सातारा के मलकापुर में गणेशोत्सव की अनोखी पहल- 500 छात्रों ने मानव श्रृंखला से बनाई गणपति की भव्य प्रतिकृति।
महाराष्ट्र के सातारा जिले के कराड तालुका में मलकापुर कस्बे ने इस साल गणेशोत्सव को एक अनोखे और प्रेरणादायक अंदाज में मनाया। 27 अगस्त 2025 को श्री मलाइ देवी शिक्षा
महाराष्ट्र के सातारा जिले के कराड तालुका में मलकापुर कस्बे ने इस साल गणेशोत्सव को एक अनोखे और प्रेरणादायक अंदाज में मनाया। 27 अगस्त 2025 को श्री मलाइ देवी शिक्षा संस्थान के आनंदराव चव्हाण विद्यालय के लगभग 500 छात्रों ने मिलकर विद्यालय के प्रांगण में मानव श्रृंखला बनाई और भगवान गणेश की भव्य प्रतिकृति तैयार की। इस आयोजन ने न केवल स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में इसकी चर्चा हुई। यह कार्यक्रम छात्रों की एकता, रचनात्मकता, और भक्ति का शानदार उदाहरण बना।
मलकापुर, जो कराड शहर से 6 किलोमीटर दक्षिण में राष्ट्रीय राजमार्ग 4 के किनारे बसा है, अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। गणेश चतुर्थी, महाराष्ट्र का सबसे बड़ा त्योहार, यहां हर साल उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार आनंदराव चव्हाण विद्यालय ने गणेशोत्सव को खास बनाने के लिए एक अनोखी पहल की। स्कूल के प्रांगण में सुबह 8 बजे से छात्रों ने इस आयोजन की तैयारी शुरू की। विद्यालय के अध्यक्ष अशोक राव थोरात और शिक्षकों के मार्गदर्शन में छात्रों ने अनुशासित तरीके से मानव श्रृंखला बनाई। इस श्रृंखला में 500 छात्रों ने हिस्सा लिया, जिनमें कक्षा 5 से 12 तक के बच्चे शामिल थे।
इस मानव श्रृंखला को बनाने के लिए छात्रों ने पहले मैदान में गणपति की आकृति का खाका तैयार किया। शिक्षकों ने छात्रों को समूहों में बांटा और प्रत्येक समूह को आकृति का एक हिस्सा बनाने की जिम्मेदारी दी गई। गणपति की मूर्ति की आकृति में उनका विशाल सिर, सूंड, बड़े कान, और पारंपरिक आभूषण शामिल थे। छात्रों ने रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर और हाथ में गणेशोत्सव से जुड़े प्रतीक (जैसे मोदक और कमल) पकड़कर इस आकृति को जीवंत किया। लगभग तीन घंटे की मेहनत के बाद यह भव्य प्रतिकृति तैयार हुई, जिसकी ऊंचाई और चौड़ाई इतनी थी कि इसे दूर से देखा जा सकता था। इस दृश्य को देखने के लिए मलकापुर और आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग पहुंचे।
इस आयोजन की खास बात यह थी कि इसे पूरी तरह से छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर बिना किसी बाहरी मदद के पूरा किया। विद्यालय के प्राचार्य अनिल पाटील ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य छात्रों में एकता, अनुशासन, और भक्ति की भावना को बढ़ावा देना था। उन्होंने कहा, “हम चाहते थे कि बच्चे गणेशोत्सव को सिर्फ एक त्योहार के रूप में न देखें, बल्कि इसके पीछे की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावना को समझें।” छात्रों ने भी इस आयोजन में उत्साह दिखाया। दसवीं कक्षा की छात्रा प्रिया जाधव ने कहा, “हमने पहली बार इतने बड़े स्तर पर ऐसा कुछ किया। गणपति बप्पा की यह आकृति बनाकर हमें बहुत खुशी हुई।”
स्थानीय लोगों ने इस पहल की खूब तारीफ की। मलकापुर के व्यापारी संजय पाटील ने कहा, “यह नजारा देखकर गर्व हुआ। बच्चों ने इतने सुंदर तरीके से गणपति की मूर्ति बनाई कि हर कोई हैरान रह गया।” इस आयोजन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ, जिसमें छात्रों की मानव श्रृंखला और गणपति की आकृति साफ दिखाई दे रही थी। एक एक्स पोस्ट में लिखा गया, “मलकापुर के बच्चों ने गणेशोत्सव को यादगार बना दिया। यह एकता और रचनात्मकता का शानदार उदाहरण है।” इस वीडियो को हजारों लोगों ने देखा और साझा किया।
आनंदराव चव्हाण विद्यालय पहले भी अपने सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। यह स्कूल मलकापुर में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है। गणेशोत्सव के अलावा, स्कूल हर साल स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, और पर्यावरण दिवस जैसे अवसरों पर अनोखे कार्यक्रम आयोजित करता है। पिछले साल स्कूल ने ‘इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव’ पर जोर दिया था, जिसमें मिट्टी की मूर्तियों और पर्यावरण के अनुकूल सजावट का इस्तेमाल किया गया था। इस बार की मानव श्रृंखला की पहल ने पूरे सातारा जिले में स्कूल की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया।
मलकापुर अपने आप में एक प्रगतिशील कस्बा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, यहां की आबादी 31,671 है, और साक्षरता दर 88.14% है, जो महाराष्ट्र के औसत 82.34% से अधिक है। यह कस्बा 24x7 पानी की आपूर्ति, सौर ऊर्जा परियोजना, और लड़कियों के लिए मुफ्त बस पास जैसी योजनाओं के लिए भी जाना जाता है। गणेशोत्सव जैसे त्योहार यहां सामुदायिक एकता को और मजबूत करते हैं। इस आयोजन में स्थानीय नगर पंचायत ने भी सहयोग दिया और सुरक्षा के लिए पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित की।
इस कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने न केवल गणपति की प्रतिकृति बनाई, बल्कि गणेश आरती और भक्ति गीत भी गाए। कुछ छात्रों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए, जो दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। मलकापुर के सिद्धिविनायक मंदिर के पुजारी रमेश शिंदे ने इस पहल की सराहना की और कहा, “यह आयोजन बच्चों में धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखने का एक शानदार तरीका है।”
View this post on Instagram
What's Your Reaction?











