मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूं। तुम्हें अपनी पत्नी की तरह देखता हूं.... प्रिंसिपल ने 7वीं की छात्रा को लिखा लव लेटर, गिरफ्तार
जिसमें उसने छात्रा को अपनी पत्नी बनाने और उससे निकाह करने की इच्छा जताई थी। इसके अलावा, उसने छात्रा को धमकी दी कि अगर उसने यह बात किसी को बताई तो उसे परीक्षा में फेल कर दिया
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल पर सातवीं कक्षा की 11 वर्षीय छात्रा के साथ अश्लील हरकत करने और लव लेटर लिखकर शादी का दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगा है। यह घटना जवान ब्लॉक के तालिबनगर गांव के एक प्राथमिक स्कूल में हुई। आरोपी प्रिंसिपल, शकील अहमद, को पुलिस ने 29 अगस्त 2025 को गिरफ्तार कर लिया और उसे जेल भेज दिया गया। इसके साथ ही, बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) राकेश कुमार सिंह ने उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उसकी सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी। पीड़ित छात्रा का मेडिकल परीक्षण कराया गया है, और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा है, और उन्होंने इस घटना को शिक्षक-छात्र के पवित्र रिश्ते को शर्मसार करने वाला बताया है।
घटना की जानकारी तब सामने आई जब पीड़ित छात्रा ने अपनी मां को अपनी आपबीती बताई। मां ने बताया कि शकील अहमद लंबे समय से उनकी बेटी को परेशान कर रहा था। उसने एक लव लेटर लिखा, जिसमें उसने छात्रा को अपनी पत्नी बनाने और उससे निकाह करने की इच्छा जताई थी। इसके अलावा, उसने छात्रा को धमकी दी कि अगर उसने यह बात किसी को बताई तो उसे परीक्षा में फेल कर दिया जाएगा। डरी-सहमी छात्रा ने पहले चुप्पी साधी, लेकिन मां के बार-बार पूछने पर उसने हिम्मत जुटाकर पूरी बात बताई। मां ने तुरंत स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन से संपर्क किया। इसके बाद, 29 अगस्त 2025 को गोंधा थाने में शकील अहमद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसी दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
छात्रा की मां ने मीडिया को बताया कि शकील अहमद ने न केवल उनकी बेटी को परेशान किया, बल्कि उसका मानसिक उत्पीड़न भी किया। लव लेटर में उसने लिखा था, “मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूं। तुम्हें अपनी पत्नी की तरह देखता हूं। मैं तुमसे निकाह करना चाहता हूं।” इस तरह की बातें पढ़कर छात्रा डर गई थी और उसका स्कूल जाना मुश्किल हो गया था। मां ने कहा कि उनकी बेटी अब स्कूल जाने से डर रही है और इस घटना से उसका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी को सख्त से सख्त सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई शिक्षक ऐसी हरकत न करे।
पुलिस के अनुसार, यह घटना 29 अगस्त 2025 को सामने आई, और उसी रात मामला दर्ज कर लिया गया। सर्किल ऑफिसर (सीओ) राजीव द्विवेदी ने बताया कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की गई। शकील अहमद को 30 अगस्त 2025 को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपी ने छात्रा को बार-बार परेशान किया और अनुचित व्यवहार किया। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि क्या शकील अहमद ने अन्य छात्राओं के साथ भी ऐसा व्यवहार किया है। इसके लिए स्कूल के अन्य छात्रों और कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने कहा कि इस घटना ने शिक्षा विभाग की छवि को धक्का पहुंचाया है। उन्होंने बताया कि शकील अहमद को तुरंत निलंबित कर दिया गया है, और विभागीय जांच शुरू की गई है। जांच पूरी होने के बाद उसकी सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। राकेश कुमार ने यह भी कहा कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों से नियमित बात करें और स्कूल में किसी भी तरह के अनुचित व्यवहार की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।
इस घटना ने अलीगढ़ जिले में सनसनी फैला दी है। स्थानीय लोगों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और शकील अहमद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। एक स्थानीय निवासी, रमेश शर्मा, ने कहा, “शिक्षक को बच्चों का मार्गदर्शक होना चाहिए, लेकिन इस तरह की हरकतें शिक्षक-छात्र के रिश्ते को कलंकित करती हैं। ऐसे लोगों को स्कूलों में जगह नहीं मिलनी चाहिए।” कई अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और शिक्षकों की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की गहन जांच की जाए।
सड़क पर प्रदर्शन कर रहे कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि शकील अहमद ने छात्रा को धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला। हालांकि, पुलिस ने इस आरोप की अभी पुष्टि नहीं की है और कहा है कि जांच के बाद ही इस पर कोई बयान दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी इस घटना की तीखी आलोचना हो रही है। कई यूजर्स ने इसे शिक्षक-छात्र के रिश्ते पर दाग बताया और सरकार से स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाने की मांग की।
बाल अधिकार संगठनों ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। चाइल्डलाइन इंडिया की स्थानीय इकाई ने पीड़ित छात्रा और उसके परिवार को मनोवैज्ञानिक सहायता देने की पेशकश की है। संगठन के एक प्रतिनिधि ने कहा, “यह बेहद गंभीर मामला है। बच्चों को स्कूल में सुरक्षित महसूस करना चाहिए। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्कूलों में सुरक्षा नीतियां लागू की जाएं।”
यह घटना अलीगढ़ में बच्चों की सुरक्षा को लेकर पहले से चल रही बहस को और तेज कर रही है। हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में स्कूलों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त नियम और नियमित निगरानी जरूरी है। एक शिक्षा विशेषज्ञ, डॉ. अनिल मिश्रा, ने कहा, “शिक्षकों को बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी दी जाती है। ऐसे में, उनकी नैतिकता और व्यवहार की कड़ी जांच होनी चाहिए।”
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