Politics News: केरल में बीजेपी नेता एन. शिवराजन का विवादास्पद बयान- तिरंगे की जगह भगवा झंडा बनाने की मांग, कांग्रेस और वामपंथियों का तीखा विरोध।
केरल के पलक्कड़ जिले में 21 जून 2025 को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय परिषद सदस्य एन. शिवराजन के एक बयान...
केरल के पलक्कड़ जिले में 21 जून 2025 को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय परिषद सदस्य एन. शिवराजन के एक बयान ने देशभर में हंगामा खड़ा कर दिया। पलक्कड़ के अंचुविलक्कु जंक्शन पर बीजेपी के 'प्राउड ऑफ भारत माता' कार्यक्रम के दौरान शिवराजन ने कहा कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की जगह भगवा झंडा होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह उनकी निजी राय है और भारत का झंडा कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के झंडों जैसा नहीं हो सकता। इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए अपमानजनक टिप्पणी की और केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवकुट्टी को "शवकुट्टी" कहकर तंज कसा। इस बयान ने न केवल कांग्रेस और वामपंथी दलों बल्कि पूरे देश में तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया।
21 जून 2025 को पलक्कड़ के अंचुविलक्कु जंक्शन पर बीजेपी ने 'प्राउड ऑफ भारत माता' अभियान के तहत एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। यह प्रदर्शन केरल के राजभवन में 'भारत माता' की तस्वीर के प्रदर्शन को लेकर चल रहे विवाद के जवाब में था, जिसमें भारत माता को भगवा झंडा पकड़े हुए दिखाया गया था। इस तस्वीर को लेकर सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने राजभवन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रतीकों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। इस विरोध प्रदर्शन में बीजेपी ने एलडीएफ और यूडीएफ पर 'भारत माता' का अपमान करने का आरोप लगाया।
इसी मंच से एन. शिवराजन, जो पलक्कड़ नगरपालिका के मौजूदा पार्षद और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय परिषद सदस्य हैं, ने विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने कहा, "राजनीतिक दलों को तिरंगे जैसे दिखने वाले झंडों का उपयोग करने से रोकना चाहिए। कांग्रेस और एनसीपी को अलग-अलग झंडे अपनाने चाहिए, जैसे कांग्रेस के लिए हरा झंडा।" इसके बाद, उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "सोनिया गांधी और राहुल गांधी, जो भारतीय इतिहास से अनजान हैं, उनके लिए इटली का झंडा ही ठीक रहेगा।" सबसे विवादास्पद हिस्सा उनका यह बयान था कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज भगवा होना चाहिए।
इसके अलावा, शिवराजन ने केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवकुट्टी को "शवकुट्टी" कहकर अपमानित किया, जो मलयालम में एक अपमानजनक शब्द है। यह बयान उस समय आया, जब शिवकुट्टी ने राजभवन में भारत माता की तस्वीर के प्रदर्शन के खिलाफ विरोध जताया था और एक समारोह से बाहर चले गए थे। शिवराजन के बयान के तुरंत बाद, पलक्कड़ में कांग्रेस और सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए।
- कांग्रेस और अन्य दलों की प्रतिक्रिया
शिवराजन के बयान के खिलाफ कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पलक्कड़ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सी.वी. सतीश और जिला उपाध्यक्ष सुमेश अच्युतन ने पलक्कड़ जिला पुलिस प्रमुख को शिकायत दर्ज कराई, जिसमें राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) और भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह) के तहत कार्रवाई की मांग की गई। शिकायत में कहा गया कि शिवराजन का बयान राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है और यह भारतीय संविधान के मूल्यों के खिलाफ है।
कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य रमेश चेन्नीथला ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा, "राजभवन एक संवैधानिक संस्था है, न कि आरएसएस की शाखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जो बीजेपी से जुड़े हैं, अपने कार्यालयों में तिरंगा ही फहराते हैं, न कि भगवा झंडा।" इसके अलावा, कांग्रेस ने अपने आधिकारिक X हैंडल (@INCIndia) पर लिखा, "एन. शिवराजन, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बेहद करीबी हैं और उनका यह शर्मनाक बयान बीजेपी-आरएसएस की उस देश विरोधी मानसिकता का सबूत है, जिसमें ये तिरंगे का अपमान करते आए हैं।"
सीपीआई(एम) ने भी इस बयान की निंदा की। पार्टी के मुखपत्र 'देशभिमानी' ने एक संपादकीय में लिखा कि राजभवन को आरएसएस की शाखा में तब्दील किया जा रहा है। सीपीआई(एम) की युवा शाखा डीवाईएफआई (डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया) ने पलक्कड़ में संविधान की प्रति हाथ में लेकर शिवराजन के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनकी गिरफ्तारी की मांग की। कोझिकोड में बीजेपी की युवा शाखा युवा मोर्चा और सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई, जिसमें एक युवा मोर्चा कार्यकर्ता को हिरासत में लिया गया।
शिवराजन का बयान राष्ट्रीय ध्वज के अपमान से संबंधित कानूनों के तहत गंभीर अपराध माना जा सकता है। राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 के तहत राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने पर तीन साल तक की सजा और जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। कांग्रेस और डीवाईएफआई की शिकायतों में इस कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
इसके अलावा, शिवराजन का यह कहना कि कांग्रेस और एनसीपी को अलग-अलग झंडे अपनाने चाहिए और सोनिया व राहुल गांधी के लिए इटली का झंडा उपयुक्त है, न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे सकता है। बीजेपी के इस बयान ने केरल में पहले से चल रहे 'भारत माता' विवाद को और हवा दी, जिसमें राजभवन में भगवा झंडे के साथ भारत माता की तस्वीर को लेकर विवाद हो रहा है।
बीजेपी ने इस बयान पर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पार्टी ने 'भारत माता' तस्वीर विवाद में राजभवन का समर्थन किया है। केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने राजभवन में तस्वीर के प्रदर्शन को उचित ठहराया। हालांकि, बीजेपी ने पहले एक फेसबुक पोस्ट में भारत माता को तिरंगे के साथ दिखाया था, लेकिन बाद में भगवा झंडे के साथ तस्वीर का समर्थन किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि पार्टी इस मुद्दे पर अपने रुख में बदलाव कर रही है।
शिवराजन का यह बयान बीजेपी और आरएसएस की हिंदुत्ववादी विचारधारा के अनुरूप माना जा रहा है। बीजेपी और आरएसएस का इतिहास रहा है कि वे राष्ट्रीय प्रतीकों को अपनी विचारधारा से जोड़ने की कोशिश करते हैं। 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से हिंदुत्व से जुड़े प्रतीकों, जैसे भगवा झंडे, को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। कांग्रेस ने अपने बयान में दावा किया कि आरएसएस ने 52 साल तक तिरंगे को स्वीकार नहीं किया, जो इस विवाद को और गहरा करता है।
केरल में यह घटना राजनीतिक तनाव को और बढ़ाने वाली साबित हुई है। केरल में बीजेपी का प्रभाव सीमित रहा है, और 2021 के विधानसभा चुनावों में उसे एक भी सीट नहीं मिली थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने एक सीट जीती थी। इस तरह के बयान बीजेपी की छवि को और नुकसान पहुंचा सकते हैं, खासकर केरल जैसे राज्य में, जहां धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक मूल्यों को लेकर लोग संवेदनशील हैं।
सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। X पर @MahilaCongress ने लिखा, "यह बयान बीजेपी-आरएसएस की देश विरोधी मानसिकता का सबूत है।" इसी तरह, @INCMumbai ने इसे शर्मनाक और तिरंगे का अपमान बताया। कुछ यूजर्स ने इसे देशद्रोह करार दिया, जैसे @iamcharu_01 ने लिखा, "क्या इसको देशद्रोही कह सकते हैं?"
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