नशे के सौदागरों पर चला कानून का डंडा: गुजरात में 384 करोड़ की हेरोइन तस्करी के दोषी 6 पाकिस्तानियों को उम्रकैद जैसी सजा।

गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले की एक विशेष अदालत ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक नजीर पेश करते हुए छह पाकिस्तानी

Apr 25, 2026 - 13:13
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नशे के सौदागरों पर चला कानून का डंडा: गुजरात में 384 करोड़ की हेरोइन तस्करी के दोषी 6 पाकिस्तानियों को उम्रकैद जैसी सजा।
नशे के सौदागरों पर चला कानून का डंडा: गुजरात में 384 करोड़ की हेरोइन तस्करी के दोषी 6 पाकिस्तानियों को उम्रकैद जैसी सजा।
  • देवभूमि द्वारका कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: समुद्री रास्ते से ड्रग्स भेजने वाले पाकिस्तानी तस्करों को मिली 20-20 साल की जेल
  • अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट को बड़ा झटका: गुजरात तट पर पकड़ी गई 384 करोड़ की हेरोइन मामले में दोषियों पर भारी जुर्माना और लंबी कैद

गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले की एक विशेष अदालत ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक नजीर पेश करते हुए छह पाकिस्तानी नागरिकों को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला 384 करोड़ रुपये मूल्य की हेरोइन की अवैध तस्करी से जुड़ा है, जिसे भारतीय तटरक्षक बल और गुजरात एटीएस ने एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान समुद्र के बीचों-बीच पकड़ा था। न्यायाधीश ने दोषियों को न केवल लंबी जेल की सजा सुनाई, बल्कि प्रत्येक पर भारी जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इस प्रकार की गतिविधियां देश की सुरक्षा और युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा हैं, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों के तस्करों के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो यह घटना वर्ष 2022 की है, जब सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला था कि पाकिस्तानी नाव 'अल नोमान' के जरिए नशीले पदार्थों की एक बड़ी खेप भारतीय समुद्री सीमा में प्रवेश करने वाली है। इसके बाद, जखाऊ तट के पास एक साहसिक ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें तस्करों ने पकड़े जाने के डर से भागने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जांबाजों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। नाव की सघन तलाशी के दौरान करीब 77 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 384 करोड़ रुपये आंकी गई थी। नाव पर सवार सभी छह पाकिस्तानी चालक दल के सदस्यों को एनडीपीएस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था, जिनके खिलाफ लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब सजा का ऐलान किया गया है। अदालती कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए, जिनसे यह साबित हुआ कि आरोपी जानबूझकर और एक बड़ी साजिश के तहत भारतीय सीमा में ड्रग्स की सप्लाई करने की कोशिश कर रहे थे। पकड़े गए तस्करों की पहचान मोहसिन, असगर, मोहम्मद अली, जुबेर, सलीम और इमरान के रूप में हुई थी।

सजा सुनाते समय अदालत ने टिप्पणी की कि नशीले पदार्थों की तस्करी एक संगठित अपराध है जो देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को खोखला कर देता है। दोषियों को सुनाई गई 20 साल की जेल की सजा उनके द्वारा किए गए अपराध की गंभीरता को दर्शाती है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर उन्हें अतिरिक्त समय के लिए जेल में रहना होगा, जो इस मामले की कठोरता को और अधिक बल देता है। गुजरात की लंबी समुद्री सीमा अक्सर अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के निशाने पर रहती है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय तटरक्षक बल (ICG), एटीएस और एनसीबी ने मिलकर हजारों करोड़ रुपये के मादक पदार्थ जब्त किए हैं। पाकिस्तान से संचालित होने वाले ये गिरोह अक्सर मछुआरों की नावों का सहारा लेकर भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। इस सफलता के बाद तटीय सुरक्षा को और अधिक आधुनिक रडार प्रणालियों और ड्रोन सर्विलांस से लैस करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

जांच एजेंसियों ने इस मामले में यह भी पता लगाया था कि यह खेप पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से चली थी और इसे भारत के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर पंजाब और दिल्ली में सप्लाई किया जाना था। जांच के दौरान कुछ स्थानीय संपर्कों के नाम भी सामने आए थे, जिन्हें बाद में गिरफ्तार किया गया। सजा पाए छह पाकिस्तानी नागरिक केवल इस सिंडिकेट के प्यादे थे, लेकिन उनके माध्यम से सुरक्षा एजेंसियों को इस अवैध व्यापार के संचालन के तरीकों की महत्वपूर्ण जानकारी मिली। गुजरात एटीएस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल करते समय सैटेलाइट फोन के डेटा और आरोपियों के पास से मिले अन्य तकनीकी उपकरणों को मुख्य आधार बनाया था, जिससे उनकी लोकेशन और पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ उनके संपर्क प्रमाणित हुए। नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय और कड़ी सजा अपराधियों के मन में डर पैदा करने के लिए जरूरी है। भारत सरकार की 'ड्रग फ्री इंडिया' मुहीम के तहत यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। गुजरात के गृह विभाग ने भी इस सफल ऑपरेशन और उसके बाद आए अदालती फैसले की सराहना की है। एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से विदेशी धरती से भारत के खिलाफ रची जा रही ड्रग-टेरर की साजिशों को कमजोर करने में मदद मिलेगी। दोषियों को अब गुजरात की एक उच्च सुरक्षा वाली जेल में स्थानांतरित किया जाएगा, जहां वे अपनी सजा काटेंगे। गौरतलब है कि हाल के दिनों में समुद्री मार्ग के जरिए नशीली दवाओं की आवाजाही में वृद्धि देखी गई है, जिसे रोकने के लिए 'ऑपरेशन समुद्रगुप्त' जैसे विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इस 384 करोड़ रुपये की हेरोइन जब्ती मामले में आया यह परिणाम सुरक्षा एजेंसियों के मनोबल को बढ़ाने वाला है। यह मामला न केवल अवैध व्यापार को रोकने का है, बल्कि उन ताकतों को जवाब देने का भी है जो भारत में अस्थिरता पैदा करने के लिए नशीले पदार्थों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। अदालत ने अपने आदेश की प्रति संबंधित दूतावास और उच्चाधिकारियों को भी भेजने का निर्देश दिया है ताकि इस सजा की जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी साझा की जा सके।

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