Deoband : बिहार में मॉब लिंचिंग पीड़ित अथहर हुसैन के परिवार को जमीयत उलेमा-ए-हिंद देगी कानूनी मदद
मौलाना अरशद मदनी ने बयान में कहा कि जमीयत की कानूनी टीम अनुभवी वकीलों का पैनल बनाएगी। इससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा और दोषियों को सजा दिलाई जा
देवबंद। जमीयत उलेमा-ए-हिंद बिहार के नवादा जिले में मॉब लिंचिंग का शिकार हुए मोहम्मद अथहर हुसैन के परिवार को कानूनी सहायता देगी। जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि पीड़िता की पत्नी की अपील पर जमीयत कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर करेगी। मौलाना अरशद मदनी ने बयान में कहा कि जमीयत की कानूनी टीम अनुभवी वकीलों का पैनल बनाएगी। इससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।
घटना पर अफसोस जताते हुए मौलाना मदनी ने पूछा कि नवादा में एक गरीब कपड़ा विक्रेता अथहर हुसैन को नाम और धर्म पूछकर मार डाला गया तो मीडिया चुप क्यों है? क्या इसलिए क्योंकि मृतक मुस्लिम था? यह दोहरा व्यवहार क्यों? उन्होंने कहा कि अन्याय किसी के साथ भी हो, वह अन्याय ही होता है। इंसानियत का दावा करने वाले को हर अन्याय के खिलाफ बोलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद ऐसी घटनाएं होना दिखाता है कि अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता है, इसलिए उनके हौसले बुलंद हैं।
शुरुआत में पुलिस ने हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था, जबकि अथहर हुसैन ने अस्पताल में बयान दिया था। जमीयत के दबाव के बाद हत्या की धारा जोड़ी गई। इससे सरकार की असलियत सामने आई कि सत्ता के लिए मानव जीवन की कोई कीमत नहीं। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि पिछले नौ साल में 200 से ज्यादा मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट के रुख के बावजूद राज्य सरकारों का रवैया गैर-जिम्मेदाराना रहा है। ये घटनाएं सांप्रदायिक ताकतों की नफरत वाली राजनीति का नतीजा हैं, जो देश में खुलेआम हो रही है।
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