ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों की जरूरत नहीं, पारंपरिक हमले ही काफी।

वाशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे मौजूदा तनाव पर

Apr 25, 2026 - 13:20
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ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों की जरूरत नहीं, पारंपरिक हमले ही काफी।
ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों की जरूरत नहीं, पारंपरिक हमले ही काफी।
  • 'परमाणु हथियार किसी को इस्तेमाल नहीं करने चाहिए': व्हाइट हाउस में ट्रंप ने दुनिया को दिया शांति और संयम का संदेश
  • ईरान संकट पर अमेरिका का रुख स्पष्ट: पारंपरिक हथियारों से तेहरान को पहुंचाया भारी नुकसान, परमाणु विकल्प को बताया अनावश्यक

वाशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे मौजूदा तनाव पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनने वाला बयान दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका ने अपने पारंपरिक हथियारों के माध्यम से ही ईरान के सैन्य और रणनीतिक ढांचे को इतना नुकसान पहुंचा दिया है कि अब किसी भी प्रकार के परमाणु हथियार के इस्तेमाल की कोई आवश्यकता शेष नहीं रह गई है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु युद्ध की संभावनाओं को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में यह विश्वास व्यक्त किया कि अमेरिका की पारंपरिक सैन्य शक्ति किसी भी शत्रु को घुटने टेकने पर मजबूर करने के लिए पर्याप्त है। ट्रंप ने न केवल ईरान के संदर्भ में बल्कि व्यापक वैश्विक परिप्रेक्ष्य में परमाणु हथियारों के उपयोग पर अपनी असहमति जताई। उन्होंने जोर देकर कहा कि परमाणु हथियार इतने विनाशकारी होते हैं कि उनका इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में किसी के द्वारा भी नहीं किया जाना चाहिए। यह बयान ट्रंप की उस छवि से थोड़ा अलग नजर आता है जिसमें वे अक्सर कड़े और आक्रामक फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने वैश्विक शांति की वकालत करते हुए कहा कि मानवता के हित में यह आवश्यक है कि इन घातक हथियारों को केवल निवारक (deterrent) के रूप में ही देखा जाए, न कि सक्रिय युद्ध के औजार के रूप में। राष्ट्रपति का यह रुख दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों के लिए एक संकेत है कि अमेरिका तनाव कम करने की दिशा में भी विचार कर सकता है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' के तहत अमेरिकी सेना ने हाल के हफ्तों में ईरान के मिसाइल ठिकानों, नौसेना के बेड़े और हवाई सुरक्षा प्रणालियों पर सटीक और घातक हमले किए हैं। इन पारंपरिक हमलों ने ईरान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को काफी हद तक सीमित कर दिया है, जिससे युद्ध का पलड़ा स्पष्ट रूप से अमेरिका के पक्ष में झुक गया है।

ईरान की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा करते हुए ट्रंप ने बताया कि तेहरान अब भारी दबाव में है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति अब उस स्तर पर नहीं रही जहां वह अमेरिका या उसके सहयोगियों के लिए कोई बड़ा खतरा पैदा कर सके। ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अब बहुत कम विकल्प बचे हैं और समय उनके हाथ से निकलता जा रहा है। राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है, और इसके लिए वे सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर अपना दबाव बनाए रखेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि अगर ईरान बातचीत की मेज पर आता है, तो अमेरिका एक 'स्थायी और बेहतर' सौदे के लिए तैयार है, लेकिन तब तक सैन्य विकल्प खुले रहेंगे। क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी ट्रंप ने बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस जलक्षेत्र पर अमेरिका का 'पूर्ण नियंत्रण' है और इसे रणनीतिक रूप से बंद रखा गया है ताकि ईरान की तेल आय पर रोक लगाई जा सके। ट्रंप का तर्क है कि जब तक ईरान अपनी क्षेत्रीय गतिविधियों और आतंकवाद के वित्तपोषण को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक उसे तेल बेचकर प्रतिदिन करोड़ों डॉलर कमाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी बताया कि कई तेल टैंकर और जहाज अब वैकल्पिक रास्तों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।

डिप्लोमेसी और भविष्य की रणनीति पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे किसी भी समझौते के लिए जल्दबाजी में नहीं हैं। उन्होंने वियतनाम और इराक जैसे लंबे युद्धों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे अमेरिका को ऐसे किसी लंबे संघर्ष में नहीं झोंकना चाहते, बल्कि वे प्रभावी और निर्णायक परिणाम चाहते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उनके प्रशासन ने मात्र कुछ हफ्तों में ही वह हासिल कर लिया है जो अन्य सरकारें वर्षों में नहीं कर पातीं। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था वर्तमान में बहुत मजबूत है और उनके पास पर्याप्त तेल भंडार है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली अस्थिरता से अमेरिका को अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। मानवीय पहलुओं पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया कि उनके हस्तक्षेप के बाद ईरान ने कुछ महिलाओं को दी जाने वाली मृत्युदंड की सजा पर रोक लगा दी है। उन्होंने इसे एक 'नैतिक अनुरोध' बताया जिसे ईरान ने स्वीकार किया। राष्ट्रपति के अनुसार, यह इस बात का सबूत है कि ईरान अब अमेरिकी प्रभाव और दबाव को गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने यह भी शर्त रखी कि भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते में ईरान को हिजबुल्ला और अन्य प्रॉक्सी समूहों को दी जाने वाली फंडिंग पूरी तरह बंद करनी होगी। ट्रंप का मानना है कि मध्य पूर्व में शांति तभी संभव है जब ईरान अपनी विस्तारवादी नीतियों को छोड़कर एक सामान्य राष्ट्र की तरह व्यवहार करना शुरू करे।

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