जनसेवा एक्सप्रेस में मोबाइल ब्लास्ट से लगी आग, नाबालिग यात्री झुलसा लेकिन बड़ा हादसा टला
ट्रेन नंबर 14618 जनसेवा एक्सप्रेस अमृतसर से रोजाना चलती है और बिहार के विभिन्न जिलों में हजारों यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती है। यह ट्रेन मुख्य रूप से बि
बिहार के सहरसा जिले में शुक्रवार शाम एक बड़ा रेल हादसा टल गया। अमृतसर से पूर्णिया कोर्ट जा रही जनसेवा एक्सप्रेस ट्रेन के एक जनरल कोच में अचानक आग लग गई। यह घटना सोनवर्षा कचहरी रेलवे स्टेशन के पास हुई, जहां ट्रेन सहरसा जंक्शन पहुंचने ही वाली थी। आग का कारण एक नाबालिग यात्री का मोबाइल फोन था, जो चार्जिंग के दौरान फट गया। इस हादसे में 15 साल का लड़का बुरी तरह झुलस गया, लेकिन अन्य यात्रियों को कोई चोट नहीं लगी। रेलवे प्रशासन और स्थानीय लोगों की तत्परता से आग पर जल्द काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ा अनर्थ होने से बच गया।
ट्रेन नंबर 14618 जनसेवा एक्सप्रेस अमृतसर से रोजाना चलती है और बिहार के विभिन्न जिलों में हजारों यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती है। यह ट्रेन मुख्य रूप से बिहार लौट रहे प्रवासी मजदूरों और परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है। शुक्रवार को यह ट्रेन समय पर चल रही थी। शाम करीब छह बजे, जब ट्रेन सोनवर्षा कचहरी स्टेशन के पास पहुंची, तो जनरल कोच संख्या 247271एनआर में अचानक धुआं उठने लगा। एक यात्री राम कुमार ने बताया कि कोच में एक लड़का अपना मोबाइल फोन चार्ज कर रहा था। अचानक फोन से तेज आवाज आई और आग की लपटें निकलने लगीं। यह फोन चार्जिंग पॉइंट से जुड़ा हुआ था, जिसके कारण स्पार्किंग हुई और आग तेजी से फैल गई।
आग लगते ही कोच में सवार सैकड़ों यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। लोग चीखने-चिल्लाने लगे और एक-दूसरे को धक्का देकर बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। कई महिलाएं और बच्चे डर के मारे रोने लगे। ट्रेन के गार्ड ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया। स्टेशन मास्टर संजय कुमार ने स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। रेलवे के कर्मचारी फायर एक्सटिंग्विशर लेकर दौड़े और आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। स्थानीय ग्रामीण भी मदद के लिए पहुंचे। आग इतनी तेज थी कि कोच का एक हिस्सा पूरी तरह जल गया, लेकिन कर्मचारियों की मेहनत से यह अन्य बोगियों तक नहीं पहुंची। लगभग आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।
इस हादसे का सबसे दुखद पहलू एक नाबालिग यात्री का झुलसना था। लड़के का नाम सत्यम कुमार है, जो सुपौल जिले के दुमरी गांव का रहने वाला है। वह अपने रिश्तेदारों के साथ अम्बाला से छठ पूजा मनाने बिहार लौट रहा था। सत्यम मोबाइल चार्ज कर रहा था जब फोन फट गया। आग की लपटों से बचने की कोशिश में वह बुरी तरह झुलस गया। उसके चेहरे और हाथों पर गंभीर जलन की चोटें आईं। रेलवे कर्मचारियों ने उसे तुरंत प्राथमिक उपचार दिया और सहरसा जंक्शन पहुंचने पर मेडिकल टीम को सौंप दिया। डॉक्टरों ने बताया कि सत्यम की हालत स्थिर है, लेकिन उसे सहरसा सदर अस्पताल में भर्ती रखा गया है। उसके परिवार वाले भी ट्रेन से ही थे, जो इस घटना से सदमे में हैं। सत्यम के पिता शत्रुधन पासवान मजदूरी करते हैं और परिवार गरीब है।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन में सवार सभी अन्य यात्री सुरक्षित हैं। कुल लगभग 800 यात्री थे, जिन्हें तुरंत दूसरे कोच में शिफ्ट कर दिया गया। सिविल पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल की निगरानी की। फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया ताकि आग के सटीक कारण की जांच हो सके। प्रारंभिक जांच में मोबाइल फोन का ब्लास्ट ही मुख्य कारण पाया गया है। रेलवे के डिविजनल रेल मैनेजर ने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे असुरक्षित डिवाइस चार्ज न करें। ट्रेन को करीब एक घंटे की देरी के बाद रवाना किया गया और यह सुरक्षित सहरसा जंक्शन पहुंच गई। वहां से यात्रियों को आगे की मंजिलों के लिए अन्य ट्रेनों में समायोजित किया गया।
यह घटना रेल यात्रा की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। बिहार में रेल नेटवर्क बहुत व्यस्त है और जनसेवा जैसी ट्रेनें प्रवासियों के लिए जीवनरेखा हैं। पिछले कुछ वर्षों में ट्रेनों में आग लगने की कई घटनाएं हुई हैं, जिनमें अधिकांश का कारण शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट रहा है। लेकिन इस बार मोबाइल फोन का ब्लास्ट एक नया पहलू है। विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ते या पुराने फोन चार्जिंग के दौरान गर्म हो जाते हैं और बैटरी फट सकती है। रेल मंत्रालय ने पहले ही दिशानिर्देश जारी किए हैं कि यात्रियों को चार्जिंग सावधानी से करें। स्टेशनों पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं बताती हैं कि और प्रयासों की जरूरत है।
सोनवर्षा कचहरी स्टेशन एक छोटा सा स्टेशन है, जो समस्तीपुर रेल डिवीजन के अंतर्गत आता है। यहां रोजाना सैकड़ों ट्रेनें गुजरती हैं, लेकिन फायर फाइटिंग सुविधाएं सीमित हैं। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने स्टेशन पर फायर टेंडर की उपलब्धता बढ़ाने का वादा किया है। सहरसा के सांसद और स्थानीय विधायक ने भी मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने रेल मंत्री से बात कर जांच की मांग की है। यात्रियों ने रेलवे की तारीफ की कि कर्मचारियों ने जान जोखिम में डालकर मदद की। एक यात्री ने कहा, हम डर गए थे, लेकिन स्टाफ ने सबको शांत किया और सुरक्षित बाहर निकाला।
इस हादसे से सबक लेते हुए रेलवे ने तुरंत अन्य ट्रेनों की जांच शुरू कर दी। जनरल कोचों में चार्जिंग पॉइंट्स की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि दोषपूर्ण बोगी को अलग कर मरम्मत के लिए भेजा जाएगा। बिहार में छठ पूजा का मौसम है, इसलिए ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में सुरक्षा उपाय और मजबूत करने की जरूरत है। रेलवे ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जहां यात्री अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। यह घटना न केवल यात्रियों के लिए चेतावनी है, बल्कि मोबाइल उपयोग की सावधानी भी सिखाती है।
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