Lucknow News: क्रॉप वेदर वाॅच ग्रुप की वर्ष 2025-26 की तृतीय बैठक संपन्न, प्रदेश के कृषकों को आगामी सप्ताह हेतु मौसम आधारित कृषि परामर्श जारी
भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार इस सप्ताह में 04 से 06 मई के दौरान प्रदेश के अधिकांश कृषि जलवायु अंचलों में मेघगर्जन, वज्रपात एवं तेज झोकेंदार ह...
By INA News Lucknow.
लखनऊ: क्रॉप वेदर वाॅच ग्रुप की वर्ष 2025-26 की तृतीय बैठक डा. संजय सिंह, महानिदेशक, उ.प्र. कृषि अनुसंधान परिषद की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को परिषद के समाकक्ष में सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश में मौसम के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में किसानों को अगले दो सप्ताह हेतु कृषि प्रबन्धन के लिए निम्नलिखित सुझाव दिये गये।
- आगामी सप्ताह का मौसम पूर्वानुमान (02-08 मई, 2025)
भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार इस सप्ताह में 04 से 06 मई के दौरान प्रदेश के अधिकांश कृषि जलवायु अंचलों में मेघगर्जन, वज्रपात एवं तेज झोकेंदार हवाओं के साथ हल्की से मध्यम वर्षा जबकि इस सप्ताह के आरंभिक एवं अंतिम चरण में प्रदेश के उत्तरी भाग में कहीं-कहीं हल्की वर्षा होने की संभावना है जिसके परिणामस्वरूप औसत साप्ताहिक अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है। इसी क्रम में 01 मई को प्रदेश के उत्तरी पूर्वी मैदानी क्षेत्र में कहीं-कहीं ओलावृष्टि की भी संभावना है।
- आगामी द्वितीय सप्ताह के मौसम का दृष्टिकोण (09-15 मई, 2025)
इस सप्ताह के आरंभिक चरण में प्रदेश के उत्तरी पूर्वी मैदानी क्षेत्र को छोड़कर अन्य कृषि जलवायु अंचलों में कहीं-कहीं हल्की वर्षा होने की संभावना है। जिसके परिणामस्वरूप औसत साप्ताहिक अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है।
वर्तमान सप्ताह में मेघगर्जन, वज्रपात, तेज झोकेंदार हवाओं एवं कभी-कभी ओलावृष्टि संभावना रहती है अतः मौसम विभाग द्वारा दैनिक स्तर पर जारी / अपडेट चेतावनियों का अनुसरण करें। इस सम्बन्ध में आगामी 3-4 घंटो के दौरान की मौसम चेतावनियाँ सचेत ऐप पर जारी की जाती हैं जिसे यूआरएल https://sachet.ndma.gov.in पर साथ ही सचेत ऐप डाऊनलोड कर देखा जा सकता है।
गेहूं की कटाई यथाशीघ्र सम्पन्न करें तथा सुरक्षित भण्डारण सुनिश्चित करें। जायद की फसलों की कटाई शीघ्र ही सुनिश्चित करें अन्यथा आगामी सप्ताह में मौसम प्रतिकूल होने के कारण फसलों को नुकसान होने की संभावना है।
जो खेत खाली हैं उन खेतों की मिट्टी पलट हल से गहरी जुताई करें जिससे मृदा में दबे/छिपे खरपतवार के बीज व कीट गर्मी से नष्ट हो जाय।
फसल अवशेष का जीवांश कार्बन और पोषक तत्वों को मृदा में पुर्नचक्रण द्वारा मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिये जैविक फॉरमुलेशन हेलो केयर का प्रयोग करें हेलो केयर केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, लखनऊ पर उपलब्ध है जहां से किसान भाई इसे प्राप्त कर सकते हैं।
देर से बोये जाने वाले गन्ने की बुवाई यथाशीघ्घ्र सम्पन्न कर लें व लाइन से लाइन की दूरी 60 से.मी. सुनिश्चित करें।
धान की रोपाई किये जाने वाले प्रक्षेत्रों में हरी खाद हेतु 80-90 किग्रा. सनई अथवा 60 किग्रा. तैचा प्रति हे. की दर से बुवाई सुनिश्चित करें।
धान की बुवाई हेतु शोधित बीज की ही व्यवस्था करें तथा मई माह में पौध बुवाई हेतु अधिक अवधि में पकने वाली प्रजातियों के बीज को वरीयता दें।
आम के भुनगा कीट की रोकथाम हेतु इमिडाक्लोप्रिड 30.5 प्रतिशत एस.सी. (3.0 मिली०/10 लीटर) एवं प्रोफेनोफास 50 प्रतिशत ई.सी. (1 मिली०/लीटर) पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
आम में फल मक्खी व अन्य कीटों से बचाव हेतु एवं फलों की गुणवत्ता को बढ़ाने हेतु बैगिंग का प्रयोग करें।
मृदा जनित रोगों यथा तना सड़न, जड़ सड़न, झुलसा, भूरा धब्बा, बकानी, जीवाणु झुलसा, उकठा आदि से बचाय हेतु ट्राइकोडर्मा विरिडी 1 प्रतिशत डब्ल्यू.पी. अथवा ट्राइकोडर्मा हरजियेनम 2 प्रतिशत डब्ल्यू.पी. की 2.5 किग्रा. प्रति हे. 65-75 किग्रा. सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर हल्के पानी का छीटा देकर 8-10 दिन तक छाया में रखने के उपरान्त बुवाई के पूर्व आखिरी जुताई पर भूमि में मिला देने से शीथ ब्लाईट, मिथ्या कण्डुआ आदि रोगों से बचाव किया जा सकता है।
हरे चारे जैसे ज्वार, बाजरा व चरी पर्याप्त नमी वाले खेतों की ही खिलायें। हरे चारे हेतु चारे की कटाई जड़ से 6 इंच ऊपर ही करें।
कृषकों / पशुपालकों के द्वार पर पशुचिकित्सा का लाभ लेने हेतु विभाग के द्वारा उपलब्ध मोबाइल वेटनरी यूनिट के टोल फ्री हेल्पलाइन नं.-1962 पर सम्पर्क कर सकते हैं।
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