सीतापुर में प्रेम ने तोड़ी धर्म की दीवार- रिजवाना ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाया, पूजा बनकर रचाई शादी।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के तंबौर थाना क्षेत्र में एक अनोखी प्रेम कहानी सामने आई है, जहां एक मुस्लिम युवती ने अपने प्रेमी के साथ
- तंबौर इलाके में मंदिर में लिए सात फेरे, परिवार और संगठनों का मिला समर्थन
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के तंबौर थाना क्षेत्र में एक अनोखी प्रेम कहानी सामने आई है, जहां एक मुस्लिम युवती ने अपने प्रेमी के साथ जीवन बिताने के लिए अपना धर्म बदल लिया। रिजवाना नाम की युवती ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाया और अपना नाम पूजा रख लिया। इसके बाद उसने महाराजगंज जिले के ककरहा गांव निवासी आशुतोष यादव के साथ हिंदू रीति-रिवाज से मंदिर में विवाह किया। यह शादी तंबौर क्षेत्र के एक मंदिर में संपन्न हुई, जहां पंडित जी ने वैदिक मंत्रों के साथ सात फेरे करवाए। दोनों के बीच दो साल से प्रेम संबंध चल रहा था, और परिवार की सहमति के साथ यह कदम उठाया गया। युवती ने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन किया और वीडियो में स्पष्ट कहा कि यह उसका व्यक्तिगत फैसला है। इलाके में इस घटना की काफी चर्चा हो रही है, जहां लोग युवती की हिम्मत और प्रेम की ताकत की सराहना कर रहे हैं। राष्ट्रीय बजरंग दल ने इसे 'घर वापसी' का मामला बताया और शादी में सहयोग किया। मार्च 2026 की शुरुआत में हुई यह शादी स्थानीय स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त कर रही है, और दोनों परिवारों ने इसे स्वीकार कर लिया है। कुल मिलाकर, यह कहानी प्रेम की जीत और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रतीक बन गई है।
रिजवाना, जो तंबौर क्षेत्र की रहने वाली थी, और आशुतोष यादव महाराजगंज के ककरहा गांव से हैं। दोनों के बीच दो साल पहले प्रेम शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे गहरा होता गया। प्रेम के कारण युवती ने सनातन धर्म अपनाने का फैसला लिया, क्योंकि आशुतोष और उसके परिवार हिंदू रीति-रिवाज से विवाह चाहते थे। धर्म परिवर्तन के बाद नाम पूजा रखा गया और मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ विवाह संपन्न हुआ। शादी में दूल्हे के परिजनों ने पूर्ण आशीर्वाद दिया, और बजरंग दल के सदस्यों ने भी उपस्थित रहकर सहयोग किया। युवती ने शादी के बाद जारी वीडियो में कहा कि उसने अपनी इच्छा से यह कदम उठाया है और अब खुशी से जीवन व्यतीत कर रही है। यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी, जहां लोग इसे प्रेम की मिसाल मान रहे हैं। पुलिस या प्रशासन स्तर पर कोई विवाद नहीं हुआ, क्योंकि दोनों पक्षों की सहमति थी। अपडेट्स के अनुसार, शादी के बाद दोनों दंपति सामान्य जीवन जी रहे हैं और परिवार की ओर से कोई विरोध नहीं है।
शादी हिंदू परंपरा के अनुसार संपन्न हुई, जहां अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए गए। मंदिर में पंडित जी ने मंत्रोच्चार किए और दोनों ने सिंदूर और मंगलसूत्र से विवाह पूरा किया। बजरंग दल ने इसे 'घर वापसी' का मामला करार दिया और युवती को सनातन धर्म में वापस लाने में मदद की। युवती के परिवार ने भी इस फैसले को स्वीकार किया और आशीर्वाद दिया। दो साल के प्रेम प्रसंग में दोनों ने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन प्रेम की जीत हुई। इलाके के लोग इस घटना को सकारात्मक मान रहे हैं और युवती की बहादुरी की प्रशंसा कर रहे हैं। मार्च 2026 तक कोई कानूनी अड़चन नहीं आई है, क्योंकि धर्म परिवर्तन स्वैच्छिक था। यह मामला उन कई कहानियों से अलग है जहां विवाद होता है, क्योंकि यहां सहमति और परिवार का समर्थन था। यह घटना प्रेम और व्यक्तिगत निर्णय की ताकत को दर्शाती है, जहां युवती ने समाज की दीवारें तोड़ीं। दोनों अब खुशी से जीवन बिता रहे हैं और इलाके में इसे प्रेम की मिसाल माना जा रहा है। अपडेट्स में शादी के बाद कोई नई समस्या नहीं आई है, और दंपति सामान्य जीवन जी रहे हैं। यह कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो प्रेम के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सीतापुर जिले में ऐसे मामले पहले भी सामने आए हैं, लेकिन इस बार सहमति और खुशी से संपन्न होने के कारण सकारात्मक चर्चा है। युवती ने वीडियो में अपनी खुशी व्यक्त की और कहा कि प्रेम मजहब नहीं देखता। बजरंग दल ने इसे घर वापसी बताया, लेकिन मुख्य रूप से यह व्यक्तिगत फैसला था। परिवारों का समर्थन इस कहानी को और मजबूत बनाता है। मार्च 2026 तक दंपति सुरक्षित हैं और जीवन में आगे बढ़ रहे हैं।
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