अंबरनाथ नगर परिषद में बड़ा राजनीतिक उलटफेर- कांग्रेस के सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षद बीजेपी में शामिल।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित अंबरनाथ नगर परिषद में हाल ही में हुए चुनावों के बाद बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। चुनाव में कांग्रेस
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित अंबरनाथ नगर परिषद में हाल ही में हुए चुनावों के बाद बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर नवनिर्वाचित हुए सभी 12 पार्षदों ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। यह घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब चुनाव परिणाम आने के बाद अंबरनाथ विकास अघाड़ी नाम से एक गठबंधन बनाया गया, जिसमें बीजेपी के पार्षदों के साथ कांग्रेस के 12 पार्षदों और अजित पवार गुट की एनसीपी के कुछ पार्षदों ने मिलकर बहुमत हासिल किया। इस गठबंधन ने नगर परिषद की सत्ता पर कब्जा कर लिया और शिवसेना (शिंदे गुट) को बाहर रखा। गठबंधन के तहत बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को नगराध्यक्ष पद मिला। इस पोस्ट-इलेक्शन गठबंधन की वजह से कांग्रेस पार्टी ने अपने इन 12 पार्षदों को पार्टी से निलंबित कर दिया था। निलंबन के तुरंत बाद इन पार्षदों ने बीजेपी में शामिल होने का फैसला लिया और औपचारिक रूप से पार्टी जॉइन कर ली।
यह पूरी घटना दिसंबर 2025 में हुए नगर परिषद चुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद शुरू हुई। चुनाव में कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत नहीं हासिल कर पाई थी। बीजेपी के पास सबसे अधिक पार्षद थे, उसके बाद कांग्रेस और अन्य दल थे। सत्ता हासिल करने के लिए स्थानीय स्तर पर बीजेपी और कांग्रेस के पार्षदों ने हाथ मिलाया, जिसे अंबरनाथ विकास अघाड़ी नाम दिया गया। इस अघाड़ी में बीजेपी के 14 से 16 पार्षद, कांग्रेस के 12 पार्षद, अजित पवार गुट की एनसीपी के चार पार्षद और एक निर्दलीय का समर्थन शामिल था। इस गठबंधन से कुल 32 से अधिक पार्षदों का समर्थन मिला, जो 60 सदस्यीय नगर परिषद में बहुमत के लिए पर्याप्त था। गठबंधन की घोषणा के साथ ही नगराध्यक्ष और अन्य पदों का बंटवारा हो गया। इस गठबंधन ने शिवसेना (शिंदे गुट) को सत्ता से बाहर कर दिया, जो राज्य सरकार में बीजेपी की सहयोगी पार्टी है।
गठबंधन की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने त्वरित कार्रवाई की। पार्टी ने अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों को साथ ही अंबरनाथ ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को भी पार्टी से निलंबित कर दिया। निलंबन का कारण पोस्ट-इलेक्शन बीजेपी के साथ गठबंधन करना बताया गया। निलंबन की घोषणा बुधवार को की गई, जिसमें पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता करार दिया। निलंबन के कुछ घंटों बाद ही इन पार्षदों ने बीजेपी में शामिल होने की घोषणा कर दी। बुधवार देर रात महाराष्ट्र बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इन 12 पार्षदों के पार्टी में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की। इस घोषणा के साथ इन पार्षदों को बीजेपी की सदस्यता प्रदान की गई। अब अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी की स्थिति और मजबूत हो गई है, क्योंकि कांग्रेस के ये पार्षद अब औपचारिक रूप से बीजेपी के हो गए हैं।
यह घटनाक्रम अंबरनाथ नगर परिषद के लिए महत्वपूर्ण है, जहां स्थानीय स्तर पर सत्ता की लड़ाई में अप्रत्याशित गठबंधन और फिर दल-बदल हुआ। चुनाव परिणाम 20 दिसंबर 2025 को घोषित हुए थे, उसके बाद गठबंधन की प्रक्रिया शुरू हुई। अंबरनाथ विकास अघाड़ी के गठन से नगर परिषद की कमान बीजेपी के हाथ में आ गई। कांग्रेस के पार्षदों का बीजेपी के साथ जाना और फिर निलंबन के बाद औपचारिक जॉइनिंग ने स्थानीय राजनीति में नया समीकरण बना दिया है। रवींद्र चव्हाण ने इन पार्षदों का स्वागत करते हुए पार्टी में शामिल होने की पुष्टि की। इस बदलाव से नगर परिषद के कार्यों और निर्णयों पर बीजेपी का प्रभाव बढ़ गया है। पार्षदों का यह कदम निलंबन के तुरंत बाद लिया गया, जिससे प्रक्रिया तेजी से पूरी हुई।
अंबरनाथ में यह राजनीतिक उलटफेर स्थानीय निकाय चुनावों के बाद की सामान्य पोस्ट-इलेक्शन गठबंधन प्रक्रिया का हिस्सा था, लेकिन इसमें विरोधी दलों का साथ आने से यह विशेष बन गया। कांग्रेस के पार्षदों ने पहले गठबंधन में समर्थन दिया, फिर निलंबन के बाद बीजेपी में पूरी तरह शामिल हो गए। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की घोषणा से यह प्रक्रिया औपचारिक हो गई। अब इन 12 पार्षदों के साथ बीजेपी की कुल संख्या बढ़ गई है, जो नगर परिषद में विकास कार्यों और निर्णयों को प्रभावित करेगी। यह घटना 7 जनवरी 2026 को पूरी हुई, जब निलंबन और जॉइनिंग की प्रक्रिया संपन्न हुई। पार्षदों का दल-बदल स्थानीय स्तर पर सत्ता की राजनीति का उदाहरण है, जहां बहुमत हासिल करने के लिए गठबंधन और फिर स्थायी बदलाव किए गए।
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