Trending: हिमाचल प्रदेश में मानसून की तबाही, 14 बादल फटने से 69 मौतें, 495 करोड़ का नुकसान। 

हिमाचल प्रदेश में 2025 का मानसून अपने रौद्र रूप में सामने आया है, जिसने राज्य को भारी तबाही के भंवर में डाल दिया है। पिछले 72 घंटों में 14 बादल...

Jul 4, 2025 - 14:19
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Trending: हिमाचल प्रदेश में मानसून की तबाही, 14 बादल फटने से 69 मौतें, 495 करोड़ का नुकसान। 

हिमाचल प्रदेश में 2025 का मानसून अपने रौद्र रूप में सामने आया है, जिसने राज्य को भारी तबाही के भंवर में डाल दिया है। पिछले 72 घंटों में 14 बादल फटने की घटनाएं और तीन फ्लैश फ्लड ने मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, शिमला, और चंबा जैसे जिलों में कहर बरपाया है। सबसे अधिक प्रभावित मंडी जिला रहा, जहां 13 बादल फटने की घटनाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया। हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPDMA) के अनुसार, 20 जून से शुरू हुए मानसून सीजन में अब तक 69 लोगों की मौत हो चुकी है, 110 लोग घायल हुए हैं, और 37 लोग लापता हैं। इस आपदा ने राज्य को 495 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। 246 सड़कें बंद हैं, 404 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हैं, और 797 जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं।

  • मानसून की तबाही का दायरा

20 जून 2025 को हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआत के बाद से ही भारी बारिश, बादल फटने, और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। मंडी जिला इस आपदा का केंद्र रहा, जहां 13 बादल फटने की घटनाओं ने गांवों, सड़कों, और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। गोहर उपमंडल में दो बादल फटने की घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई, जबकि तलवारा गांव में तीन लोग लापता हैं। करसोग, मंडी सदर, नाचन, और सराज जैसे क्षेत्रों में घर, पुल, और सड़कें बह गईं। ब्यास नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंचने के बाद पंडोह बांध से 1.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ आ गई।

कुल्लू, कांगड़ा, शिमला, और चंबा जिलों में भी हालात गंभीर हैं। कुल्लू में सैंज घाटी और मणिकर्ण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड ने कई घर, दुकानें, और एक स्कूल को नुकसान पहुंचाया। कांगड़ा के धर्मशाला के पास मनुनी खड्ड में बादल फटने से 15-20 मजदूर लापता हो गए, जिनमें से दो शव बरामद किए गए। शिमला के लिंडी धार गांव में भूस्खलन ने कई घरों को नष्ट कर दिया।

हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, मानसून से अब तक 69 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से 30 मौतें बादल फटने, फ्लैश फ्लड, और भूस्खलन से हुईं, जबकि शेष सड़क दुर्घटनाओं में। मंडी में 10 मौतें और 34 लोग लापता हैं, जो इस जिले को सबसे प्रभावित बनाता है। कुल 110 लोग घायल हुए हैं, और 37 लोग अभी भी लापता हैं। आर्थिक नुकसान का अनुमान 495 करोड़ रुपये है, जिसमें सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को 283.39 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है।

सड़कें और बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। 246 सड़कें, जिनमें मंडी में 186 शामिल हैं, बंद हैं। 404 बिजली ट्रांसफार्मर और 797 जल आपूर्ति योजनाएं ठप हैं। इसके अलावा, 150 से अधिक घर, 104 गोशालाएं, 31 वाहन, और 14 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। कृषि और बागवानी क्षेत्रों को भी भारी नुकसान हुआ है, जिसका असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक रहेगा। हिमाचल प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDRF), सेना, पुलिस, और होमगार्ड्स की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। मंडी में 410 से अधिक बचावकर्मी, ड्रोन, और भारी मशीनरी का उपयोग कर लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। भारतीय वायुसेना ने मंडी के प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य पैकेट गिराए, और राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और कहा, “हम दिन-रात राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता दी जा रही है।”

विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने भी मंडी के सिराज क्षेत्र का दौरा किया और केंद्र सरकार से विस्थापितों के लिए जमीन आवंटन की मांग की। उन्होंने कहा, “कई लोगों ने अपने घर और आजीविका खो दी है। हमें तत्काल राहत और पुनर्वास की जरूरत है।”

हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेष सचिव डीसी राणा ने इस तबाही को जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग से जोड़ा। उन्होंने कहा, “हिमाचल भी जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से अछूता नहीं है। छोटी अवधि में अत्यधिक बारिश और बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं।” मौसम विज्ञानियों के अनुसार, मध्य हिमालय में तीव्र संवहनीय गतिविधियों और पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश ने इस आपदा को और गंभीर बनाया।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंडी, शिमला, कुल्लू, कांगड़ा, और सिरमौर में 7 जुलाई तक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। अगले 24 घंटों में कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, शिमला, सोलन, और सिरमौर में मध्यम से भारी फ्लैश फ्लड का जोखिम है। इस आपदा ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा छेड़ दी है। एक एक्स पोस्ट में कहा गया, “हिमाचल में प्रकृति क्रोधित है। अवैध खनन ने आपदाओं को और विकराल बना दिया है।” कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने शोक व्यक्त करते हुए राहत कार्यों की सराहना की। हालांकि, कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सुखू के उस बयान की आलोचना की, जिसमें उन्होंने मानसून पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही थी। हिमाचल की यह आपदा केवल तात्कालिक नुकसान तक सीमित नहीं है। सड़कों, बिजली, और जल आपूर्ति की बहाली में समय लगेगा, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को परेशानी होगी। पर्यटन, जो राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख हिस्सा है, इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है, जिसके लिए दीर्घकालिक योजना और बुनियादी ढांचे में सुधार की जरूरत है।

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