Muzaffarnagar : पृथक पश्चिम प्रदेश और हाई कोर्ट के लिए जनमानस से संघर्ष का आह्वान

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में पांच, मध्य प्रदेश में चार और राजस्थान में तीन हाई कोर्ट बेंच हैं, जबकि आबादी और क्षेत्र के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मात्र एक बेंच है, जो प्रयागराज के पास लखनऊ में स्थित है। उत्तर प्रदेश में मेरठ औ

By INA News Desk
May 17, 2026 - 22:06
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Muzaffarnagar : पृथक पश्चिम प्रदेश और हाई कोर्ट के लिए जनमानस से संघर्ष का आह्वान
Muzaffarnagar : पृथक पश्चिम प्रदेश और हाई कोर्ट के लिए जनमानस से संघर्ष का आह्वान

मुजफ्फरनगर में पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन वर्मा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अलग राज्य के निर्माण को लेकर क्षेत्र के प्रमुख और जिम्मेदार लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सहकारी क्षेत्र के जानकार व समाजसेवी चौधरी दलसिंह वर्मा, नेत्रपाल सिंह एडवोकेट, अरुण कुमार एडवोकेट, डॉक्टर मुर्तजा सलमानी, किसान चिंतक अशोक बालियान एडवोकेट, संयुक्त क्रांति किसान मंच के शाह आलम, विनोद शर्मा एडवोकेट, व्यापारी नेता सरदार अर्जुन सिंह और मनोज गोयल से संपर्क किया।

भगत सिंह वर्मा ने कहा कि पिछले लगभग 50 वर्षों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वकील मेरठ में हाई कोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने आज तक सुलभ और सस्ते न्याय के लिए यहां बेंच की स्थापना नहीं की है, जो इस क्षेत्र की 8 करोड़ जनता और वकीलों के साथ सीधे तौर पर अन्याय है। यहां के निवासियों को न्याय पाने के लिए करीब 700 किलोमीटर दूर प्रयागराज जाना पड़ता है, जो बेहद मुश्किल, खर्चीला और परेशानी भरा है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में पांच, मध्य प्रदेश में चार और राजस्थान में तीन हाई कोर्ट बेंच हैं, जबकि आबादी और क्षेत्र के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मात्र एक बेंच है, जो प्रयागराज के पास लखनऊ में स्थित है। उत्तर प्रदेश में मेरठ और आगरा सहित कम से कम छह हाई कोर्ट बेंच होनी चाहिए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से सरकार को सबसे ज्यादा टैक्स मिलता है, फिर भी यहां की जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। क्षेत्र में शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था बदहाल है, बेरोजगारी चरम पर है और विभागों में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। कानून व्यवस्था कमजोर है और प्रशासन पर नियंत्रण की कमी है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, बुद्धिजीवियों, वकीलों, पत्रकारों और युवाओं से अपील की कि वे इस क्षेत्र के 26 जिलों को मिलाकर एक अलग 'पश्चिम प्रदेश' बनाने के आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि अलग राज्य बनने से यहां के नेता ही मुख्यमंत्री और मंत्री बनेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और प्रशासन में पूरा प्रतिनिधित्व मिलेगा। नए राज्य में अपनी राजधानी, हाई कोर्ट, शिक्षा बोर्ड, राज्य सेवा चयन बोर्ड, राजस्व बोर्ड और पुलिस मुख्यालय होगा। लखनऊ में इस क्षेत्र के लोगों की सुनवाई नहीं होती क्योंकि वहां दूसरे क्षेत्रों के नेताओं का प्रभाव ज्यादा है। इस मांग को तेज करने के लिए जल्द ही गढ़मुक्तेश्वर ब्रजघाट पर एक बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस प्रतिनिधिमंडल में संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष पंडित नीरज कपिल, प्रदेश महामंत्री आसिम मलिक, प्रदेश मंत्री डॉक्टर परविंदर मलिक, मंडल उपाध्यक्ष कृपाल सिंह चौधरी और जिला मीडिया प्रभारी डॉक्टर मुकेश सिद्धवान शामिल रहे।

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