Sambhal : कोर्ट परिसर में वकीलों के प्रदर्शन की हकीकत आई सामने, सीनियर वकीलों ने बताया गैरकानूनी
हरिमंदिर–जामा मस्जिद प्रकरण में नियुक्त कोर्ट कमिश्नर और सीनियर अधिवक्ता ने स्पष्ट कहा कि प्रदर्शन के लिए बार से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने दावा किया कि बार के अधि
Report : उवैस दानिश, सम्भल
कोर्ट परिसर में सीजेएम (CJM) के ट्रांसफर के विरोध में हुए वकीलों के प्रदर्शन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। दो दिन पहले हुए इस प्रदर्शन को अब सम्भल के सीनियर वकीलों ने गैरकानूनी करार दिया है। उनका कहना है कि इस प्रदर्शन में बार एसोसिएशन का कोई समर्थन नहीं था और चंद वकील ही इसमें शामिल हुए थे। साथ ही आरोप लगाया गया है कि इस प्रदर्शन के पीछे विपक्षी राजनीतिक दलों की भूमिका रही है।
हरिमंदिर–जामा मस्जिद प्रकरण में नियुक्त कोर्ट कमिश्नर और सीनियर अधिवक्ता ने स्पष्ट कहा कि प्रदर्शन के लिए बार से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने दावा किया कि बार के अधिकांश वकील इस प्रदर्शन से अलग रहे और कुछ खास वकीलों ने निजी व राजनीतिक एजेंडे के तहत इसे आयोजित किया। उनके अनुसार, इसे वकीलों का सामूहिक विरोध बताना गलत और भ्रामक है। उधर, इसी प्रकरण में एएसआई (ASI) के अधिवक्ता ने भी स्थिति साफ करते हुए कहा कि सीजेएम का ट्रांसफर हाईकोर्ट की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत हुआ है।
उन्होंने किसी विशेष आदेश या घटना के कारण तबादले की बात को पूरी तरह खारिज किया। उनके मुताबिक, न्यायिक अधिकारियों का स्थानांतरण एक नियमित प्रक्रिया है, जिसे विवाद से जोड़ना उचित नहीं है। गौरतलब है कि प्रदर्शन के अगले ही दिन हाईकोर्ट के प्रशासनिक अनुभाग ने दीपक कुमार जायसवाल को सम्भल का नया सीजेएम नियुक्त कर दिया, जबकि इससे पहले सीजेएम बनाए गए आदित्य सिंह को उनके पुराने पद सिविल जज (सीनियर डिवीजन) पर वापस तैनात कर दिया गया।
सीजेएम के ट्रांसफर के बाद जिस तरह प्रदेश से लेकर देश भर तक यह मुद्दा सुर्खियों में रहा, सीनियर वकीलों के बयानों के बाद उसकी असलियत सामने आती दिख रही है। अब सवाल यह है कि ट्रांसफर के विरोध की आड़ में आखिर किसने और क्यों यह पूरा बखेड़ा खड़ा किया।
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