Lucknow: विधान परिषद में संदीप सिंह का तथ्यात्मक जवाब: उपलब्धियों के आंकड़ों से विपक्ष के दावे खोखले साबित। 

विधान परिषद में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों पर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से ख़ारिज

Dec 19, 2025 - 22:08
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Lucknow: विधान परिषद में संदीप सिंह का तथ्यात्मक जवाब: उपलब्धियों के आंकड़ों से विपक्ष के दावे खोखले साबित। 
विधान परिषद में संदीप सिंह का तथ्यात्मक जवाब: उपलब्धियों के आंकड़ों से विपक्ष के दावे खोखले साबित। 

लखनऊ। विधान परिषद में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों पर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया। उन्होंने सदन में आंकड़ों और उपलब्धियों के साथ स्पष्ट किया कि परिषदीय शिक्षा में गिरावट और बच्चों के भविष्य की उपेक्षा के आरोप तथ्यहीन और भ्रामक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार, शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए गुणवत्ता, पहुंच और परिणाम तीनों मोर्चों पर निरंतर कार्य कर रही है।

मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण-2024 में उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर रहा है। कक्षा 3 में भाषा विषय में प्रदेश का औसत 68 प्रतिशत रहा, जबकि राष्ट्रीय औसत 64 प्रतिशत है। गणित में भी प्रदेश का औसत 64 प्रतिशत रहा, जो राष्ट्रीय औसत 60 प्रतिशत से अधिक है। कक्षा 6 में भी भाषा और गणित दोनों विषयों में उत्तर प्रदेश के छात्रों ने संतोषजनक और तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में हुए संरचनात्मक और शैक्षणिक सुधारों का प्रमाण हैं।

निपुण भारत मिशन की प्रगति का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि शैक्षिक सत्र 2025-26 में अब तक 48 हजार से अधिक परिषदीय विद्यालय निपुण घोषित किए जा चुके हैं, जहां छात्र-छात्राएं भाषा और गणित में निर्धारित दक्षता प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण के आंकड़ों का सरकार द्वारा स्वतंत्र रूप से पुनर्मूल्यांकन कराया जाता है।

विद्यालयों की पेयरिंग को लेकर मंत्री ने कहा कि सरकार ने किसी भी विद्यालय को बंद नहीं किया है। कम नामांकन वाले विद्यालयों को संसाधनों के बेहतर उपयोग हेतु आपस में जोड़ा गया है, जिसमें प्राथमिक विद्यालयों के लिए एक किलोमीटर और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए तीन किलोमीटर की सीमा तय की गई है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप है।

मंत्री ने बताया कि पेयरिंग के बाद रिक्त भवनों में बालवाटिकाएं संचालित की जा रही हैं। डिजिटल शिक्षा को विस्तार देते हुए अब तक 32 हजार विद्यालयों को स्मार्ट क्लास की सुविधा संचालित हैं। लगभग 65 प्रतिशत विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके साथ ही सीएम मॉडल कम्पोजिट स्कूल योजना के अंतर्गत लगभग 150 स्कूलों के निर्माण पर 4,500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

उन्होंने दोहराया कि सरकार का संकल्प है कि गांव, गरीब, किसान और मध्यम वर्ग के किसी भी बच्चे के भविष्य के साथ समझौता नहीं होगा और हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

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