Viral: दिल्ली IGI हवाई अड्डे से 750 करोड़ की साइबर ठगी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार। 

Cyber Fraud Arrested: दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर उत्तराखंड पुलिस की विशेष कार्य बल (STF) ने एक बड़े साइबर ठगी के रैकेट का पर्दाफाश करते...

Jul 7, 2025 - 13:10
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Viral: दिल्ली IGI हवाई अड्डे से 750 करोड़ की साइबर ठगी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार। 

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर उत्तराखंड पुलिस की विशेष कार्य बल (STF) ने एक बड़े साइबर ठगी के रैकेट का पर्दाफाश करते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक अग्रवाल को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी 6 जुलाई 2025 को हुई, जब अभिषेक थाईलैंड भागने की कोशिश कर रहा था। उसके खिलाफ पहले से ही लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी था। अभिषेक पर आरोप है कि उसने चीनी नागरिकों के साथ मिलकर 750 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी को अंजाम दिया। उसने अपनी पत्नी के नाम पर 28 और खुद के नाम पर 13 समेत कुल 41 फर्जी (शेल) कंपनियां बनाई थीं, जिनके जरिए अवैध लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग की गई। इस मामले ने देशभर में सनसनी मचा दी है, क्योंकि यह ठगी न केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा है। 

  • साइबर ठगी का खुलासा

यह साइबर ठगी का मामला पहली बार दिसंबर 2022 में तब सामने आया, जब उत्तराखंड में कई लोगों ने फर्जी लोन ऐप्स के जरिए ठगी की शिकायतें दर्ज कीं। इन शिकायतों के आधार पर उत्तराखंड STF ने जांच शुरू की और पाया कि यह एक बड़े पैमाने का अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क है। जांच में पता चला कि अभिषेक अग्रवाल इस रैकेट का मास्टरमाइंड है। वह पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है और दिल्ली के अशोक विहार का निवासी है। उसने चीनी नागरिकों के साथ मिलकर 750 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। STF के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत भुल्लर ने बताया कि अभिषेक ने 2019-20 में इस नेटवर्क की शुरुआत की थी। वह 2019 में शंघाई और शेनझेन गया था, जहां उसने चीनी साइबर अपराधियों के साथ सांठगांठ की। इसके बाद, उसने 15 से ज्यादा फर्जी लोन ऐप्स जैसे इंस्ट लोन, मैक्सी लोन, केके कैश, रूपीगो, और लेंडकर लॉन्च किए। ये ऐप्स लोगों को कम दस्तावेजों के साथ तुरंत लोन देने का लालच देकर ठगते थे।

  • शेल कंपनियों का जाल और ठगी का तरीका

अभिषेक ने अपनी पत्नी के नाम पर 28 और खुद के नाम पर 13 शेल कंपनियां बनाई थीं। ये कंपनियां कागजों पर थीं और इनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं था। इनके जरिए वह अवैध रूप से एकत्र किए गए पैसों को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करता था। कई कंपनियों में चीनी नागरिकों को सह-निदेशक बनाया गया था, जो इस रैकेट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले गए। इन कंपनियों के खातों में 750 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध रकम का लेनदेन हुआ। फर्जी लोन ऐप्स डाउनलोड करने वाले लोगों का निजी डेटा, जैसे फोटो, कॉन्टैक्ट लिस्ट, और अन्य निजी जानकारी, चुरा लिया जाता था। इसके बाद, उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था या उनके खातों से पैसे निकाले जाते थे। कुछ मामलों में, लोगों को धमकी दी जाती थी कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी, जिससे डरकर वे पैसे ट्रांसफर कर देते थे।

  • गिरफ्तारी और बरामद सामान

उत्तराखंड STF और दिल्ली पुलिस ने मिलकर अभिषेक को IGI हवाई अड्डे पर पकड़ा, जब वह थाईलैंड भागने की कोशिश कर रहा था। उसके पास से एक मोबाइल फोन, पासपोर्ट, भारतीय और थाई मुद्रा, एक पावर बैंक, डिजिटल डिवाइस, एक एप्पल वॉच, और कुछ अन्य सामान बरामद किए गए। पूछताछ में उसने पांच चीनी नागरिकों के नाम बताए, जिनके साथ वह काम कर रहा था। पुलिस अब केंद्रीय एजेंसियों और इंटरपोल के साथ मिलकर इन विदेशी कनेक्शनों की जांच कर रही है।

  • चीनी कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

जांच में यह सामने आया कि अभिषेक का नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं था। वह चीनी साइबर अपराधियों के साथ मिलकर काम कर रहा था, जिन्होंने इस रैकेट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाया। 2019 में अभिषेक ने शंघाई और शेनझेन की यात्रा की थी, जहां उसने इस नेटवर्क की नींव रखी। चीनी नागरिकों को कई शेल कंपनियों में सह-निदेशक बनाया गया था, जो पैसे को विदेशी खातों में ट्रांसफर करने में मदद करते थे। यह नेटवर्क Hector Lendkaro Pvt. Ltd. के नाम से संचालित हो रहा था। इस कंपनी के तहत 15 से ज्यादा फर्जी लोन ऐप्स चलाए जा रहे थे, जो लोगों को तुरंत लोन देने का वादा करते थे। ये ऐप्स गूगल प्ले स्टोर पर भी उपलब्ध थे, जिससे इनकी पहुंच लाखों लोगों तक थी।

  • पहले की गिरफ्तारियां और जांच का दायरा

इस मामले में पहले भी कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। 2023 में गुरुग्राम से अंकुर धींगरा नाम के एक अन्य मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया गया था, जिसने चीनी नागरिकों को इस रैकेट में शामिल किया था। इसके अलावा, STF और साइबर पुलिस ने औरंगाबाद, महाराष्ट्र में एक कॉल सेंटर पर छापा मारा था, जहां से सिमबॉक्स और अन्य सबूत बरामद किए गए थे।

जांच में यह भी पता चला कि यह रैकेट दिल्ली-एनसीआर, पश्चिम बंगाल, बेंगलुरु, ओडिशा, असम, और सूरत जैसे कई शहरों में फैला हुआ था। पुलिस ने कई बैंक खातों में 11 करोड़ रुपये फ्रीज किए और 97 लाख रुपये नकद बरामद किए। इस मामले की जांच अब भी जारी है, और पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश में है।

इस घटना ने सोशल मीडिया, खासकर X पर, लोगों का ध्यान खींचा। कई यूजर्स ने इसे साइबर अपराध की बढ़ती समस्या का प्रतीक बताया। एक यूजर ने लिखा, “750 करोड़ की ठगी और चीनी कनेक्शन! यह तो बहुत बड़ा रैकेट है। साइबर क्राइम के खिलाफ और सख्त कदम उठाने चाहिए।” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे पढ़े-लिखे लोग इस तरह की ठगी में शामिल हैं, यह शर्मनाक है।”

कई लोगों ने साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की मांग की। एक X पोस्ट में लिखा गया, “लोगों को फर्जी लोन ऐप्स के बारे में जागरूक करना जरूरी है। सरकार को ऐसी ऐप्स पर सख्ती से निगरानी रखनी चाहिए।” यह मामला भारत में साइबर अपराध की बढ़ती समस्या को उजागर करता है। हाल के वर्षों में फर्जी लोन ऐप्स, डिजिटल अरेस्ट, और डेटा चोरी जैसे मामले तेजी से बढ़े हैं। 2021 में दिल्ली पुलिस ने एक अन्य चीनी साइबर रैकेट का भंडाफोड़ किया था, जिसमें 150 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी। उस मामले में भी 11 लोग गिरफ्तार हुए थे, जिनमें दो चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल थे।

साइबर अपराधी अक्सर लोगों की कम जानकारी का फायदा उठाते हैं। वे फर्जी ऐप्स और कॉल सेंटर्स के जरिए लोगों को लुभावने ऑफर देते हैं और फिर उनके डेटा का दुरुपयोग करते हैं। इस मामले में भी, अभिषेक ने लोगों को आसान लोन का लालच देकर ठगा और उनके निजी डेटा का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया।

उत्तराखंड STF और दिल्ली पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही हैं। डीएसपी (साइबर क्राइम यूनिट) अंकुश मिश्रा ने बताया कि पुलिस बैंकों, सर्विस प्रोवाइडर्स, और अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है, और विदेशी कनेक्शनों की जांच के लिए इंटरपोल से सहायता ली जा रही है। सरकार ने साइबर अपराधों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 शुरू किया है, जहां लोग साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा, गूगल प्ले स्टोर और अन्य ऐप स्टोर्स से संदिग्ध ऐप्स को हटाने के लिए सख्त दिशा=निर्देश जारी किए गए हैं।

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