Sambhal : संभल में गंगा की बाढ़ का खतरा: राजघाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा, नरौरा बैराज से 80,000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज

पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से पानी की आवक के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। इससे पहले, 16 जुलाई 2025 को भी संभल के राजघाट पर गंगा

Aug 2, 2025 - 00:58
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Sambhal : संभल में गंगा की बाढ़ का खतरा: राजघाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा, नरौरा बैराज से 80,000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज
संभल में गंगा की बाढ़ का खतरा

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में गंगा नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि के कारण बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। बीते 24 घंटों में गंगा में 18,000 क्यूसेक पानी की वृद्धि दर्ज की गई है, और राजघाट में नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नरौरा बैराज से 80,000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है, जिसने स्थानीय प्रशासन और निवासियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं, और अभी तक किसी गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश नहीं हुआ है। फिर भी, यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है।स्थानीय लोगों के अनुसार, गंगा नदी में शुक्रवार सुबह से जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। बीते 24 घंटों में नदी में 18,000 क्यूसेक पानी की बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण राजघाट पर गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। यह स्थिति संभल जिले के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि गंगा के किनारे बसे कई गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। नरौरा बैराज से 80,000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है, जो नदी के जलस्तर को और बढ़ा रहा है।

पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से पानी की आवक के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। इससे पहले, 16 जुलाई 2025 को भी संभल के राजघाट पर गंगा का जलस्तर 177.60 मीटर दर्ज किया गया था, जो बाढ़ के खतरे का संकेत देता है।संभल के जिला मजिस्ट्रेट डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है और बाढ़ से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। जिले में 16 बाढ़ नियंत्रण चौकियां स्थापित की गई हैं, और 13 आश्रय स्थलों की पहचान की गई है। बाढ़ राहत किटों के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। डॉ. पेंसिया ने कहा, “हमारी टीमें पूरी तरह से तैयार हैं। अभी तक किसी गांव में बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।”

प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित होने की संभावना वाले 36 गांवों की पहचान की है और इन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। बाढ़ चौकियों पर कर्मचारी 24 घंटे तैनात हैं, और स्थानीय लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। नरौरा बैराज और अन्य क्षेत्रों से पानी के डिस्चार्ज की निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।राजघाट के किनारे रहने वाले लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर सुबह से तेजी से बढ़ रहा है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि हमें डर है कि अगर यही स्थिति रही, तो हमारे घरों और खेतों तक पानी पहुंच सकता है।” हालांकि, अभी तक किसी गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश नहीं हुआ है, लेकिन जलस्तर की वृद्धि ने लोगों में चिंता पैदा कर दी है।

कुछ निवासियों ने 2010 की बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ा था, जिसके कारण कई गांव प्रभावित हुए थे। इस बार प्रशासन की तैयारियों के कारण स्थिति नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन लोग सतर्क हैं।नरौरा बैराज से 80,000 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है, जो गंगा के जलस्तर को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह बैराज संभल और बुलंदशहर के बीच गंगा के जल प्रवाह को नियंत्रित करता है। इससे पहले, 2023 में भी नरौरा बैराज से 77,077 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया था, जिसके कारण नदी का जलस्तर बढ़ गया था। इस बार डिस्चार्ज की मात्रा अधिक होने के कारण प्रशासन ने निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

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