Hardoi News: ये दुगुना सौभाग्य है कि मैं उन चरण पादुकाओं के सामने हूं, एसपी ने कहा- आजादी दिलाने में कटियारी क्षेत्र का विशेष योगदान

कहा कि 26 जनवरी 1932 को शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि देने का काम ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने 'शहीदों की चिंताओं पर...

Jan 27, 2025 - 01:01
Jan 27, 2025 - 01:50
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Hardoi News: ये दुगुना सौभाग्य है कि मैं उन चरण पादुकाओं के सामने हूं, एसपी ने कहा- आजादी दिलाने में कटियारी क्षेत्र का विशेष योगदान

Reported By Vijay Laxmi Singh(Editor-In-Chief)

By INA News Hardoi.

ये दुगुना सौभाग्य है कि मैं उन चरण पादुकाओं के सामने हूं, जिन्हें कभी भारत की आजादी के नायक सरदार भगत सिंह ने पहना था। यह बात एसपी(SP) नीरज कुमार जादौन ने गणतंत्र दिवस(Republic Day) की पूर्व संध्या पर शहीद स्मारक सिमरिया हरपालपुर में आयोजित 12वें कवि सम्मेलन में कहीं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान को आजादी दिलाने में कटियारी क्षेत्र का विशेष योगदान रहा है।वर्ष 1932 में सेमरिया मेले में क्षेत्र के बलिदानियों पर अंग्रेजों की बर्बरता पूर्ण गोलीकांड आजादी के इतिहास में मिनी जलियां वाला बाग हत्याकांड के रूप में मशहूर है। इसमें 269 लोग शहीद हुए थे। बता दें कि हरदोई के इतिहास में पहली बार क्रांतिकारी भगत सिंह के जूते शहीद स्मारक सिमरिया में पूजे गए।गणतंत्र दिवस(Republic Day) की पूर्व संध्या पर शहीद स्मारक सिमरिया हरपालपुर हरदोई में 12वां कवि सम्मेलन आयोजित किया गया इस कवि सम्मेलन में वीर, ओज कवियों ने अपनी जोशीली कविताएं प्रस्तुत की। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण है रहे क्रांतिकारी भगत सिंह के वह जूते जिन्हें पहनकर क्रांतिकारी भगत सिंह ने दिल्ली असेंबली में बम फेंका और देश को आजाद करने के लिए फांसी की सजा कबूल की, हरदोई के पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने उन जूते पर माल्यार्पण किया और एक सैल्यूट भगत सिंह के उन जूते को दिया।जिन्होंने देश को आजाद करने में अपने कदम कभी पीछे नहीं किया। एसपी(SP) ने कार्यक्रम आयोजन समिति को धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं आभारी हूं कि इस स्थल की मर्यादा को समझकर इस तरह का आयोजन किया। कहा कि 26 जनवरी 1932 को शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि देने का काम ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से किया जा रहा है।उन्होंने 'शहीदों की चिंताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा' पंक्तियों के साथ जोश भरा। पुष्प की मर्यादा समझाते हुए कवि की पक्तियां दोहराई कि मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर देना तुम फेंक, मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जावें वीर अनेक। इन पंक्तियों को सुन सभी ने तालियों की गड़गड़ाहट से समां को देशभक्ति के रंगों से भर दिया।इस बीच हरदोई के प्रख्यात कवि श्रवण कुमार मिश्रा राही ने इसका संचालन करते हुए आजादी के सपूतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की वहीं वीर रस के कवि राजकुमार सिंह प्रखर, आशुतोष द्विवेदी, राजेश बाबू अवस्थी ,उदय राज सिंह ,पल्लवी मिश्रा, रूबी और मीतू मिश्रा ने अपनी कविताओं से कवि सम्मेलन में समां बांधे रखा।इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने भगत सिंह के साथ ही क्रांतिकारी जयदेव कपूर के सुपुत्र संजय कपूर और उनके पौत्र सुयश कपूर को सम्मानित किया। एसपी(SP) ने कहा कि वर्ष 1932 को इसी मेले में अंग्रेजों के खिलाफ जंग का ऐलान कर क्रांतिकारियों ने एक बड़ी सभा कर आजादी की लड़ाई का बिगुल फूंका था। क्रांतिकारियों का जुलूस इंकलाब के नारों के साथ सेमरिया मेले में जा पहुंचा।जहां मेले में कंट्रोलर मजिस्ट्रेट को नागवार गुजरा। इसमें जुलूस पर रोक का फरमान जारी किया। जिसे क्रांतिकारियों ने खारिज कर दिया। आजादी दो इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए गए। बात यहां तक बढ़ गई कि मजिस्ट्रेट ने मेले की भीड़ पर गोली चलाने का आदेश अंग्रेज सिपाहियों को दे डाला।गोलीकांड में लगभग 269 निर्दोष लोग मारे गए। लाशों को अंग्रेजों ने अपने जुर्म पर पर्दा डालने के लिए रातों-रात रामगंगा नदी में डलवा दिया। अंग्रेजी हुकूमत इतने पर भी शांत नहीं हुई और उसने क्षेत्र के आसपास के तमाम क्रांतिकारियों की एक सूची तैयार कर मेले में दंगा फसाद का आरोप लगाकर तमाम लोगों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए।जिसमें 24 लोगों को जेल भी भेजा गया था। इस समारोह में स्काउट और गाइड के बच्चों ने शहीद स्मारक पर सेल्यूट किया और जिला स्काउट मास्टर डॉ पंकज वर्मा ने बच्चों को राष्ट्र के प्रति प्रेम दर्शाने की भावनाओं को बताया बड़ी संख्या में आसपास के गांव के लोगों ने शहीद स्मारक पर गणतंत्र दिवस(Republic Day) की पूर्व संध्या पर क्रांतिकारी भगत के सिंह जूतों और स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।  

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