कोयंबटूर के पेरिया कडई पुलिस स्टेशन में संदिग्ध आत्महत्या- सुरक्षा मांगने आए राजन की लाश मिली, मजिस्ट्रेट जांच शुरू। 

तमिलनाडु के कोयंबटूर में 05 अगस्त 2025 की रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब पेरिया कडई (बाजार स्ट्रीट) पुलिस स्टेशन में एक व्यक्ति ...

Aug 7, 2025 - 14:49
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कोयंबटूर के पेरिया कडई पुलिस स्टेशन में संदिग्ध आत्महत्या- सुरक्षा मांगने आए राजन की लाश मिली, मजिस्ट्रेट जांच शुरू। 
कोयंबटूर के पेरिया कडई पुलिस स्टेशन में संदिग्ध आत्महत्या- सुरक्षा मांगने आए राजन की लाश मिली, मजिस्ट्रेट जांच शुरू। 

तमिलनाडु के कोयंबटूर में 05 अगस्त 2025 की रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब पेरिया कडई (बाजार स्ट्रीट) पुलिस स्टेशन में एक व्यक्ति की संदिग्ध आत्महत्या का मामला सामने आया। मृतक की पहचान 60 वर्षीय ए. राजन के रूप में हुई, जो समीचेट्टिपालयम के कमराज नगर का निवासी था। राजन मंगलवार रात करीब 11 बजे पुलिस स्टेशन पहुंचा था और उसने दावा किया कि कुछ लोग उसका पीछा कर रहे हैं। वहां तैनात सिपाही ने उसे सुबह वापस आने को कहा, लेकिन राजन स्टेशन के अंदर ही रुक गया और बिना किसी की जानकारी के क्राइम सब-इंस्पेक्टर के कमरे में चला गया। अगली सुबह, जब कमरा खोला गया, तो राजन की लाश पंखे से लटकी मिली। कोयंबटूर शहर पुलिस आयुक्त ए. सरवण सुंदर ने इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच और सहायक आयुक्त स्तर की जांच शुरू करने के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की बात कही है।

यह घटना कोयंबटूर के बाजार स्ट्रीट (पेरिया कडई) पुलिस स्टेशन में 05 अगस्त 2025 की रात हुई। राजन, जो समीचेट्टिपालयम के कमराज नगर का निवासी था, रात 11:19 बजे पुलिस स्टेशन पहुंचा। उसने सिपाही सेंथिल कुमार, जो उस समय ड्यूटी पर था, से कहा कि 25 लोगों का एक समूह उसका पीछा कर रहा है और उसकी जान को खतरा है। सेंथिल कुमार ने बाहर जांच की और जब कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं दिखी, तो उन्होंने राजन को सुबह वापस आने को कहा।

पुलिस के अनुसार, सेंथिल कुमार उस समय एक आधिकारिक कॉल पर व्यस्त हो गए, और इस दौरान राजन स्टेशन के अंदर सीढ़ियों के रास्ते से क्राइम सब-इंस्पेक्टर के कमरे में चला गया। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि राजन रात 11:04 बजे टाउन हॉल पुलिस चौकी पर पहुंचा था, जहां वह 10 मिनट रुका। इसके बाद वह पोधी कॉर्नर की ओर भागता हुआ दिखा और फिर बाजार स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचा।

06 अगस्त 2025 की सुबह, जब सब-इंस्पेक्टर नागराज अपने कमरे में पहुंचे, तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। कई बार खटखटाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला, तो दरवाजा तोड़ा गया। अंदर राजन की लाश पंखे से उसकी वेश्ती (लुंगी) के सहारे लटकी मिली। पुलिस ने तुरंत फॉरेंसिक विशेषज्ञों, फोटोग्राफी विशेषज्ञों, और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों को मौके पर बुलाया। राजन का शव कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।

  • राजन की पहचान और मानसिक स्थिति

पुलिस ने राजन की जेब में मिली एक डायरी के आधार पर उसकी पहचान की। वह अविवाहित था और अपनी बड़ी बहन वीरमणि और बुजुर्ग मां के साथ रहता था। वह सेंट्रिंग एजेंट के रूप में काम करता था। राजन की बहन ने पुलिस को बताया कि पिछले 10 दिनों से उसका व्यवहार असामान्य था और वह बार-बार कहता था कि 10-20 लोग उसका पीछा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह शराब का आदी था और हाल के दिनों में मानसिक रूप से अस्थिर था।

पुलिस आयुक्त सरवण सुंदर ने बताया कि राजन ने घटना से पहले मंगलवार सुबह एक मजिस्ट्रेट से भी संपर्क किया था और दावा किया था कि कुछ लोग उसका पीछा कर रहे हैं। मजिस्ट्रेट ने पेरूर पुलिस को इसकी जांच करने का निर्देश दिया था, क्योंकि राजन पेरूर पुलिस स्टेशन के दायरे में रहता था।

सीसीटीवी फुटेज ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फुटेज में दिखा कि राजन एक निजी बस से प्रकाशम बस स्टॉप पर उतरा, टाउन हॉल पुलिस चौकी पर रुका, और फिर पोधी कॉर्नर की ओर भागता हुआ पुलिस स्टेशन पहुंचा। फुटेज में यह भी दिखा कि उसने सिपाही सेंथिल कुमार से बात की, जिसके बाद वह स्टेशन के अंदर चला गया।

पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यह मामला "लॉक-अप डेथ" नहीं है, क्योंकि राजन को हिरासत में नहीं लिया गया था। वह स्वेच्छा से पुलिस स्टेशन में घुसा और आत्महत्या कर ली। फिर भी, इस घटना ने पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। आयुक्त ने कहा, "मजिस्ट्रेट इस मामले की जांच करेंगे, और सहायक आयुक्त के नेतृत्व में एक अलग जांच शुरू की गई है। लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।"

पुलिस ने सिपाही सेंथिल कुमार और सब-इंस्पेक्टर नागराज को सशस्त्र रिजर्व में स्थानांतरित कर दिया है। आयुक्त ने यह भी बताया कि राजन का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है, लेकिन उसकी पृष्ठभूमि की जांच की जा रही है।

इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजन बिना किसी की नजर में आए पुलिस स्टेशन के अंदर कैसे घुस गया और उसने क्राइम सब-इंस्पेक्टर के कमरे में आत्महत्या कैसे कर ली। पुलिस स्टेशन में केवल एक सिपाही की मौजूदगी और सीसीटीवी की निगरानी में कमी ने इस घटना को और गंभीर बना दिया।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। एक X पोस्ट में लिखा गया, "पुलिस स्टेशन में कोई सुरक्षा मांगने आए और उसकी लाश मिले, यह शर्मनाक है। पुलिस की लापरवाही की पूरी जांच होनी चाहिए।" कुछ लोगों ने इसे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से भी जोड़ा और कहा कि राजन को समय पर मदद मिलती, तो शायद यह घटना टल सकती थी।

राजन की मानसिक अस्थिरता इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू है। उसकी बहन और परिवार ने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से तनाव में था और उसे लगता था कि लोग उसका पीछा कर रहे हैं। यह संभवतः भ्रम (हैलुसिनेशन) का लक्षण था। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए तमिलनाडु में उचित परामर्श और सहायता सेवाओं की कमी है।

सामाजिक कार्यकर्ता रम्या कन्नन ने कहा, "यह घटना पुलिस की लापरवाही के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को भी उजागर करती है। अगर राजन को समय पर काउंसलिंग या मदद मिलती, तो शायद वह इस कदम तक नहीं पहुंचता।" उन्होंने सरकार से मांग की कि मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन और परामर्श केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए।

पुलिस आयुक्त सरवण सुंदर ने इस घटना को दुखद बताया और कहा कि यह पुलिस स्टेशन में हुई आत्महत्या है, न कि हिरासत में मौत। उन्होंने कहा, "हम सीसीटीवी फुटेज की पूरी जांच कर रहे हैं। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। अगर किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही पाई गई, तो सख्त कार्रवाई होगी।"

तमिलनाडु सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। मजिस्ट्रेट जांच के अलावा, सहायक आयुक्त स्तर की जांच यह पता लगाएगी कि पुलिस स्टेशन में सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई। सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

पेरिया कडई पुलिस स्टेशन में राजन की संदिग्ध आत्महत्या ने पुलिस की लापरवाही और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को सामने लाया है। राजन, जो सुरक्षा मांगने पुलिस स्टेशन पहुंचा था, की मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं। सीसीटीवी फुटेज और परिवार के बयानों से पता चला कि वह मानसिक रूप से अस्थिर था और उसे समय पर मदद नहीं मिली। पुलिस ने मजिस्ट्रेट और सहायक आयुक्त स्तर की जांच शुरू की है, और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की बात कही है।

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