Viral: पवनजीत सिंह सैनी को 88 लाख की मर्सिडीज 7.5 लाख में बेचनी पड़ी, दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर सख्ती।
DelhiVehicleBan: दिल्ली के ट्रांसपोर्ट व्यवसायी पवनजीत सिंह सैनी ने 2010 में 88 लाख रुपये की मर्सिडीज कार खरीदी थी। यह कार उनके परिवार ....
1 जुलाई 2025 से दिल्ली में इन पुराने वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने पर रोक लगाई गई थी। इस नियम के तहत, सैनी की 15 साल पुरानी पेट्रोल मर्सिडीज को ईंधन नहीं मिल सकता था, और अगर यह सड़क पर पकड़ी जाती, तो इसे जब्त कर स्क्रैप यार्ड में भेज दिया जाता। मजबूरी में, सैनी ने अपनी इस कीमती कार को सिर्फ 7.5 लाख रुपये में बेच दिया, जो इसकी मूल कीमत का एक छोटा सा हिस्सा है। इस नुकसान ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया, बल्कि उनके परिवार को भावनात्मक रूप से भी तोड़ दिया।
- दिल्ली का पुरानी गाड़ियों पर नियम
दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई सालों से पुराने वाहनों पर सख्ती की जा रही है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश और 2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देश के बाद, दिल्ली में 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल वाहनों को सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं है। 2021 में इस नियम को और सख्त करते हुए, ऐसे वाहनों को जब्त करने और स्क्रैप करने का आदेश दिया गया।
1 जुलाई 2025 से, दिल्ली सरकार ने पेट्रोल पंपों पर इन वाहनों को ईंधन देने पर पूरी तरह रोक लगा दी। इसके लिए 350 से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए, जो पुराने वाहनों की पहचान करते हैं। अगर कोई वाहन नियम तोड़ता पाया जाता, तो उसे तुरंत जब्त कर लिया जाता। दिल्ली पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, और नगर निगम के कर्मचारी इस नियम को लागू करने के लिए तैनात किए गए।
हालांकि, 4 जुलाई 2025 को दिल्ली सरकार ने इस नियम को वापस ले लिया, क्योंकि ANPR कैमरों में तकनीकी खराबी और पड़ोसी जिलों में इस नियम के लागू न होने के कारण यह प्रभावी नहीं हो पाया। सरकार ने कहा कि यह नियम 1 नवंबर 2025 से NCR के अन्य जिलों जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, और सोनीपत में लागू होने के बाद फिर से शुरू हो सकता है।
- पवनजीत सिंह सैनी की कहानी
पवनजीत सिंह सैनी दिल्ली में एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी हैं, जिनका व्यवसाय माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स से जुड़ा है। उनकी मर्सिडीज कार उनके लिए एक स्टेटस सिंबल थी, जिसे उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से खरीदा था। सैनी ने बताया कि यह कार उनके परिवार के लिए बहुत खास थी, क्योंकि इसे खरीदने के पीछे उनकी कई यादें जुड़ी थीं। कार का नियमित रखरखाव किया जाता था, और इसका प्रदूषण स्तर (PUC) भी मानकों के अनुरूप था।
लेकिन 1 जुलाई 2025 से लागू हुए नियम ने उनकी सारी उम्मीदें तोड़ दीं। सैनी ने बताया कि पेट्रोल पंप पर उनकी कार को ईंधन देने से मना कर दिया गया, और उन्हें डर था कि अगर कार सड़क पर पकड़ी गई, तो इसे जब्त कर लिया जाएगा। मजबूरी में, उन्होंने कार को बेचने का फैसला किया। बाजार में पुरानी गाड़ियों की मांग कम होने और दिल्ली के नियमों के कारण, उन्हें सिर्फ 7.5 लाख रुपये में कार बेचनी पड़ी। यह उनके लिए एक बड़ा आर्थिक और भावनात्मक नुकसान था।
सैनी ने सरकार से अपील की कि पुरानी गाड़ियों को सिर्फ उनकी उम्र के आधार पर कबाड़ न माना जाए। अगर वाहन का इंजन और प्रदूषण स्तर मानकों पर खरा उतरता है, तो उसे चलने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "मेरी कार बिल्कुल नई जैसी थी। यह न तो प्रदूषण फैलाती थी और न ही सड़क पर कोई खतरा थी। फिर भी, नियमों के कारण मुझे इसे बेचना पड़ा। सरकार को ऐसे लोगों के बारे में सोचना चाहिए जो अपनी गाड़ियों को अच्छी हालत में रखते हैं।"
- ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर प्रभाव
दिल्ली के इस नियम ने न केवल व्यक्तिगत वाहन मालिकों, बल्कि ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को भी प्रभावित किया है। दिल्ली में लगभग 62 लाख 'एंड-ऑफ-लाइफ' वाहन हैं, जिनमें 41 लाख दोपहिया और 18 लाख चारपहिया वाहन शामिल हैं। इनमें से कई वाहन ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में उपयोग होते हैं, जैसे टैक्सी, मालवाहक ट्रक, और ऑटो-रिक्शा।
ट्रांसपोर्ट व्यवसायी पहले से ही बढ़ती ईंधन कीमतों और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। पुराने वाहनों पर यह सख्ती उनके लिए एक और झटका है। कई व्यवसायियों को अपनी गाड़ियां स्क्रैप करने या कम कीमत पर बेचने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है। नए वाहन खरीदने के लिए उनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं है, और बैंक लोन लेना भी आसान नहीं है।
उदाहरण के लिए, दिल्ली के एक टैक्सी ड्राइवर रामेश्वर सिंह ने बताया कि उनकी 12 साल पुरानी डीजल टैक्सी उनकी आजीविका का एकमात्र साधन थी। नियमों के कारण उन्हें इसे बेचना पड़ा, और अब वे बेरोजगार हैं। ऐसे कई व्यवसायी हैं, जिनके लिए यह नियम एक आर्थिक संकट बन गया है।
दिल्ली के इस नियम ने कई सामाजिक और कानूनी सवाल भी खड़े किए हैं। कई लोग, जैसे सैनी, यह सवाल उठा रहे हैं कि अगर उनकी गाड़ी अच्छी हालत में है और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) वैध है, तो उसे क्यों स्क्रैप किया जाए? विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन के उत्सर्जन का स्तर उसकी उम्र के साथ-साथ रखरखाव, मॉडल, और उपयोग पर भी निर्भर करता है।
सोशल मीडिया पर भी इस नियम की खूब आलोचना हुई। X पर @SushantSareen ने लिखा, "प्रदूषण फैलाने वाले वाहन को चाहे वह 1 साल पुराना हो, स्क्रैप करें। लेकिन जो गाड़ी 20 साल पुरानी हो और प्रदूषण न फैलाए, उसे चलने दें। केवल उम्र के आधार पर स्क्रैप करना मूर्खता है।" एक अन्य यूजर, वरुण बहल, ने सवाल उठाया, "15 साल का रोड टैक्स लिया जाता है, लेकिन डीजल गाड़ी 10 साल बाद स्क्रैप कर दी जाती है। यह कहां का न्याय है?"
कानूनी तौर पर, दिल्ली के डीजल वाहन मालिकों को यह शिकायत है कि वे 15 साल का रोड टैक्स देते हैं, लेकिन उनकी गाड़ी को 10 साल बाद ही स्क्रैप कर दिया जाता है। यह असमानता उनके लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन रही है। कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले की समीक्षा की मांग कर रहे हैं, जिसमें पुराने वाहनों पर बैन लगाया गया था।
कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को स्क्रैपिंग नीति में लचीलापन लाना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर वाहन नियमित फिटनेस टेस्ट पास करता है और उसका PUC वैध है, तो उसे चलने की अनुमति दी जा सकती है। साथ ही, सरकार को स्क्रैपिंग के लिए पर्याप्त सुविधाएं और मुआवजा नीति बनानी चाहिए, ताकि वाहन मालिकों को कम नुकसान हो।
दिल्ली में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर सख्ती ने पवनजीत सिंह सैनी जैसे कई लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है। उनकी 88 लाख रुपये की मर्सिडीज, जो सिर्फ 45,000 किलोमीटर चली थी, को 7.5 लाख में बेचना उनके लिए एक बड़ा आर्थिक और भावनात्मक नुकसान था। यह नियम वायु प्रदूषण को कम करने के लिए लागू किया गया, लेकिन इसने ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों और आम लोगों के लिए कई चुनौतियां खड़ी कर दीं। सैनी की अपील कि अच्छी हालत वाली गाड़ियों को चलने की अनुमति दी जाए, एक ऐसा सवाल है जो सरकार को गंभीरता से सोचने पर मजबूर करता है। भविष्य में, सरकार को प्रदूषण नियंत्रण और नागरिकों की सुविधा के बीच संतुलन बनाना होगा, ताकि ऐसी कहानियां कम हों और दिल्ली की हवा भी साफ हो।
4 जुलाई 2025 को दिल्ली सरकार ने इस नियम को अस्थायी रूप से वापस ले लिया, क्योंकि ANPR कैमरों में तकनीकी खराबी थी और पड़ोसी जिलों में यह नियम लागू नहीं था। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि उत्सर्जन-आधारित मूल्यांकन उम्र-आधारित बैन से ज्यादा तर्कसंगत होगा। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार नवंबर 2025 तक NCR के अन्य जिलों में ANPR सिस्टम लागू करने की योजना बना रही है, जिसके बाद यह नियम फिर से शुरू हो सकता है।
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