IGI एयरपोर्ट पर बैंकॉक से लौटे यात्री के इलेक्ट्रिक कैटल से 3 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त, कस्टम्स ने किया गिरफ्तार
सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से फैल रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया और ईटी नाउ जैसे चैनलों के फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए वीडियो में दिखाया गया
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम्स अधिकारियों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। बैंकॉक से दिल्ली पहुंचे एक भारतीय यात्री के चेक-इन बैग से लगभग 3 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया गया है। यह घटना 20 अक्टूबर 2025 को हुई, जब यात्री ग्रीन चैनल से गुजरने की कोशिश कर रहा था। अधिकारियों की सतर्कता से नशीली दवा को रोक लिया गया और यात्री को गिरफ्तार कर लिया गया। इस जब्ती की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जहां वीडियो क्लिप्स में अधिकारियों द्वारा बैग की तलाशी और पैकेट्स निकालने की प्रक्रिया दिखाई जा रही है।
हाइड्रोपोनिक गांजा एक उच्च गुणवत्ता वाली नशीली दवा है, जो पानी आधारित कृषि पद्धति से उगाई जाती है। यह सामान्य गांजे से कहीं अधिक शक्तिशाली होती है और इसके बाजार मूल्य कीमतों को आसमान छू लेती है। इस मामले में बरामद 3 किलोग्राम गांजे का अनुमानित मूल्य करीब 3 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। कस्टम्स के एयर इंटेलिजेंस यूनिट ने यात्री को संदिग्ध मानते हुए रोका और बैग की गहन जांच की। बैग के अंदर छह पारदर्शी पॉलीथीन पैकेट्स मिले, जिनमें हरी रंग की पदार्थ भरी हुई थी। लैब टेस्ट में यह हाइड्रोपोनिक गांजा साबित हुई। यात्री को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है और आगे की जांच चल रही है।
यह घटना दिल्ली एयरपोर्ट पर नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। कस्टम्स अधिकारी बताते हैं कि बैंकॉक जैसे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से ऐसी तस्करी बढ़ रही है। वहां हाइड्रोपोनिक खेती आसान है और सस्ते में उत्पादन होता है। तस्कर इसे भारत लाकर बड़े बाजार में बेचते हैं, खासकर युवाओं के बीच इसकी मांग अधिक है। इस साल अप्रैल में ही IGI एयरपोर्ट पर तीन अलग-अलग मामलों में कुल 61 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त किया गया था, जिसका मूल्य करोड़ों में था। उनमें से एक मामले में दो थाई महिलाएं बैंकॉक से आई थीं, जिनके ट्रॉली बैग में 36.9 किलोग्राम गांजा पैकेट्स में छिपा था।
वर्तमान मामले में यात्री की पहचान गोपनीय रखी गई है, लेकिन स्रोतों के अनुसार वह दिल्ली का रहने वाला है और बैंकॉक से व्यावसायिक यात्रा पर गया था। अधिकारियों को शक हुआ जब यात्री ने ग्रीन चैनल चुना, जहां तलाशी कम होती है। रेड चैनल चुनने वाले यात्रियों की जांच सख्त होती है। कस्टम्स के एक अधिकारी ने बताया कि वे इंटेलिजेंस इनपुट पर काम कर रहे थे, जिसमें बैंकॉक फ्लाइट्स पर नजर रखने को कहा गया था। बैग खोलने पर पैकेट्स के अलावा कुछ कपड़े और अन्य सामान भी मिला, लेकिन मुख्य रूप से गांजा ही छिपाया गया था। यह तरीका तस्करों का आम हथकंडा है, जहां वे नशीले पदार्थ को रोजमर्रा के सामान में मिला देते हैं ताकि स्कैनर से बच सकें।
सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से फैल रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया और ईटी नाउ जैसे चैनलों के फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे अधिकारी यात्री को रोकते हैं, बैग खोलते हैं और पैकेट्स बाहर निकालते हैं। एक वीडियो में अधिकारियों को बैग से हरे रंग के पैकेट्स निकालते हुए देखा जा सकता है, जबकि यात्री चुपचाप खड़ा है। ये वीडियो हजारों व्यूज पा चुके हैं और लोग कमेंट्स में कस्टम्स की तारीफ कर रहे हैं। कुछ यूजर्स ने लिखा कि ऐसी कार्रवाई से युवा पीढ़ी को नशीले पदार्थों से बचाया जा सकता है। हालांकि, कुछ ने सवाल उठाया कि तस्करी के स्रोत तक कैसे पहुंचें।
दिल्ली एयरपोर्ट भारत का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है, जहां रोजाना सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स आती-जाती हैं। यहां नशीले पदार्थों की तस्करी एक बड़ी चुनौती है। केंद्रीय जांच ब्यूरो और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के साथ मिलकर कस्टम्स लगातार निगरानी बढ़ा रहा है। स्कैनर, डॉग स्क्वायड और इंटेलिजेंस की मदद से कई मामलों को रोका जाता है। इस साल अब तक IGI पर कई बड़ी जब्तियां हो चुकी हैं। उदाहरण के लिए, अगस्त में एक यात्री से 25 करोड़ का मरिजुआना बरामद हुआ था। इन कार्रवाइयों से तस्करों का नेटवर्क कमजोर हो रहा है, लेकिन पूरी तरह खत्म होने में समय लगेगा।
हाइड्रोपोनिक गांजा के खतरे के बारे में विशेषज्ञ बताते हैं कि यह दिमाग पर तेज असर डालती है और लत लगने पर जानलेवा साबित हो सकती है। युवाओं में इसकी लोकप्रियता सोशल मीडिया और पार्टी कल्चर के कारण बढ़ रही है। सरकार ने NDPS एक्ट के तहत सख्त सजा का प्रावधान किया है, जिसमें 10 साल से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है। इस मामले में यात्री को अदालत में पेश किया जाएगा और उसके संपर्कों की जांच होगी। कस्टम्स ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे संदिग्ध सामान न लाएं और हमेशा रेड चैनल चुनें।
यह घटना न केवल कस्टम्स की दक्षता दिखाती है, बल्कि तस्करी के नए तरीकों पर भी रोशनी डालती है। बैंकॉक से दिल्ली की फ्लाइट्स पर अब और सतर्कता बरती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से थाईलैंड के साथ जानकारी साझा की जा रही है ताकि स्रोत पर ही रोका जाए। यात्रियों के लिए यह चेतावनी है कि नशीले पदार्थों की तस्करी में कोई छूट नहीं मिलेगी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने लोगों में जागरूकता फैलाई है और कई ने शेयर करके दूसरों को आगाह किया है। कुल मिलाकर, यह एक छोटी सी कार्रवाई बड़े अपराध को रोकने का उदाहरण है। आगे की जांच से और खुलासे हो सकते हैं।
IGI एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। नए स्कैनर और एआई आधारित सिस्टम लगाए गए हैं, जो संदिग्ध बैग को तुरंत पकड़ लेते हैं। कस्टम्स के अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वे तस्करों के हाव-भाव पहचान सकें। इस मामले में यात्री घबराया हुआ लग रहा था, जिसने अधिकारियों का ध्यान खींचा। बैग में पैकेट्स को अच्छी तरह सील किया गया था, लेकिन एक्स-रे में कुछ असामान्य दिखा। डॉग्स ने भी मदद की। जब्त गांजा को लैब भेजा गया है और उसके सैंपल टेस्ट हो रहे हैं।
भारत में नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार कहा है कि नशा मुक्त भारत बनाना जरूरी है। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। लेकिन एयरपोर्ट जैसे प्रवेश द्वार पर सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण है। इस जब्ती से साबित होता है कि छोटी सी चूक भी बड़ा नुकसान रोक सकती है। यात्री का परिवार भी सदमे में है और जांच में सहयोग कर रहा है। कस्टम्स ने कहा कि अगर कोई बड़ा नेटवर्क जुड़ा मिला तो और गिरफ्तारियां होंगी।
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