Lucknow News : UP में RTE अधिनियम का आधा-अधूरा पालन, प्रदेश में 5वें नंबर पर हरदोई चमका, मुरादाबाद-कानपुर में 67% तक सीटें खाली
UP के 26 जिलों में RTE के तहत आवंटित सीटों में से 30% से अधिक सीटें खाली पड़ी हैं। इस शैक्षिक सत्र में 3,34,953 गरीब परिवारों के बच्चों ने RTE के तहत निजी स्कूलों में ....
By INA News Lucknow.
लखनऊ: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009, जो 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है, UP में पूरी तरह से अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में विफल रहा है। इस अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित हैं, लेकिन प्रदेश के कई जिलों में स्कूल इन सीटों पर प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 शैक्षिक सत्र के लिए 6 लाख आरक्षित सीटों में से केवल 1.30 लाख गरीब बच्चों को ही प्रवेश मिल सका है, यानी मात्र 22% सीटें भरी गई हैं। इस स्थिति ने शिक्षा विभाग को कम प्रवेश वाले जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) से स्पष्टीकरण मांगने के लिए मजबूर किया है।
प्रदेश में RTE सीटों की स्थिति: 26 जिलों में 30% से ज्यादा सीटें खाली
UP के 26 जिलों में RTE के तहत आवंटित सीटों में से 30% से अधिक सीटें खाली पड़ी हैं। इस शैक्षिक सत्र में 3,34,953 गरीब परिवारों के बच्चों ने RTE के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन किया था, लेकिन कई जिलों में स्कूलों की उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह लक्ष्य अधूरा रह गया। मुरादाबाद में सबसे खराब स्थिति है, जहां 67% सीटें खाली हैं। इसके बाद कानपुर में 52%, मेरठ में 47%, और गाजियाबाद में 48% सीटें रिक्त पड़ी हैं। अन्य जिलों में भी स्थिति चिंताजनक है, जैसे कन्नौज (41%), गोरखपुर (38%), नोएडा (37%), कानपुर देहात और वाराणसी (35%), तथा अयोध्या और बलिया (34%)।
कुछ जिले बने अपवाद, कुछ का अच्छा प्रतिशत, हरदोई और श्रावस्ती का शानदार प्रदर्शन
हालांकि, कुछ जिलों ने RTE के तहत बेहतर प्रदर्शन किया है। हरदोई और श्रावस्ती में 91% बच्चों को प्रवेश मिला, जो एक सकारात्मक उदाहरण है। इसके अलावा, गोंडा में 94%, फिरोजाबाद में 93%, और प्रतापगढ़ व ललितपुर में 92% सीटें भरने में सफलता मिली। इन जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों की सक्रियता और स्कूलों के सहयोग ने गरीब बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हरदोई की इस उपलब्धि को विशेष रूप से सराहा जा रहा है, जहां स्थानीय प्रशासन ने स्कूलों के साथ मिलकर आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाया।
RTE के तहत कम प्रवेश के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। कई निजी स्कूल 25% आरक्षित सीटों पर प्रवेश देने से बच रहे हैं, क्योंकि सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि उनके नियमित शुल्क की तुलना में कम है। इसके अलावा, कुछ स्कूलों पर RTE कोटा के बच्चों के साथ भेदभाव करने के आरोप भी लगे हैं। लखनऊ के सरोजिनी नगर क्षेत्र में विश्ननाथ अकादमी जैसे स्कूलों पर RTE के तहत प्रवेश देने से इनकार करने के मामले सामने आए हैं, जहां एक अभिभावक, सुमन देवी, ने अपनी बेटी के प्रवेश के लिए बार-बार प्रयास करने के बावजूद असफलता का सामना किया।
प्रशासनिक स्तर पर भी कई खामियां हैं। कुछ जिलों में आवेदन प्रक्रिया की जटिलता और जागरूकता की कमी के कारण अभिभावक समय पर आवेदन नहीं कर पाते। साथ ही, स्कूलों की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने में कमी देखी गई है। UP शिक्षा निदेशक विजय किरण आनंद ने कहा कि विभाग ऐसी शिकायतों पर सख्ती से कार्रवाई कर रहा है, और जिला स्तर पर गठित समितियां स्कूलों के गैर-अनुपालन की जांच कर रही हैं।
RTE अधिनियम 2009 भारत के 135 देशों में से एक है, जिसने शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया है। यह अधिनियम न केवल मुफ्त शिक्षा की गारंटी देता है, बल्कि निजी स्कूलों में 25% सीटें EWS और वंचित समूहों के लिए आरक्षित करके सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देता है। हालांकि, UP जैसे बड़े राज्य में इसकी प्रभावी लागू करने में कई बाधाएं हैं। 2013-14 के आंकड़ों के अनुसार, 46 जिलों में एक भी EWS बच्चे को कक्षा 1 में निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं मिला था, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने, स्कूलों के लिए प्रतिपूर्ति प्रणाली को सुधारने, और अभिभावकों के बीच जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, स्कूलों पर सख्त निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई की जरूरत है ताकि वे RTE के प्रावधानों का पालन करें।
UP सरकार ने 2025-26 के लिए RTE प्रवेश प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है, जिसमें पहला चरण 1 दिसंबर 2024 से 19 दिसंबर 2024 तक था। सरकार ने स्कूलों को 31 मार्च 2025 तक RTE के तहत 25% सीटें घोषित करने का निर्देश दिया है। कम प्रवेश वाले जिलों के BSA से स्पष्टीकरण मांगने के साथ-साथ, सरकार को उन जिलों के मॉडल को अपनाने की सलाह दी जा रही है, जहां गोंडा और हरदोई जैसे जिले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
What's Your Reaction?











