Deoband : बांग्लादेश की घटना चर्चा और देश में ही रही मॉबलिंचिंग पर चुप्पी क्यों- अरशद मदनी
कहा कि दुख की बात है कि जगह-जगह चर्चों पर हमले हुए ईसाइयों को अपना त्योहार मनाने से रोकने का प्रयास किया गया, मगर इन घटनाओं की न तो सरकार ने निंदा की
- बांग्लादेश में जो कुछ हुआ बहुत बुरा हुआ, इस्लाम इसकी कदापि अनुमति नहीं देता।
- राजनीति को चमकाने और सत्ता प्राप्त करने के लिए कुछ लोग धर्म का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं
देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बांग्लादेश की घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि भीड़ हिंसा में किसी को बेरहमी से मार देना केवल एक हत्या नहीं बल्कि क्रूरता की पराकाष्ठा है। लेकिन अफसोस की बात है कि बांग्लादेश की घटना पर चर्चा और देश में हो रही मॉबलिंचिंग पर चुप्पी साध लेना यह दोहरा मापदंड क्यों है।
मौलाना अरशद मदनी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ हुआ बहुत बुरा हुआ, इस्लाम इसकी कदापि अनुमति नहीं देता। जिन लोगों ने ऐसा किया है उन्होंने इस्लामी शिक्षा का उल्लंघन ही नहीं किया बल्कि इस्लाम को बदनाम करने का काम किया है। ऐसे लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। मौलाना मदनी ने कहा कि राजनीति को चमकाने और सत्ता प्राप्त करने के लिए कुछ लोग धर्म का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, इससे धार्मिक कट्टरता में खतरनाक हद तक बढ़ोतरी हो रहा है। इसकी वजह से अल्पसंख्यक जहां भी हैं खुद को असुरक्षित समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि क्रिसमस के अवसर पर ईसाइयों के साथ अराजक तत्वों ने जो कुछ किया उसे भी उचित नहीं ठहराया जा सकता। यह एक तरह से संविधान में नागरिकों को दी गई धार्मिक आजादी पर हमला है।
कहा कि दुख की बात है कि जगह-जगह चर्चों पर हमले हुए ईसाइयों को अपना त्योहार मनाने से रोकने का प्रयास किया गया, मगर इन घटनाओं की न तो सरकार ने निंदा की और न ही उनके मंत्रीमंडल के किसी साथी ने इस पर कोई बयान दिया। इस दोहरे मापदंड को क्या नाम दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जो कुछ भी हो रहा है बांग्लादेश, अपने देश में हो या फिर किसी अन्य देश में इसके पीछे धार्मिक कट्टरता की ही मूल भूमिका है। मदनी ने कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ हो रही है उसकी चौतरफा निंदा हो रही है, लेकिन इसका दूसरा दुखद पहलू यह है कि बिहार और छत्तीसगढ़ समेत जब देश के अंदर इस प्रकार की घटनाएं होती हैं तो फिर यही लोग अपना मुंह बंद कर लेते हैं। माॅबलिंचिंग करके जब किसी निर्दोष को मौत के घाट उतार दिया जाता है तो पक्षपाती मीडिया चुप्पी साध लेती है। उस वक्त हमारी मानवता कहां चली जाती है।
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