Hardoi News: आसमां ने भी झुककर वीरों की शौर्यगाथाएं सुनीं, अमर वीरों की वीरकथा सुन आंखें हुईं नम। 

पूर्व सैनिक वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा आयोजित रेज़ांगला शौर्य दिवस के अवसर पर शहीद सैनिकों एवं उनके परिजनों को सम्मानित किया गया व शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि....

Nov 19, 2024 - 11:45
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Hardoi News: आसमां ने भी झुककर वीरों की शौर्यगाथाएं सुनीं, अमर वीरों की वीरकथा सुन आंखें हुईं नम। 

By INA News Desk Hardoi

हरदोई जिले में एक बार फिर देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों की कथाएं आसमान ने भी सर झुकाकर सुनीं। ये वीरकथाएं सुन लोगों की आंखें आशुओं से सराबोर हो गईं। अवसर था रेजांगला शौर्य दिवस के आयोजन का।

पूर्व सैनिक वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा आयोजित रेज़ांगला शौर्य दिवस के अवसर पर शहीद सैनिकों एवं उनके परिजनों को सम्मानित किया गया व शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शहर के शहीद उद्यान में आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन, जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह, भाजपा विधायक माधवेन्द्र प्रताप सिंह रानू, जिला सैनिक कल्याण कर्नल ओपी मिश्रा एवं सामाजसेवी सुहाना जैन ने शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व सैनिकों ने देश के युवाओं से भारतीय सेवा में शामिल होने की अपील की और कहा कि यदि देश को देखना हो तो भारतीय सेवा में जरूर शामिल हो देश में आज पुरुषों के साथ महिलाएं भी सेना में भर्ती हो रही हैं जो देश के लिए गौरव की बात है। हमारे देश की मिट्टी में जन्मा हर सैनिक तिरंगे के गौरव के लिए मर मिटने को तैयार रहता है।

मुख्य अतिथि कारगिल योद्वा नायक दीपचन्द्र ने कहा कि आज हमारे देश में भारत चीन के बीच रेजांगला का जो युद्ध हुआ था जिसमें भारतीय सेवा के 100 से 150 सैनिक थे जबकि चीन के हजारों सैनिक थे जिनको भारतीय सैनिकों द्वारा पराक्रम बहादुरी से धूल चटाई थी उसका आज शौर्य दिवस है। उसी के सिलसिले में हरदोई में आज वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए आमंत्रित किया गया था। नायक दीपचंद्र ने कविता के माध्यम से कहा कि हम मिट जाए लेकिन यह देश रहना चाहिए। इस बीच विभिन्न मनीषियों ने अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए। इस अवसर पर भारत देश की आजादी में अग्रणी भूमिका निभाने व अपने प्राण न्यौछावर कर देने वाले चंद्रशेखर आजाद के पौत्र अमित आजाद को मंच पर बुलाकर सम्मान दिया गया। कहा कि चन्द्रशेखर आज़ाद ने मृत्यु दण्ड पाये तीनों प्रमुख क्रान्तिकारियों की सजा कम कराने का काफी प्रयास किया।

वे उत्तर प्रदेश की हरदोई जेल में जाकर गणेश शंकर विद्यार्थी से मिले। विद्यार्थी से परामर्श कर वे इलाहाबाद गये और 20 फरवरी को जवाहरलाल नेहरू से उनके निवास आनन्द भवन में भेंट की। आजाद ने पण्डित नेहरू से यह आग्रह किया कि वे गांधी जी पर लॉर्ड इरविन से इन तीनों की फाँसी को उम्र- कैद में बदलवाने के लिये जोर डालें। अल्फ्रेड पार्क में अपने एक मित्र सुखदेव राज से मन्त्रणा कर ही रहे थे तभी सीआईडी का एसएसपी नॉट बाबर जीप से वहाँ आ पहुँचा।

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उसके पीछे-पीछे भारी संख्या में कर्नलगंज थाने से पुलिस भी आ गयी। दोनों ओर से हुई भयंकर गोलीबारी में आजाद ने तीन पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतार दिया और कई अंग्रेज़ सैनिक घायल हो गए। अंत में जब उनकी बंदूक में एक ही गोली बची तो वो गोली उन्होंने खुद को मार ली और वीरगति को प्राप्त हो गए। इस दौरान पूर्व आयोजित कवि सम्मेलन में प्रतिभाग करने वाले कवियो तथा वीरगति प्राप्त सैनिकों के परिवारजनों को माला पहनाकर, शाल एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।

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