Special : बिहार की राजनीति में नया सवेरा: 18 साल बाद मिला 'विधायक' मुख्यमंत्री, सम्राट चौधरी के नाम दर्ज हुआ ऐतिहासिक रिकॉर्ड।
बिहार की सत्ता के गलियारों में 24 अप्रैल 2026 की तारीख एक बड़े राजनीतिक बदलाव की गवाह बनी। पिछले करीब दो दशकों से बिहार की
- बहुमत परीक्षण में सम्राट चौधरी का शक्ति प्रदर्शन: 202 विधायकों के समर्थन के साथ बदला सत्ता का समीकरण, विपक्ष हुआ पस्त
- नीतीश युग के बाद सम्राट की 'ताजपोशी': भाजपा के पहले मुख्यमंत्री ने विधानसभा में पेश किया विश्वास मत, विकास के नए लक्ष्यों का किया ऐलान
By Saurabh Singh(News Editor- Senior Journalist)
बिहार की सत्ता के गलियारों में 24 अप्रैल 2026 की तारीख एक बड़े राजनीतिक बदलाव की गवाह बनी। पिछले करीब दो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद, भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता सम्राट चौधरी ने राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाली। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार को 18 साल बाद ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जो सीधे विधानसभा का सदस्य (विधायक) है। इससे पहले नीतीश कुमार लंबे समय तक विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) रहते हुए मुख्यमंत्री का पद संभालते रहे थे। सम्राट चौधरी ने विधानसभा के विशेष सत्र में विश्वास मत पेश किया, जहां सत्ता पक्ष की ओर से भारी समर्थन और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच बिहार की राजनीति का एक नया अध्याय शुरू हुआ। सम्राट चौधरी द्वारा पेश किया गया विश्वास मत न केवल उनकी सरकार की स्थिरता का प्रमाण था, बल्कि यह राज्य में भाजपा के बढ़ते कद का भी प्रतीक था। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में सम्राट चौधरी की सरकार को 202 विधायकों का भारी समर्थन प्राप्त हुआ, जबकि विपक्ष के पास मात्र 41 विधायक ही रह गए थे। सदन में ध्वनि मत के माध्यम से विश्वास प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके बाद सम्राट चौधरी ने आधिकारिक रूप से अपनी बहुमत शक्ति का प्रदर्शन किया। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद भाजपा ने पहली बार अपने दम पर मुख्यमंत्री पद के लिए सम्राट चौधरी को चुना, जो वर्तमान में तारापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। इस घटनाक्रम ने बिहार में 'किंगमेकर' की भूमिका निभाने वाली भाजपा को अब 'किंग' की भूमिका में लाकर खड़ा कर दिया है। बिहार के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा है। 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद हुए इस बड़े बदलाव ने एनडीए गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है, जहां अब भाजपा बड़े भाई की भूमिका में स्पष्ट रूप से नजर आ रही है।
विधानसभा में अपने पहले संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विकास और सुशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार नीतीश कुमार द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों को न केवल जारी रखेगी, बल्कि उन्हें और अधिक गति प्रदान करेगी। सम्राट चौधरी ने अगले एक वर्ष के भीतर राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है, जो बिहार की आर्थिक स्थिति को बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम माना जा रहा है। उन्होंने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) अब सीधे प्रखंडों, थानों और अंचलों के कामकाज की निगरानी करेगा ताकि आम जनता को सरकारी सुविधाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिल सके। विपक्ष की ओर से राजद नेता तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए राज्य में बार-बार सरकार बदलने और राजनीतिक अस्थिरता पर सवाल उठाए। तेजस्वी यादव ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में बिहार ने पांच सरकारें देखी हैं, जिससे राज्य के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हालांकि, सम्राट चौधरी ने अपने जवाब में इसे स्थिरता की शुरुआत बताया और दावा किया कि 14 करोड़ बिहारियों का विश्वास उनके साथ है। सदन के भीतर हुई इस बहस ने यह साफ कर दिया कि आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। सम्राट चौधरी की रणनीति अब राज्य के युवाओं और मध्यम वर्ग को साधने की है, जिसके लिए उन्होंने रोजगार और कौशल विकास के नए कार्यक्रमों की घोषणा की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार में एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है। सम्राट चौधरी जो कभी राबड़ी देवी की सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे, आज भाजपा के सबसे शक्तिशाली चेहरे के रूप में उभरे हैं। उनकी नियुक्ति से ओबीसी (OBC) समुदायों, विशेष रूप से कुशवाहा समाज के बीच भाजपा की पकड़ और मजबूत होने की संभावना है। 15 अप्रैल 2026 को शपथ लेने के बाद से ही सम्राट चौधरी लगातार सक्रिय रहे हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बिहार के विशेष पैकेज और विकास योजनाओं पर चर्चा की है। विश्वास मत जीतने के बाद अब वे पूरी तरह से स्वतंत्र होकर अपने एजेंडे पर काम कर सकेंगे। सम्राट चौधरी की नई कैबिनेट में विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव जैसे अनुभवी नेताओं को उपमुख्यमंत्री के रूप में शामिल किया गया है, जो एनडीए के भीतर सामंजस्य बनाए रखने में मदद करेंगे। सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क बुनियादी ढांचे को शीर्ष पर रखा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे 'विकसित बिहार' के सपने को पूरा करने के लिए किसी भी प्रकार के कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटेंगे। विश्वास मत के दौरान सदन ने महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष के रुख की निंदा करने वाला एक प्रस्ताव भी पारित किया, जिसने सदन के भीतर राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्मा दिया।
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