पीलीभीत: प्रभु राम ने तोड़ा धनुष , वैदेही का हुआ विवाह राम के संग, विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत मचाया धमाल।
माँ गोमती शरद कालीन महोत्सव में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर मचाई धूम तो वही शाम को ब्रज लोक कला फाउंडेशन ग्रुप मथुरा के अंतरराष्ट्रीय कलाकारों
रिपोर्ट- कुँवर निर्भय सिंह
माँ गोमती शरद कालीन महोत्सव में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर मचाई धूम तो वही शाम को ब्रज लोक कला फाउंडेशन ग्रुप मथुरा के अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के द्वारा श्री प्रभु राम लीला मंचन किया गया जिसमें श्री राम ने भगवान शंकर का धनुष तोड़ा और सीता माता का राम के साथ विवाह संपन्न हुआ। महोत्सव में लगी दुकानों पर जमकर लोगों ने खरीदारी की।
माधोटांडा स्थित मोक्ष दायिनी पतित पावनी आदि गंगा मां गोमती नदी के पावन उद्गम तीर्थ स्थल पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पांच दिवसीय नीर निकुँज थीम पर आधारित मां गोमती शरद कालीन महोत्सव आयोजित किया जा रहा है । इस आयोजन का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूरनपुर बाबूराम पासवान, भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह,विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने किया था।
महोत्सव के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया गया मेले में खेल खिलौने ,झूला, सहित कई दुकानें लगी जिसमें लोग जमकर खरीदारी की। दिन में स्कूल बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।शाम को बृजलोक कला फाउंडेशन ग्रुप के कलाकारों द्वारा श्री रामलीला मंचन का आयोजन किया। लीला में सीता स्वयंवर का मार्मिक मंचन किया गया मंचन को देखने वाले श्रद्धालुओं से गोमती मंच के सामने बना पंडाल खचाखच भरा रहा ।
मिथिला नरेश राजा जनक के यहां सीता माता के स्वयंवर का मार्मिक मंचन किया गया सीता स्वयंवर में राजा जनक ने भगवान शंकर के जीर्ण शीर्ण धनुष तोड़ने वाले के साथ अपनी पुत्री वैदेही के विवाह की शर्त रखी सीता स्वयंवर में संपूर्ण संसार के राजा महाराजा महारथी पहुंचे ऋषि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण भी स्वयंवर में पहुंचे, लंका नरेश रावण और पाताल नरेश बाणासुर जैसे महावीर पराक्रमी राजाओं ने भी भाग लिया स्वयंवर में पहुंचे रावण और बाणासुर का मार्मिक संवाद का मंचन बड़ा ही मनमोहक किया गया जिसमें बाणासुर ने अपने बल और रावण के बल की बात कही स्वयंवर में पहुंचने पर रावण ने भगवान शंकर द्वारा बताई गई श्रीराम की महिमा का गुणगान किया और स्वयं श्री राम की हस्तरेखा देखकर राम के द्वारा अपने वंश के समूल नाश और राजा दशरथ की पुत्र वियोग में मृत्यु एवं सीता माता से श्री राम का बिछड़ना भी बताया स्वयंवर में पहुंचे महावीर पराक्रमी राजा जब धनुष को उठाने की बात तो दूर उसे इंच मात्र भी हिला ना सके तो मिथिला नरेश जनक ने स्वयंवर में जब यह कहा कि लगता है कि मेरी प्रतिज्ञा को शायद कोई भी पूरा नहीं कर पाएगा।
यह धरती वीरों से खाली हो गई है उनके वचनों को सुनकर लक्ष्मण से रहा नहीं गया और उन्होंने मिथिला नरेश जनक से कहा कि आप ने शायद यहां पर उपस्थित उनके बड़े भ्राता राम की महिमा को नहीं जाना है मैं तो उनका अनुज भ्राता हूं यह धनुष क्या मैं तो संपूर्ण ब्राह्मण को उथल पुथल कर सकता हूं लक्ष्मण के क्रोध को देखकर ऋषि विश्वामित्र ने राम को धनुष तोड़ने की आज्ञा दी भगवान श्री प्रभु राम जी भगवान शिव शंकर के जीर्ण शीर्ण धनुष को प्रणाम कर उसकी स्तुति की और उसे एक ही हाथ से उठाकर हवा में उछालते हुए झटके से तोड़ दिया।
श्री प्रभु राम के द्वारा धनुष तोड़ते ही माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी और प्रभु राम ने भी माता जानकी के गले में जयमाला डाल दी माता जानकी और प्रभु राम के विवाह के साथ ही गोमती उद्गम तट शंख और घड़ियाल का शंखनाद होने लगा हजारों की भीड़ में बैठे श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राम की जय और माता जानकी की जय के जय कारे लगाने शुरू कर दिए संपूर्ण गोमती उद्गम तीर्थ स्थल श्री प्रभु राम की जय जनक नंदिनी जानकी की जय गोमती मैया की जय से गुंजायमान होने लगा सीता माता और भगवान राम के विवाह के संपन्न होने पर सैकड़ो महिला और पुरुषों में कन्यादान किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष एसडीएम कलीनगर महिपाल सिंह, नायब तहसीलदार अक्षय कुमार यादव लेखपाल देवेश कुमार यादव, गजेंद्र यादव, वृंदावन, योगेश्वर सिंह निर्भय सिंह, महेश पंडित आदि लोग मौजूद रहे।
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