Deoband : बांग्लादेश के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपना रही केंद्र सरकार- मसूद

वरिष्ठ कांग्रेस नेता साद सिद्दीकी के आवास पर पहुंचे इमरान मसूद ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर कहा कि सरकार दोहरा रवैया

Jan 8, 2026 - 21:38
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Deoband : बांग्लादेश के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपना रही केंद्र सरकार- मसूद
Deoband : बांग्लादेश के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपना रही केंद्र सरकार- मसूद

देवबंद। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बांग्लादेश के मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार दोहरा रवैया अपना रही है। जबकि दिल्ली दंगे में जेल में बंद उमर खालिद को बेसकूर बताते हुए कहा कि दंगे के समय वह वहां मौजूद नहीं था, उसके बावजूद पांच साल से जेल में डाला हुआ है।

बुधवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता साद सिद्दीकी के आवास पर पहुंचे इमरान मसूद ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर कहा कि सरकार दोहरा रवैया अपना रही है। देश में बांग्लादेश के पुतले जलवा रही है और विदेश मंत्री बांग्लादेश के मंत्रियों से हाथ मिला रहे हैं। उन्होंने इशारों में सपा मुखिया अखिलेश यादव और उनकी पार्टी के नेताओं पर निशाना साधा। कहा कि उमर खालिद के उपर जो चुप्पी साधी हुई है वे बेहतर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में कहा है कि अपराध की गंभीरता व्यक्ति को उसके जमानत के अधिकार से नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति दंगे के समय वहां मौजूद भी नहीं था उसके बावजूद उसे पांच साल से जेल में डाला हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट को स्वत: ही इसका संज्ञान लेना चाहिए। क्योंकि उमर खालिद का कोई ब्यान ऐसा नहीं है जो देशद्रोह की श्रेणी में आता हो। इमरान मसूद ने सपा की ओर इशारा करते हुए सवाल दागा कि संभल में मस्जिदें गिराई गई, मुस्लिमों के साथ जो कुछ हो रहा है वे किसी से छिपा नहीं है, दिल्ली में भी मस्जिद में तोड़फोड़ की गई और दिल्ली दंगे में जेल में बंद उमर खालिद के मुद्दे पर इनकी जुबान पर ताला क्यों लगा हुआ है। क्या मुसलमान सिर्फ वोट बैंक के लिए इस्तेमाल होगा जो उनके मुद्दे पर उन्हें बोलते हुए डर लगता है। कहा कि अगर तुम नहीं बोलोगे तो फिर मुसलमानों के लिए कौन बोलेगा और जो मुसलमान बोलता है उसके पीछे चंगू-मंगू लगा दिए जाते हैं। इन्हें बोलता हुआ मुसलमान बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ ब्यान देने से कोई फर्क नहीं पड़ता, बयान देने वालों की इतनी हैसियत नहीं कि उनका जवाब दिया जाए।

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