Hardoi News: जितने स्कूल बंद होंगे, BJP को उतने बूथों पर नुकसान होगा, गोपामऊ विधायक श्याम प्रकाश ने परिषदीय विद्यालयों के विलय का किया कड़ा विरोध, मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग

गोपामऊ के भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने इस मुद्दे पर अपनी पार्टी की सरकार के खिलाफ खुलकर बोलते हुए कहा, “अधिकारियों द्वारा स्कूल बंद करने की सलाह और निर्णय अनु...

By INA News Desk
Jul 6, 2025 - 20:42
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Hardoi News: जितने स्कूल बंद होंगे, BJP को उतने बूथों पर नुकसान होगा, गोपामऊ विधायक श्याम प्रकाश ने परिषदीय विद्यालयों के विलय का किया कड़ा विरोध, मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग
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उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की गोपामऊ विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक श्याम प्रकाश (Shyam Prakash) ने परिषदीय विद्यालयों के विलय (मर्जर) की नीति का तीखा विरोध किया है। उन्होंने इस नीति को अनुचित बताते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल शिक्षा के क्षेत्र में हानिकारक है, बल्कि BJP को राजनीतिक रूप से भी नुकसान पहुंचा सकता है। विधायक ने सोशल मीडिया, विशेष रूप से अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से, इस मुद्दे पर अपनी बात रखी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है। श्याम प्रकाश (Shyam Prakash) ने चेतावनी दी कि स्कूलों के विलय से शिक्षक और शिक्षा मित्र सरकार के खिलाफ हो सकते हैं, जिसका असर पार्टी को बूथ स्तर पर भारी पड़ सकता है। 

गोपामऊ के BJP विधायक श्याम प्रकाश (Shyam Prakash) ने इस मुद्दे पर अपनी पार्टी की सरकार के खिलाफ खुलकर बोलते हुए कहा, “अधिकारियों द्वारा स्कूल बंद करने की सलाह और निर्णय अनुचित है। जितने स्कूल बंद होंगे, BJP को उतने ही बूथों पर भारी नुकसान होगा। शिक्षा मित्रों की तरह अध्यापक भी सरकार के विरोध में हो सकते हैं। माननीय मुख्यमंत्री योगी जी, कृपया संज्ञान लें।” यह बयान उन्होंने 4 जुलाई 2025 को अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस पोस्ट को शिक्षकों और अभिभावकों ने खूब सराहा, और कई लोगों ने इसे शिक्षा के हक में एक साहसिक कदम बताया।

श्याम प्रकाश (Shyam Prakash) का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपनी ही सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। वह पहले भी प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारी कार्यशैली पर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए चर्चा में रहे हैं। 2019 में, उन्होंने विधायकों के धरने पर तंज कसते हुए कहा था कि विधायकों को भी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए यूनियन बनानी चाहिए। उनकी यह बेबाकी उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाती है, लेकिन पार्टी के भीतर यह विवाद का कारण भी बन सकती है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बड़े स्कूलों में विलय करने की नीति लागू की है। इस नीति के तहत, जिन प्राथमिक विद्यालयों में 150 से कम और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 से कम छात्र हैं, उन्हें नजदीकी बड़े स्कूलों में मर्ज करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का तर्क है कि इस कदम से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा। हालांकि, इस नीति का ग्रामीण क्षेत्रों में तीव्र विरोध हो रहा है। शिक्षक, शिक्षा मित्र, अभिभावक और विभिन्न शैक्षिक संगठन इस निर्णय को शिक्षा के अधिकार के खिलाफ मान रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूलों का विलय होने से बच्चों को दूरदराज के स्कूलों में पढ़ने के लिए जाना पड़ेगा, जिससे उनकी शिक्षा पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

हरदोई जिले में यह विरोध विशेष रूप से मुखर रहा है। जिले के विभिन्न ब्लॉकों जैसे कोथावां, भरखनी और मल्लावां में अभिभावकों और शिक्षकों ने प्रदर्शन किए हैं। उदाहरण के लिए, कोथावां ब्लॉक के गौरी गांव में अभिभावकों ने स्कूल के गेट पर ताला लगाकर शिक्षकों को अंदर बंद कर दिया और विलय के खिलाफ नारेबाजी की। इसी तरह, भरखनी ब्लॉक के खदिया नगला गांव में भी अभिभावकों ने प्रदर्शन किया, क्योंकि उनका स्थानीय स्कूल पड़ोसी गांव गैहाई के स्कूल में मर्ज किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ स्कूलों तक बच्चों का जाना, विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए, मौसम की मार और सुरक्षा जोखिमों के कारण मुश्किल होगा।

परिषदीय विद्यालयों के विलय की नीति का असर न केवल बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है, बल्कि यह शिक्षकों और शिक्षा मित्रों के रोजगार को भी प्रभावित कर रहा है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस नीति के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया है। संघ ने 3-4 जुलाई को विधायकों और सांसदों को ज्ञापन सौंपने, 6 जुलाई को ट्वीट अभियान चलाने और 8 जुलाई को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालयों पर धरना देने की योजना बनाई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस नीति से हजारों रसोइयों की नौकरियां भी खतरे में पड़ जाएंगी, और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की स्कूल तक पहुंच मुश्किल हो जाएगी।

विलय नीति का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ रहा है। गौरी गांव के अभिभावकों ने बताया कि बिराहिमपुर स्कूल, जहां उनके बच्चों को भेजा जा रहा है, 2 किलोमीटर दूर है। छोटे बच्चों के लिए यह दूरी, खासकर बारिश और गर्मी के मौसम में, चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा, रास्ते में बंदरों का खतरा और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी उनकी चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि स्थानीय स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ेगा, और कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर सकते हैं।

हालांकि, कुछ लोग इसे विधायक की व्यक्तिगत राय मान रहे हैं, और पार्टी नेतृत्व ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह देखना बाकी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, यह मुद्दा हरदोई और पूरे उत्तर प्रदेश में शिक्षा के भविष्य और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के अधिकारों को लेकर एक गंभीर बहस का हिस्सा बन चुका है।

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