Viral News: फिरोजाबाद में गर्भवती बेटी को चारपाई पर लेकर SSP ऑफिस पहुंचा पिता, दहेज उत्पीड़न के खिलाफ न्याय की गुहार।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में एक मार्मिक और चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब एक पिता अपनी सात महीने की गर्भवती बेटी को चारपाई...
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में एक मार्मिक और चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब एक पिता अपनी सात महीने की गर्भवती बेटी को चारपाई पर लिटाकर एक किलोमीटर की दूरी तय कर SSP ऑफिस पहुंचा। इस पिता, रामनाथ, ने अपनी बेटी शिवानी के ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और क्रूर मारपीट का आरोप लगाया। शिवानी के पेट और निजी अंगों पर लात मारने की बात सामने आई, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। इस घटना ने न केवल सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों पर सवाल उठाए, बल्कि दहेज प्रथा और महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया। फिरोजाबाद के टूंडला थाना क्षेत्र के गांव नगला रीछ में रहने वाले रामनाथ ने अपनी गर्भवती बेटी शिवानी (उम्र 26 वर्ष) को चारपाई पर लिटाकर SSP ऑफिस पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। शिवानी की शादी दो साल पहले अश्विनी (उम्र 30 वर्ष) से हुई थी। रामनाथ ने बताया कि शादी के समय उन्होंने अपनी हैसियत के अनुसार दहेज में नकदी, गहने, और अन्य सामान दिया था। इसके बावजूद, अश्विनी और उसके परिवार ने और नकदी की मांग शुरू कर दी।
रामनाथ के अनुसार, अश्विनी और उसके परिवार ने शिवानी को दहेज के लिए ताने देने शुरू किए और उसका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया। 25 मई 2025 को विवाद इतना बढ़ गया कि अश्विनी ने कथित तौर पर शिवानी के पेट और निजी अंगों पर लात मारी, जिसके बाद उसे घर से निकाल दिया गया। सात महीने की गर्भवती शिवानी की हालत गंभीर थी, और वह चलने में असमर्थ थी। रामनाथ और उनकी पत्नी ने उसे चारपाई पर लिटाकर एक किलोमीटर की दूरी पैदल तय की और SSP ऑफिस पहुंचे।
SSP ऑफिस के बाहर शिवानी की हालत देखकर लोग स्तब्ध रह गए। रामनाथ ने SSP आशीष तिवारी को बताया कि ससुराल वालों ने न केवल उनकी बेटी को मारा, बल्कि उसका सामान भी छीन लिया। उन्होंने पुलिस पर यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय थाने में उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, और शिवानी का मेडिकल परीक्षण तक नहीं कराया गया।
- पुलिस कार्रवाई और SSP का आश्वासन
SSP आशीष तिवारी ने रामनाथ की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने शिवानी को तुरंत मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा और टूंडला थाना प्रभारी को मामले की जांच के निर्देश दिए। पुलिस ने अश्विनी और उसके परिवार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (दहेज उत्पीड़न), 323 (मारपीट), और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया। इसके अलावा, दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं के तहत भी कार्रवाई शुरू की गई।
SSP तिवारी ने मीडिया को बताया, "यह एक गंभीर मामला है, और हम पीड़िता को तत्काल न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।" पुलिस ने अश्विनी की तलाश शुरू कर दी है, जो घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है। शिवानी का मेडिकल परीक्षण 28 मई को किया गया, जिसमें उसके शरीर पर चोट के निशान और गंभीर शारीरिक नुकसान की पुष्टि हुई।
यह घटना दहेज प्रथा और महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को उजागर करती है। सात महीने की गर्भवती महिला के साथ इस तरह की क्रूरता ने समाज में गुस्से और दुख की लहर पैदा की है। समाजशास्त्री डॉ. अनीता राठौर ने दैनिक जागरण से कहा, "दहेज प्रथा आज भी हमारे समाज की जड़ों में गहरी है। यह घटना दर्शाती है कि शिक्षा और जागरूकता के बावजूद, लालच और हिंसा रिश्तों को नष्ट कर रहे हैं।"
मनोवैज्ञानिक डॉ. रमेश ठाकुर ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा, "गर्भवती महिला के साथ हिंसा न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और भावनात्मक नुकसान पहुंचाती है। ऐसी घटनाओं से पीड़िता और उसके परिवार पर लंबे समय तक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है।" उन्होंने सुझाव दिया कि समाज में दहेज विरोधी जागरूकता अभियान और परामर्श सेवाओं को बढ़ावा देना जरूरी है।
फिरोजाबाद में हाल के वर्षों में दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के कई मामले सामने आए हैं। 2024 में, फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में एक महिला को दहेज के लिए जलाने की कोशिश का मामला चर्चा में रहा था। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि दहेज प्रथा और महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए सख्त कानूनी और सामाजिक उपायों की जरूरत है।
- सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने सोशल मीडिया, विशेष रूप से एक्स पर, व्यापक चर्चा को जन्म दिया। @news24tvchannel ने 30 मई को पोस्ट किया, "फिरोजाबाद में गर्भवती बेटी को चारपाई पर लेकर SSP ऑफिस पहुंचा शख्स। ससुराल वालों पर मारपीट का आरोप।" @DastanAfsharAli ने लिखा, "ससुराल वालों ने गर्भवती शिवानी के पेट पर लात मारी। पुलिस ने मेडिकल तक नहीं कराया। यह सिस्टम की बर्बरता है।" @ArchnaSingraul ने पोस्ट किया, "7 महीने की गर्भवती बेटी को 1 KM चारपाई पर लेकर मां-बाप SSP ऑफिस पहुंचे।" ये पोस्ट्स दर्शाते हैं कि जनता इस घटना से आक्रोशित है और तत्काल कार्रवाई की मांग कर रही है।
कई यूजर्स ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। @Rk_851 ने लिखा, "SSP ने कार्रवाई का भरोसा दिया, लेकिन कब मिलेगा न्याय?" कुछ यूजर्स ने इसे सामाजिक बुराई का प्रतीक बताया। @TNNavbharat ने पोस्ट किया, "चारपाई पर SSP ऑफिस क्यों पहुंची गर्भवती? यह समाज के लिए शर्मनाक है।" भारत में दहेज निषेध अधिनियम 1961 के तहत दहेज मांगना और देना दोनों गैरकानूनी हैं, फिर भी यह प्रथा समाज में गहरी जड़ें जमाए हुए है। भारतीय दंड संहिता की धारा 498A दहेज उत्पीड़न के मामलों में सजा का प्रावधान करती है, जिसमें सात साल तक की कैद और जुर्माना शामिल है। इसके बावजूद, दहेज से संबंधित अपराधों की संख्या में कमी नहीं आई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में दहेज उत्पीड़न के 12,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें से कई में हिंसा और हत्या तक की घटनाएं शामिल थीं।
फिरोजाबाद जैसे क्षेत्रों में, जहां सामाजिक और आर्थिक पिछड़ापन अभी भी मौजूद है, दहेज प्रथा को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है। यह घटना दर्शाती है कि कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और शिक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। इस घटना के बाद, फिरोजाबाद पुलिस ने दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू करने की घोषणा की। SSP आशीष तिवारी ने कहा, "हम ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल और जागरूकता शिविर आयोजित करेंगे, ताकि लोग दहेज और हिंसा के खिलाफ जागरूक हों।"
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