Deoband News: उत्तराखंड में मदरसों पर कार्रवाई से बौखलाई जमीयत, सुप्रीम कोर्ट पहुंची
जमीयत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। बताया कि जमीयत की इस याचिका पर मंगलवार (आज) सुनवाई हो सकती है। मौलाना मदनी ने कहा कि उत्तराखंड में मदरसों को जो नोटिस जा...
By INA News Deoband.
देवबंद: बाल अधिकारों से संबंधित राष्ट्रीय आयोग (एनसीपीसीआर) की सिफारिशों को आधार बनाकर उत्तराखंड सरकार की मदरसों और मकतबों को बंद करने की कार्रवाई से जमीयत उलमा-ए-हिंद बौखला गई है।
जमीयत ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि उत्तराखंड में मकतब और मदरसों के कार्यों में सरकारी अधिकारी असांवैधानिक हस्तक्षेप कर रहे हैं और मदरसा संचालकों को भयभीत कर रहे हैं।
जिसको लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। बताया कि जमीयत की इस याचिका पर मंगलवार (आज) सुनवाई हो सकती है। मौलाना मदनी ने कहा कि उत्तराखंड में मदरसों को जो नोटिस जारी किए गए उनमें तथ्यों की उपेक्षा करते हुए दलील दी गई कि मुफ्त और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार एक्ट -2009 के तहत मदरसा मान्यता प्राप्त नहीं है तो उसे बंद किया जाए।
साथ ही उसमें पढ़ने वाले छात्रों को सरकारी विद्यालय में दाखिल करा दिया जाए। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि उत्तराखंड में हो रही यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। उत्तर प्रदेश में भी इस प्रकार की कार्रवाई की गई थी तब भी जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और उनकी याचिका पर चीफ जस्टिस वीआई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में दो सदस्य बेंच ने उन सभी नोटिसों पर रोक लगा दी थी जो विभिन्न राज्यों विशेष रूप से उत्तर प्रदेश सरकार ने जारी किए गए थे।
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