंकर का यह बयान 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव की पृष्ठभूमि में आया, जिसमें 26 भारतीय पर्यटकों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। भारत ने इस ऑपरेशन के शुरू होने के 30 मिनट बाद पाकिस्तान को सूचित किया कि केवल आतंकी ठिकाने निशाना बनाए जा रहे हैं, जिसके बाद इस्लामाबाद की पहल पर एक संघर्षविराम हुआ।

जयशंकर ने आतंकवाद को वैश्विक चुनौती के रूप में रेखांकित किया और कहा कि इसे भारत-पाकिस्तान या कश्मीर के मुद्दे तक सीमित नहीं करना चाहिए। उन्होंने 10 जून 2025 को कहा, "आतंकवाद को द्विपक्षीय समस्या के बजाय वैश्विक मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए।" उन्होंने पाकिस्तान के आतंकवाद से ऐतिहासिक संबंधों पर भी टिप्पणी की, यह कहते हुए कि कुछ देश इसे अपनी नीति के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जो वैश्विक समुदाय को समझना होगा।

  • भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति

जयशंकर ने भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति पर जोर दिया, जिसके तहत भारत ने श्रीलंका, मालदीव, नेपाल, और बांग्लादेश जैसे देशों के साथ संबंधों को मजबूत किया है। उन्होंने श्रीलंका का उदाहरण दिया, जहां शासन परिवर्तन के बावजूद भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत बने हुए हैं। मालदीव के साथ शुरुआती चुनौतियों के बाद संबंधों में सुधार हुआ है, जबकि नेपाल की आंतरिक राजनीति में भारत को अक्सर शामिल किया जाता है। जयशंकर ने सलाह दी कि कठिनाइयों के समय हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि समझदारी से रिश्तों में स्थिरता लानी चाहिए।

भारत ने बुनियादी ढांचे के विकास, विशेष रूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ सीमा क्षेत्रों में, महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। जयशंकर ने खाड़ी देशों, आसियान, और हिंद-प्रशांत क्षेत्रों के साथ संबंधों को गहरा करने के भारत के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

जयशंकर ने भारत की विदेश नीति को बहुध्रुवीय विश्व के संदर्भ में रेखांकित किया, जहां भारत ने रूस, यूक्रेन, इजरायल, और ईरान जैसे देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे हैं। उन्होंने 14 जनवरी 2025 को स्पेन में कहा, "क्वाड और ब्रिक्स के सदस्य होने के नाते, बहुत कम देश रूस और यूक्रेन, इजरायल और ईरान से बात करने की स्थिति में हैं। पीएम मोदी दोनों करने में सक्षम हैं।" यह भारत की अद्वितीय कूटनीतिक स्थिति को दर्शाता है, जो 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत पर आधारित है।

जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था में असंतुलन पर भी टिप्पणी की, विशेष रूप से पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंडों पर। उन्होंने 18 मार्च 2025 को कश्मीर मुद्दे पर पश्चिमी देशों की आलोचना की, यह कहते हुए कि पाकिस्तानी सेना के हमले को "विवाद" के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो वास्तव में एक हमला था। उन्होंने एक निष्पक्ष और मजबूत संयुक्त राष्ट्र की वकालत की।

  • सामाजिक और कूटनीतिक प्रभाव

जयशंकर का बयान भारत की सख्त और आत्मविश्वास से भरी विदेश नीति को दर्शाता है। यह संदेश देता है कि भारत सहयोग के लिए खुला है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों पर कोई समझौता नहीं करेगा। पाकिस्तान के साथ तनाव, विशेष रूप से पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद, ने भारत की स्थिति को और मजबूत किया है। जयशंकर ने आतंकवाद को वैश्विक चुनौती के रूप में पेश करके अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसे गंभीरता से लेने की अपील की है।

श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों के साथ संबंधों में सुधार भारत की कूटनीतिक सफलता को दर्शाता है। हालांकि, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों के साथ समय-समय पर तनाव देखा जाता है, जिसे जयशंकर ने "आंतरिक राजनीति में उलझने" के रूप में वर्णित किया।

जयशंकर ने भारत की विदेश नीति को बहुध्रुवीय विश्व में रणनीतिक रूप से संतुलित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य कम समस्याओं और अधिकतम लाभों के साथ एक सहयोगी वैश्विक व्यवस्था बनाना है। आने वाले समय में, भारत को चीन के साथ सीमा विवाद, पाकिस्तान के साथ आतंकवाद से संबंधित मुद्दों, और अन्य पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को संतुलित करना होगा।

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