'राकासा' मूवी रिव्यू: फंतासी और कॉमेडी का बेजोड़ संगम, संगीथ शोभन ने एक बार फिर जीता दिल।

तेलुगु सिनेमा में इन दिनों नए प्रयोगों का दौर चल रहा है और इसी कड़ी में फिल्म 'राकासा' एक ताज़ा हवा के झोंके की तरह आई है। शुक्रवार, 3

Apr 3, 2026 - 12:24
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'राकासा' मूवी रिव्यू: फंतासी और कॉमेडी का बेजोड़ संगम, संगीथ शोभन ने एक बार फिर जीता दिल।
'राकासा' मूवी रिव्यू: फंतासी और कॉमेडी का बेजोड़ संगम, संगीथ शोभन ने एक बार फिर जीता दिल।
  • निहारिका कोंडिडेला की नई पेशकश: 'राकासा' में लोककथाओं और आधुनिक हास्य का अद्भुत मिश्रण, दर्शकों को मिल रहा मनोरंजन का डबल डोज
  • सोशियो-फंतासी का नया अवतार: बेहतरीन ग्राफिक्स और जबरदस्त अभिनय के साथ 'राकासा' ने बड़े पर्दे पर दी दस्तक, जानें फिल्म की पूरी समीक्षा

तेलुगु सिनेमा में इन दिनों नए प्रयोगों का दौर चल रहा है और इसी कड़ी में फिल्म 'राकासा' एक ताज़ा हवा के झोंके की तरह आई है। शुक्रवार, 3 अप्रैल, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म अपनी अनूठी कहानी और प्रस्तुतीकरण के कारण चर्चा का केंद्र बनी हुई है। फिल्म की शुरुआत एक एनआरआई (NRI) युवक की कहानी से होती है, जो दस साल के लंबे अंतराल के बाद अपने प्यार की तलाश में घर वापस आता है। लेकिन कहानी में मोड़ तब आता है जब उसकी एक छोटी सी गलती एक प्राचीन अंधेरे या दैवीय शक्ति को जागृत कर देती है। यहीं से फिल्म फंतासी और रोमांच के सफर पर निकल पड़ती है, जहाँ हास्य और डर का एक साथ अनुभव होता है।

फिल्म के मुख्य कलाकार संगीथ शोभन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कॉमेडी टाइमिंग के मामले में उनका कोई सानी नहीं है। 'मैड' सीरीज के बाद दर्शकों को उनसे काफी उम्मीदें थीं और 'राकासा' में उन्होंने वीरू के किरदार को पूरी शिद्दत से निभाया है। उनके चेहरे के हाव-भाव और संवाद अदायगी फिल्म के हल्के-फुल्के पलों को बेहद प्रभावशाली बनाती है। वहीं, नयन सारिका ने अपनी पिछली फिल्मों की तुलना में इस बार काफी विविधता दिखाई है। उनकी और संगीथ की केमिस्ट्री पर्दे पर ताज़गी भरी लगती है। फिल्म के निर्देशक मानसा शर्मा ने लोककथाओं (Folklore) को आधुनिक परिवेश में इस तरह पिरोया है कि यह हर वर्ग के दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। 'राकासा' की सबसे बड़ी ताकत इसका विजुअल और ग्राफिक्स विभाग है। कम बजट के बावजूद जिस तरह से सूर्य ग्रहण और पौराणिक दृश्यों को फिल्माया गया है, वह तकनीकी टीम की कड़ी मेहनत को दर्शाता है। यह फिल्म विठलाचार्य शैली की सोशियो-फंतासी फिल्मों की याद दिलाती है, लेकिन इसमें आधुनिक हास्य का पुट इसे नयापन देता है।

सहायक कलाकारों की बात करें तो वेनिला किशोर, ब्रह्माजी और तनिकेला भरणी जैसे अनुभवी अभिनेताओं ने फिल्म के स्तर को और ऊंचा उठा दिया है। विशेष रूप से गेटअप श्रीनू और संगीथ शोभन के बीच के दृश्य दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर देते हैं। आशीष विद्यार्थी ने एक बार फिर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है, जो कहानी में गहराई जोड़ने का काम करती है। फिल्म का संगीत अनुदीप देव ने दिया है, जो बैकग्राउंड स्कोर के माध्यम से फंतासी के माहौल को जीवंत बनाए रखता है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और संपादन भी कहानी की गति के साथ तालमेल बिठाते नजर आते हैं, जिससे 2 घंटे 13 मिनट की यह फिल्म कहीं भी बोझिल नहीं लगती।

फिल्म का पहला भाग किरदारों के परिचय और हास्य के साथ तेजी से आगे बढ़ता है, जबकि इंटरवल ब्लॉक एक बड़े सस्पेंस के साथ दर्शकों को दूसरे भाग के लिए उत्सुक छोड़ देता है। दूसरे भाग में थ्रिलर और फंतासी के तत्व अधिक हावी हो जाते हैं। प्री-क्लाइमैक्स से लेकर क्लाइमैक्स तक के दृश्य दर्शकों को रोमांचित करने में सफल रहते हैं। हालांकि, कहानी के कुछ हिस्से थोड़े पूर्वानुमेय (Predictable) लग सकते हैं, लेकिन प्रस्तुतीकरण का तरीका उस कमी को पूरा कर देता है। निर्देशक ने मिथकीय छवियों का उपयोग करके एक ऐसी दुनिया बनाने की कोशिश की है जो यथार्थ और कल्पना के बीच की रेखा को धुंधला कर देती है।

निर्माता के रूप में निहारिका कोंडिडेला का यह प्रयास सराहनीय है। अपनी पिछली सफलताओं के बाद उन्होंने एक ऐसी कहानी को चुना जो जोखिम भरी हो सकती थी, लेकिन उनका कंटेंट पर भरोसा फिल्म की सफलता में साफ दिखाई देता है। 'राकासा' केवल एक साधारण कॉमेडी फिल्म नहीं है, बल्कि यह पात्रों के भावनात्मक उतार-चढ़ाव और उनकी पसंद के परिणामों को भी संक्षेप में न रहकर विस्तार से समझाती है। फिल्म यह संदेश भी देती है कि कभी-कभी हमारी अनजानी गलतियां बड़े संकटों को जन्म दे सकती हैं, जिनसे निपटने के लिए साहस और बुद्धिमत्ता की आवश्यकता होती है।

बॉक्स ऑफिस की दृष्टि से देखें तो फिल्म को अच्छी शुरुआत मिली है। बुकिंग पोर्टल्स पर हजारों टिकटों की बिक्री यह दर्शाती है कि दर्शकों में इस तरह के नए विषयों को लेकर काफी उत्साह है। संक्रांति के बाद तेलुगु बॉक्स ऑफिस पर एक बड़े धमाके की तलाश थी, जिसे 'राकासा' काफी हद तक पूरा करती नजर आ रही है। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि यदि वर्ड-ऑफ-माउथ इसी तरह सकारात्मक बना रहा, तो यह फिल्म आने वाले दिनों में कमाई के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकती है। फिल्म को UA13+ सर्टिफिकेट मिला है, जिसका अर्थ है कि इसे परिवार के साथ देखा जा सकता है।

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