यूपी पुलिस पर गंभीर आरोप- आगरा में हत्या कबूल कराने के लिए निर्दोष को थर्ड डिग्री, बिजनौर में चार मौतों के बाद सबूतों से छेड़छाड़ का दावा। 

उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली पर दो अलग-अलग घटनाओं ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगरा जिले के किरावली थाना क्षेत्र में

Dec 25, 2025 - 14:22
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यूपी पुलिस पर गंभीर आरोप- आगरा में हत्या कबूल कराने के लिए निर्दोष को थर्ड डिग्री, बिजनौर में चार मौतों के बाद सबूतों से छेड़छाड़ का दावा। 
यूपी पुलिस पर गंभीर आरोप- आगरा में हत्या कबूल कराने के लिए निर्दोष को थर्ड डिग्री, बिजनौर में चार मौतों के बाद सबूतों से छेड़छाड़ का दावा। 

उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली पर दो अलग-अलग घटनाओं ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगरा जिले के किरावली थाना क्षेत्र में एक हत्या के पुराने मामले की जांच के दौरान पुलिस पर एक निर्दोष व्यक्ति को जबरन अपराध कबूल कराने के लिए थर्ड डिग्री टॉर्चर देने का आरोप लगा है, जबकि बिजनौर जिले के नांगल थाना क्षेत्र में एक सड़क हादसे में चार लोगों की मौत के बाद अवैध खनन को छिपाने और आरोपी को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ करने का दावा सामने आया है। ये दोनों घटनाएं पुलिस की जांच प्रक्रिया और पारदर्शिता पर बड़ा संदेह पैदा कर रही हैं। आगरा की घटना किरावली थाने से जुड़ी है, जहां 5 अगस्त को करहारा गांव में पूर्व फौजी बनवीर सिंह की हत्या हुई थी। इस मामले में पुलिस दबाव में थी और जल्द सुलझाने के लिए शॉर्टकट अपनाने का आरोप है। पीड़ित 42 वर्षीय राजू शर्मा, जो एक किसान हैं, को उनके पिता और भाई के साथ 20 दिसंबर को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया। राजू का आरोप है कि थाने की छत पर ले जाकर उन्हें उल्टा लटकाया गया और दोनों पैरों पर डंडों से इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उनकी हड्डियां टूट गईं। पिटाई के दौरान कई डंडे टूट गए और राजू बेहोश हो गए। पुलिस ने उन्हें परिवार को सूचना दिए बिना थाने के पीछे के गेट से अस्पताल में भर्ती कराया। अगले दिन परिवार को मामले की जानकारी हुई और उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने कबूलनामा लेने के लिए यह यातना दी। राजू के दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गया और वे प्लास्टर में हैं। मेडिकल रिपोर्ट में चोटों और सूजन की पुष्टि हुई है।

मामला सामने आने के बाद आगरा पुलिस कमिश्नर ने त्वरित कार्रवाई की। सहायक पुलिस आयुक्त को पद से हटा दिया गया, जबकि थानाध्यक्ष, सब इंस्पेक्टर और एक सिपाही को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। आरोपियों के खिलाफ यदि शिकायत मिली तो मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा। यह घटना पुलिस हिरासत में मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बन गई है, जहां पूछताछ के नाम पर अमानवीय व्यवहार किया गया। राजू ने बताया कि बेहोशी की हालत में उनसे जबरन अपराध कबूल कराने की कोशिश की गई। परिवार ने पुलिस पर मामले को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया, क्योंकि शुरू में उन्होंने मदद के नाम पर पैसे देने की पेशकश की। दूसरी घटना बिजनौर जिले की है, जहां नांगल थाना क्षेत्र में हरिद्वार रोड पर 21 दिसंबर की रात एक भयानक सड़क हादसा हुआ। घने कोहरे के कारण एक क्रेटा कार मिट्टी से लदे डंपर से टकरा गई, जिसमें कार सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान कारी इकबाल, अशफाक, एहतेशाम और सलाउद्दीन के रूप में हुई, जो एक धार्मिक कार्यक्रम से लौट रहे थे। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और शवों को बाहर निकालने के लिए कार काटनी पड़ी। हादसे का मुख्य कारण कोहरा और तेज रफ्तार बताया गया।

लेकिन इस हादसे के बाद आरोप लगा कि पुलिस ने अवैध खनन को छिपाने और डंपर चालक को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ की। डंपर मिट्टी से लदा था, जो अवैध खनन की ओर इशारा करता है। दावा है कि पुलिस ने घटनास्थल पर सबूतों को बदलने या मिटाने की कोशिश की, ताकि अवैध खनन का मामला सामने न आए और आरोपी डंपर चालक को फायदा पहुंचे। इस आरोप ने पुलिस की मिलीभगत पर सवाल उठाए हैं। हादसे में चार परिवारों को अपूरणीय क्षति हुई, लेकिन पुलिस की भूमिका पर उठे सवालों ने मामले को और जटिल बना दिया है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और जांच शुरू की, लेकिन सबूत छेड़छाड़ के दावे ने जांच की निष्पक्षता पर संदेह पैदा कर दिया। ये दोनों घटनाएं उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर गहरा असर डाल रही हैं। आगरा में हिरासत में यातना और बिजनौर में सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप कानून के रखवालों की विश्वसनीयता को चुनौती दे रहे हैं। आगरा मामले में निलंबन और जांच से कुछ कार्रवाई हुई है, लेकिन बिजनौर में सबूत मिटाने के दावे पर अभी स्पष्ट कार्रवाई की जानकारी नहीं है। दोनों मामलों में पुलिस पर दबाव में गलत तरीके अपनाने के आरोप हैं, जो जांच की पारदर्शिता और न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं।

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