Hardoi News: हरदोई में चाइल्ड हेल्पलाइन बनी मासूम की उम्मीद: सैदापुर में भटकता मिला 11 वर्षीय बालक, लखनऊ के बाल गृह में मिला अस्थायी आश्रय
9 मई 2025 को हरदोई के सांडी थाना क्षेत्र के सैदापुर गांव में ग्रामीणों को एक लगभग 11 वर्षीय बालक अकेला घूमता हुआ दिखाई दिया। बच्चे की हालत देखकर ग्रामीणों ने उससे उसका नाम, पता, और परिवार के.....
By INA News Hardoi.
हरदोई: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के सांडी थाना क्षेत्र में एक 11 वर्षीय बालक, जो अकेला और लावारिस हालत में सैदापुर गांव में भटक रहा था, को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 ने नया जीवनदान दिया है। ग्रामीणों की सूझबूझ और पुलिस की तत्परता के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने बच्चे को अपनी देखरेख में लिया और उसे लखनऊ के बाल गृह में अस्थायी आश्रय प्रदान किया। इस घटना ने एक बार फिर चाइल्ड हेल्पलाइन की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया है, जो बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए 24 घंटे तत्पर रहती है। चाइल्ड हेल्पलाइन के जिला प्रभारी अनूप तिवारी ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को बच्चे के परिजनों की जानकारी हो, तो वह तुरंत संपर्क करें ताकि बच्चे को उसके परिवार तक पहुंचाया जा सके।
9 मई 2025 को हरदोई के सांडी थाना क्षेत्र के सैदापुर गांव में ग्रामीणों को एक लगभग 11 वर्षीय बालक अकेला घूमता हुआ दिखाई दिया। बच्चे की हालत देखकर ग्रामीणों ने उससे उसका नाम, पता, और परिवार के बारे में पूछताछ की, लेकिन बालक कोई जानकारी नहीं दे सका। वह भयभीत और असमंजस में दिख रहा था। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना सांडी थाना पुलिस को दी और बच्चे को पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस ने बच्चे से बातचीत करने और उसके परिजनों का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन कई घंटों के प्रयास के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। बच्चे की उम्र और स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तत्काल महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को सूचना दी। चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्चे को अपनी देखरेख में लिया और उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए।
चाइल्ड हेल्पलाइन के जिला प्रभारी अनूप तिवारी ने बताया कि सूचना मिलते ही उनकी टीम तुरंत सांडी थाना पहुंची। बच्चे से बातचीत के दौरान उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति का आकलन किया गया। बच्चा भयभीत था और अपनी पहचान या परिवार के बारे में कुछ भी बताने में असमर्थ था। अनूप तिवारी ने बताया, “हमने बच्चे को पहले शांत करने की कोशिश की और उसे भरोसा दिलाया कि वह सुरक्षित है। इसके बाद, हमने उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू की।”
सीडब्ल्यूसी के निर्देश पर बच्चे को अस्थायी रूप से लखनऊ के बाल गृह में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उसे भोजन, आवास, और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम अब बच्चे के परिजनों का पता लगाने के लिए पुलिस और अन्य संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है। अनूप तिवारी ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि बच्चे को जल्द से जल्द उसके परिवार तक पहुंचाया जाए। यदि कोई व्यक्ति बच्चे के परिवार या रिश्तेदारों के बारे में जानकारी दे सकता है, तो वह चाइल्ड हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1098 या मेरे नंबर 9918229858 पर संपर्क कर सकता है।”
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 भारत में बच्चों के लिए एक राष्ट्रीय आपातकालीन टोल-फ्री सेवा है, जो 24 घंटे और साल के 365 दिन उपलब्ध रहती है। यह सेवा महिला और बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार, के तहत संचालित होती है और चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा प्रबंधित की जाती है। यह हेल्पलाइन बच्चों को विभिन्न संकटों, जैसे लापता होना, शोषण, श्रम, और उपेक्षा, से बचाने के लिए त्वरित सहायता प्रदान करती है।
चाइल्डलाइन की वेबसाइट के अनुसार, यह सेवा बच्चों को चिकित्सा सहायता, आश्रय, पुनर्वास, और भावनात्मक समर्थन प्रदान करती है। हेल्पलाइन बच्चों को दीर्घकालिक देखभाल और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हरदोई में इस मामले में चाइल्ड हेल्पलाइन की त्वरित प्रतिक्रिया ने एक बार फिर इसकी प्रभावशीलता को साबित किया है।
इस घटना ने स्थानीय समुदाय और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। सैदापुर गांव के ग्रामीणों ने बच्चे को पुलिस के हवाले करने में जो मानवीयता दिखाई, उसकी सराहना की जा रही है। गांव के निवासी रामप्रकाश ने कहा, “बच्चा बहुत डरा हुआ था। हमने उसे खाना और पानी दिया, लेकिन उसकी हालत देखकर हमें लगा कि पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन ही उसकी मदद कर सकती है।”
सांडी थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस बच्चे के परिजनों का पता लगाने के लिए आसपास के गांवों और थानों में सूचना प्रसारित कर रही है। उन्होंने कहा, “हमने बच्चे की तस्वीर और विवरण अन्य जिलों की पुलिस के साथ साझा किया है। चाइल्ड हेल्पलाइन के साथ मिलकर हम यह सुनिश्चित करेंगे कि बच्चा अपने परिवार तक पहुंचे।”
हरदोई जिला, जो उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में से एक है, समय-समय पर लापता बच्चों और बाल श्रम जैसे मामलों से जूझता रहा है। चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन के अनुसार, उत्तर प्रदेश में हर साल हजारों बच्चे लापता हो जाते हैं, जिनमें से कई तस्करी, श्रम, या उपेक्षा का शिकार हो जाते हैं। हरदोई में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की उपस्थिति ने ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई को संभव बनाया है।
चाइल्ड हेल्पलाइन के जिला प्रभारी अनूप तिवारी ने जनता से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति इस बच्चे के परिवार या रिश्तेदारों के बारे में जानकारी रखता है, तो वह तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1098 या उनके निजी नंबर 9918229858 पर संपर्क करे। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता है कि बच्चे को उसके परिवार तक सुरक्षित पहुंचाया जाए। इसके लिए हम पुलिस, सीडब्ल्यूसी, और अन्य संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।”
पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन अब बच्चे की पहचान और परिजनों का पता लगाने के लिए सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार चैनलों का सहारा ले रही हैं। इसके अलावा, बच्चे की तस्वीर और विवरण राष्ट्रीय स्तर पर चाइल्डलाइन के नेटवर्क के माध्यम से साझा किए जा रहे हैं ताकि उसके परिवार तक पहुंचने की संभावना बढ़े।
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