Bihar Elections 2025: आर.के. सिंह का नीतीश कुमार पर तंज, 'मुख्यमंत्री बने तो लंबे समय तक नहीं टिकेंगे'; एनडीए में सीएम चेहरे पर बढ़ी खींचतान। 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा प्रहार

By INA News Desk
Oct 28, 2025 - 18:17
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Bihar Elections 2025: आर.के. सिंह का नीतीश कुमार पर तंज, 'मुख्यमंत्री बने तो लंबे समय तक नहीं टिकेंगे'; एनडीए में सीएम चेहरे पर बढ़ी खींचतान। 
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बने तो वे ज्यादा दिनों तक इस पद पर नहीं रह पाएंगे। यह बयान 27 अक्टूबर 2025 को पटना में एक सभा के दौरान आया, जब आर.के. सिंह एनडीए के प्रचार अभियान की बात कर रहे थे। भाजपा नेता का यह बयान एनडीए में सीएम पद के उम्मीदवार को लेकर चल रही अटकलों को हवा दे रहा है। विपक्षी महागठबंधन ने इसे एनडीए की आंतरिक कलह का सबूत बताया है, जबकि भाजपा ने इसे व्यक्तिगत राय करार दिया है। बिहार चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं, पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा 11 नवंबर को। वोट गिनती 14 नवंबर को होगी। यह बयान बिहार की राजनीति को और गर्म कर रहा है, जहां नीतीश कुमार की छवि 'पलटू राम' की बनी हुई है।

आर.के. सिंह का बयान उस सभा में आया, जहां वे भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'नीतीश कुमार अगर फिर सीएम बने तो ज्यादा दिन तक नहीं रहेंगे। हम जानते हैं उनकी आदत।' सिंह ने नीतीश के गठबंधन बदलने के इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में नीतीश ने एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल हो गए थे, और जनवरी 2024 में फिर एनडीए में लौट आए। 'ऐसे में विश्वास कैसे करें कि वे स्थिर रहेंगे,' सिंह ने सवाल उठाया। सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं ने तालियां बजाईं, लेकिन कुछ ने असहजता भी दिखाई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, और ट्विटर पर RKSinghOnNitish ट्रेंड करने लगा। एक यूजर ने लिखा, 'भाजपा खुद नीतीश को सीएम बनाना नहीं चाहती, फिर गठबंधन कैसे चलेगा?' आर.के. सिंह बिहार के बेगूसराय से सांसद हैं और पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। उनका बयान एनडीए के लिए असहज है, क्योंकि हाल ही में अमित शाह ने भी सीएम चेहरे पर अस्पष्ट बयान दिया था।

नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। उन्होंने 2000 में पहली बार पद संभाला था, लेकिन सात दिन बाद इस्तीफा दे दिया। 2005 से वे लगातार सत्ता में हैं, हालांकि गठबंधनों के साथ कई बार इस्तीफा देकर फिर शपथ ली। कुल नौ बार मुख्यमंत्री बने। जनवरी 2024 में महागठबंधन छोड़कर एनडीए में लौटने के बाद उन्होंने कहा था कि अब कोई पलटाव नहीं होगा। लेकिन आर.के. सिंह का बयान इस वादे पर सवाल खड़ा करता है। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने इसे पकड़ लिया। उन्होंने कहा, 'एनडीए में नीतीश को सीएम नहीं बनाना चाहते। अमित शाह का बयान और अब आर.के. सिंह की बात साबित करती है। बिहार की जनता को धोखा न दें।' महागठबंधन ने इसे प्रचार का मुद्दा बना लिया है। कांग्रेस नेता खड़गे ने कहा कि एनडीए की एकजुटता खतरे में है।

एनडीए की ओर से प्रतिक्रिया आई। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि आर.के. सिंह की राय व्यक्तिगत है, और नीतीश कुमार ही एनडीए के सीएम चेहरे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में समस्तीपुर की सभा में कहा था कि 'नीतीश के नेतृत्व में एनडीए रिकॉर्ड तोड़कर जीतेगा।' अमित शाह ने भी कहा था कि नीतीश के नेतृत्व में बिहार में चार दीवाली मनाई जाएंगी। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि भाजपा नीतीश को सिर्फ चुनाव जीतने के लिए इस्तेमाल कर रही है। जनता दल यूनाइटेड के नेता ने कहा कि सिंह का बयान अनुशासनहीनता है, और पार्टी इस पर विचार करेगी। नीतीश कुमार ने खुद चुप्पी साधी है, लेकिन उनके करीबी कहते हैं कि वे विकास पर फोकस कर रहे हैं। एनडीए ने अपना घोषणापत्र जारी किया है, जिसमें सात निश्चय भाग-2, विशेष राज्य का दर्जा और बुनियादी ढांचे पर जोर है।

बिहार चुनाव में प्रमुख मुद्दे बेरोजगारी, पलायन, जातिगत जनगणना और विकास हैं। राज्य में 7 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं, और महिलाओं का प्रतिशत ज्यादा है। महागठबंधन ने 'तेजस्वी प्रण पत्र' जारी किया, जिसमें हर घर में नौकरी, महिलाओं को 30 हजार मासिक वेतन और आरक्षण बढ़ाने के वादे हैं। तेजस्वी को सीएम उम्मीदवार बनाया गया है। एनडीए ने नीतीश को चेहरा बनाया है, लेकिन अंदरूनी मतभेद साफ दिख रहे हैं। प्राशांत किशोर की जन सुराज पार्टी सभी 243 सीटों पर लड़ रही है, और आर.सी.पी. सिंह के साथ विलय ने नीतीश को चुनौती दी है। आर.सी.पी. सिंह पूर्व जेडीयू नेता हैं, जो अब प्राशांत के साथ हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश का समय खत्म हो चुका है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची पर विवाद के बीच विशेष संशोधन किया, जिस पर विपक्ष ने आपत्ति जताई। राहुल गांधी 29 अक्टूबर से प्रचार शुरू करेंगे।

यह बयान बिहार की राजनीति के पुराने इतिहास को ताजा कर रहा है। नीतीश ने 2013 में मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाने पर एनडीए छोड़ा था। 2015 में महागठबंधन से जीते, लेकिन 2017 में भ्रष्टाचार के आरोप में फिर एनडीए में लौटे। 2022 में फिर महागठबंधन, और 2024 में एनडीए। इन पलटावों से उनकी छवि प्रभावित हुई है। विशेषज्ञ कहते हैं कि भाजपा नीतीश को इस्तेमाल कर रही है, लेकिन लंबे समय के लिए नहीं। आर.के. सिंह का बयान इसी संदेह को व्यक्त करता है। सोशल मीडिया पर बहस तेज है। एक तरफ एनडीए समर्थक कहते हैं कि यह मजाक था, दूसरी तरफ विपक्ष इसे तोड़फोड़ का सबूत मान रहा है। मीडिया ने इसे प्रमुखता से दिखाया। हिंदुस्तान टाइम्स, द हिंदू और इंडिया टुडे ने रिपोर्ट की। एक रिपोर्ट में कहा गया कि एनडीए की जीत के बाद भी सीएम पद पर खींचतान हो सकती है।

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