अजब गजब: उत्तर प्रदेश में स्थानांतरण आदेश में चूक, मृत लेखाकार चारुल पांडेय का फतेहपुर तबादला, प्रशासन की लापरवाही पर सवाल।
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में लेखाकारों के हालिया स्थानांतरण आदेश में एक गंभीर चूक सामने आई है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था ....
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में लेखाकारों के हालिया स्थानांतरण आदेश में एक गंभीर चूक सामने आई है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानांतरण सूची में क्रमांक 155 पर अंकित चारुल पांडेय का नाम शामिल है, जिनका तबादला सहायक लेखाकार (AO Basic) के पद पर फतेहपुर जिले के लिए किया गया है। हैरानी की बात यह है कि चारुल पांडेय का निधन दो वर्ष पूर्व 2023 में हो चुका है। इस घटना का खुलासा तब हुआ, जब स्थानांतरण आदेश की सूची सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, और कुछ पत्रकारों ने इस गलती को उजागर किया। इस मामले ने न केवल प्रशासन की लापरवाही को सामने लाया है, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड्स के रखरखाव और अपडेशन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
- स्थानांतरण आदेश का विवरण
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने 12 जून 2025 को राज्य भर में लेखाकारों के लिए एक स्थानांतरण सूची जारी की थी, जिसमें 200 से अधिक लेखाकारों के तबादले किए गए थे। इस सूची का उद्देश्य प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करना और विभिन्न जिलों में लेखाकारों की कमी को दूर करना था। सूची में क्रमांक 155 पर चारुल पांडेय का नाम दर्ज था, जिन्हें सहायक लेखाकार के पद पर फतेहपुर जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में स्थानांतरित किया गया। आदेश में चारुल पांडेय को तत्काल प्रभाव से नई तैनाती पर जॉइन करने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि, इस आदेश के जारी होने के बाद यह तथ्य सामने आया कि चारुल पांडेय का निधन दो वर्ष पहले हो चुका है। स्थानांतरण आदेश की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, पत्रकारों और कुछ कर्मचारी संगठनों ने इस गलती को उजागर किया। समाचार एजेंसी ANI और अन्य स्थानीय पत्रकारों ने अपने एक्स हैंडल पर इस घटना को साझा करते हुए लिखा, “उत्तर प्रदेश में लेखाकारों के स्थानांतरण आदेश में क्रमांक 155 पर अंकित चारुल पांडेय का स्थानांतरण AO basic फतेहपुर किया गया है। चारुल पांडेय का निधन 2 वर्ष पूर्व ही हो चुका है।” इस खबर ने प्रशासनिक त्रुटि को पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना दिया।
- चारुल पांडेय
चारुल पांडेय उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक लेखाकार के रूप में कार्यरत थीं और उनकी अंतिम तैनाती वाराणसी जिले में थी। उनके सहकर्मियों के अनुसार, चारुल एक मेहनती और समर्पित कर्मचारी थीं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में कई प्रशासनिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया था। 2023 में उनकी असामयिक मृत्यु ने उनके परिवार और सहकर्मियों को गहरा सदमा पहुंचाया था। उनके निधन के बाद, विभाग को उनके मृत्यु प्रमाणपत्र और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद, उनका नाम स्थानांतरण सूची में शामिल होना प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
चारुल पांडेय के परिवार ने इस घटना पर आश्चर्य और दुख व्यक्त किया। उनके एक रिश्तेदार ने स्थानीय मीडिया को बताया, “चारुल का दो साल पहले निधन हो चुका है। हमने सभी कागजी कार्रवाई पूरी कर दी थी, फिर भी उनका नाम इस सूची में कैसे आ गया? यह हमारे लिए दुखद और हैरान करने वाला है।” परिवार ने प्रशासन से इस गलती की जांच और सुधार की मांग की है।
- प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस मामले के सामने आने के बाद, बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर इसे एक “मानवीय भूल” करार दिया। बेसिक शिक्षा निदेशालय, लखनऊ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “स्थानांतरण सूची तैयार करते समय चारुल पांडेय का नाम गलती से शामिल हो गया। यह एक तकनीकी त्रुटि है, और हम इसकी जांच कर रहे हैं। जल्द ही इस गलती को सुधारा जाएगा।” हालांकि, अधिकारी ने यह नहीं बताया कि ऐसी त्रुटि कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
फतेहपुर जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) रमेश चंद्र यादव ने भी इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें स्थानांतरण आदेश की सूची प्राप्त हुई थी, लेकिन हमें यह जानकारी नहीं थी कि चारुल पांडेय का निधन हो चुका है। हमने इसकी सूचना निदेशालय को दे दी है, और अब आगे की कार्रवाई उनके स्तर पर होगी।” बीएसए ने यह भी स्पष्ट किया कि चारुल पांडेय का जॉइनिंग लेटर जारी नहीं किया गया था, क्योंकि मामला पहले ही उजागर हो चुका था।
- सरकारी रिकॉर्ड्स में लापरवाही
यह घटना उत्तर प्रदेश में सरकारी रिकॉर्ड्स के रखरखाव और अपडेशन में लापरवाही का एक और उदाहरण है। विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारियों के रिकॉर्ड्स को डिजिटल और मैनुअल दोनों रूपों में नियमित रूप से अपडेट करना जरूरी होता है, ताकि इस तरह की गलतियां न हों। बेसिक शिक्षा विभाग में कर्मचारियों के रिकॉर्ड्स को मैनेज करने के लिए मैनपावर सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है, जिसमें कर्मचारियों की नियुक्ति, स्थानांतरण, प्रोन्नति, और सेवानिवृत्ति जैसी जानकारी दर्ज की जाती है।
एक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “ऐसी गलतियां तब होती हैं, जब रिकॉर्ड्स को समय पर अपडेट नहीं किया जाता। चारुल पांडेय के निधन की जानकारी विभाग को थी, फिर भी उनका नाम सिस्टम से हटाया नहीं गया। यह न केवल लापरवाही है, बल्कि डेटा मैनेजमेंट सिस्टम की विफलता को भी दर्शाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि स्थानांतरण सूची तैयार करने से पहले रिकॉर्ड्स की दोहरी जांच होनी चाहिए थी।
जुलाई 2024 में कौशांबी जिले के सिराथू तहसील में एक ग्राम विकास अधिकारी ने 65 वर्षीय चंद्रपाल को मृत घोषित कर उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद कर दी थी, जबकि चंद्रपाल जीवित थे। इस मामले के सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए थे। इसी तरह, 2019 में बुलंदशहर जिले में एक मृत शिक्षक का वेतन कई महीनों तक उनके खाते में जमा होता रहा, क्योंकि विभाग ने उनके निधन की जानकारी अपडेट नहीं की थी।
इन घटनाओं से साफ है कि उत्तर प्रदेश के कई विभागों में रिकॉर्ड्स मैनेजमेंट और डेटा अपडेशन की प्रक्रिया में खामियां हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल इंडिया के युग में, जब सभी रिकॉर्ड्स को ऑनलाइन मैनेज करने की सुविधा उपलब्ध है, ऐसी त्रुटियां अस्वीकार्य हैं।
- जांच और कार्रवाई
बेसिक शिक्षा विभाग ने इस मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। निदेशालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि स्थानांतरण सूची तैयार करने वाली टीम से स्पष्टीकरण मांगा गया है, और यह पता लगाया जा रहा है कि चारुल पांडेय का नाम सूची में कैसे शामिल हुआ। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए रिकॉर्ड्स अपडेशन की प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने इस मामले का संज्ञान लिया है और निदेशालय से तत्काल रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा, “यह एक गंभीर त्रुटि है, और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी गलतियां न हों।” हालांकि, अभी तक किसी अधिकारी या कर्मचारी को निलंबित या दंडित नहीं किया गया है।
उत्तर प्रदेश लेखाकार संघ ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। संघ के अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा, “यह घटना न केवल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि कर्मचारियों के प्रति उनकी उदासीनता को भी उजागर करती है। चारुल पांडेय हमारे विभाग की एक सम्मानित कर्मचारी थीं, और उनके निधन के बाद भी उनका नाम गलत तरीके से सूची में शामिल करना दुखद है।” संघ ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित किया जाए।
उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग हर साल मानसून के बाद स्थानांतरण सत्र आयोजित करता है, जिसमें शिक्षकों, लेखाकारों, और अन्य कर्मचारियों के तबादले किए जाते हैं। यह प्रक्रिया प्रशासनिक जरूरतों, कर्मचारियों की वरिष्ठता, और उनकी प्राथमिकताओं के आधार पर होती है। स्थानांतरण सूची तैयार करने की जिम्मेदारी जिला और राज्य स्तर की समितियों की होती है, जो मैनपावर सॉफ्टवेयर और मैनुअल रिकॉर्ड्स के आधार पर निर्णय लेती हैं।
हालांकि, यह प्रक्रिया अक्सर विवादों का कारण बनती है। कर्मचारी संगठन कई बार स्थानांतरण में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगाते हैं। चारुल पांडेय का मामला इस प्रक्रिया में एक नई खामी को सामने लाता है, जो रिकॉर्ड्स मैनेजमेंट की कमजोरियों को उजागर करता है।
15 जून 2025 तक, बेसिक शिक्षा विभाग ने चारुल पांडेय का नाम स्थानांतरण सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। निदेशालय ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने रिकॉर्ड्स की जांच करें और मृत या सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम हटाएं। इस मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसे एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों को अभी तक इस मामले में शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि इसे प्रशासनिक त्रुटि माना जा रहा है। हालांकि, कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि अगर जांच में किसी तरह की साजिश या जानबूझकर की गई लापरवाही का पता चलता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए।
चारुल पांडेय के परिवार के लिए यह घटना एक भावनात्मक आघात लेकर आई है। उनके सहकर्मियों ने भी इस त्रुटि पर दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। वाराणसी में उनके पूर्व सहकर्मी अजय सिंह ने कहा, “चारुल एक बहुत अच्छी इंसान थीं। यह देखकर दुख होता है कि उनके निधन के बाद भी विभाग ने उनके रिकॉर्ड्स को अपडेट नहीं किया। यह हम सभी के लिए शर्मिंदगी की बात है।”
इस बीच, फतेहपुर जिले के बेसिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि चारुल पांडेय की जॉइनिंग की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई थी, और इस गलती का कोई प्रशासनिक प्रभाव नहीं पड़ा है। हालांकि, यह घटना विभाग की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ गई है।
प्रशासन ने वादा किया है कि इस मामले की गहन जांच की जाएगी, और भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे। विशेषज्ञों का सुझाव है कि विभाग को अपने डेटा मैनेजमेंट सिस्टम को और मजबूत करना चाहिए, जिसमें कर्मचारियों के रिकॉर्ड्स का नियमित ऑडिट और अपडेशन शामिल हो। इसके अलावा, स्थानांतरण सूची जारी करने से पहले एक स्वतंत्र समीक्षा की व्यवस्था भी लागू की जा सकती है।
What's Your Reaction?











