Sambhal : AIMIM का वार- वंदे मातरम अनिवार्य करना जनता को असली मुद्दों से भटकाने की चाल: असद अब्दुल्ला
असद अब्दुल्ला ने कहा कि वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है और हर नागरिक को इसका सम्मान करना चाहिए, लेकिन इसे गाना या न गाना व्यक्तिगत अधिकार का माम
Report : उवैस दानिश, सम्भल
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राज्य के सभी स्कूलों में वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत को अनिवार्य किए जाने की घोषणा पर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के जिला अध्यक्ष असद अब्दुल्ला ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी पर भी वंदेमातरम जबरदस्ती नहीं थोपा जा सकता है।
असद अब्दुल्ला ने कहा कि वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है और हर नागरिक को इसका सम्मान करना चाहिए, लेकिन इसे गाना या न गाना व्यक्तिगत अधिकार का मामला है। उन्होंने कहा, संविधान ने हमें धार्मिक स्वतंत्रता दी है। अगर कोई वंदे मातरम नहीं गाता तो इसका मतलब यह नहीं कि वह देशभक्त नहीं है। इसे अनिवार्य करना जबरदस्ती होगी। क्या जो नहीं गाएगा, उसे स्कूल से निकाला जाएगा? क्या लाठी के बल पर वंदे मातरम कहलवाया जाएगा? उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसले जनता को असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश हैं। प्रदेश का किसान खाद और फसलों के उचित मूल्य के लिए परेशान है, नौजवान रोजगार मांग रहा है। सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि ऐसे बयानों से माहौल बिगाड़ना चाहिए। AIMIM नेता ने यह भी कहा कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर खुशियां मनाना स्वागत योग्य है, लेकिन इसे किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए। असद अब्दुल्ला के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर वंदे मातरम को लेकर बहस तेज हो गई है।
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