कांवड़ यात्रा में अश्लील डांस पर अनुराधा पौड़वाल की नाराजगी- 'यह नॉनसेंस बंद कीजिए।
Sawan 2025: सावन मास में हर साल होने वाली कांवड़ यात्रा, जो भगवान शिव की भक्ति और आस्था का प्रतीक है, इस बार विवादों में घिर गई है। उत्तर प्रदेश के ...
सावन मास में हर साल होने वाली कांवड़ यात्रा, जो भगवान शिव की भक्ति और आस्था का प्रतीक है, इस बार विवादों में घिर गई है। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कांवड़ यात्रा के दौरान अश्लील डांस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसने श्रद्धालुओं और समाज के बीच नाराजगी की लहर पैदा कर दी। इस वीडियो में कुछ डांसर ट्रैक्टर पर अश्लील गानों पर नाचते हुए दिख रही हैं, और कांवड़िए उनके साथ झूमते नजर आए। इस घटना पर मशहूर भजन गायिका अनुराधा पौड़वाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “यह नॉनसेंस बंद कीजिए।” उन्होंने इस तरह की हरकतों को धार्मिक यात्रा की मर्यादा के खिलाफ बताया।
20 जुलाई, 2025 को बस्ती जिले में कांवड़ यात्रा के दौरान अयोध्या से जल लेकर लौट रहे एक कांवड़ समूह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में देखा गया कि एक ट्रैक्टर पर कुछ डांसर अश्लील गानों पर नाच रही थीं, और आसपास मौजूद कांवड़िए उनके साथ झूम रहे थे। यह यात्रा बस्ती के एक प्रमुख मार्ग पर हो रही थी, और वीडियो में भारी भीड़ दिखाई दी, जो इस प्रदर्शन को देख रही थी। वीडियो को देखकर कई लोगों ने इसे धार्मिक यात्रा की पवित्रता का अपमान बताया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से फैला, और यूजर्स ने इसकी कड़ी आलोचना की।
इस वीडियो को लेकर अनुराधा पौड़वाल ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “ये नॉनसेंस बंद करो प्लीज।” उनकी यह टिप्पणी 22 जुलाई, 2025 को उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा की गई, जिसके बाद यह मामला और चर्चा में आ गया। अनुराधा, जो अपनी भक्ति भजनों के लिए जानी जाती हैं, ने इस तरह की हरकतों को कांवड़ यात्रा की गरिमा के खिलाफ बताया और इसे तुरंत रोकने की मांग की।
कांवड़ यात्रा हिंदू धर्म में भगवान शिव की भक्ति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह यात्रा सावन मास में होती है, जो इस साल 11 जुलाई से 9 अगस्त, 2025 तक चली। इस दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, और गोमुख जैसे पवित्र स्थानों से गंगा जल लेकर अपने स्थानीय शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह यात्रा सुख, शांति, और समृद्धि लाती है, और श्रद्धालुओं के पाप नष्ट करती है।
कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु कठिन परिस्थितियों में सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं। इस दौरान मर्यादा और अनुशासन का पालन करना अपेक्षित होता है। यात्रा के दौरान भक्ति भजनों और शिव मंत्रों का जाप आम है, लेकिन हाल के वर्षों में डीजे और तेज संगीत का चलन बढ़ा है, जो कई बार विवाद का कारण बनता है। इस बार वायरल वीडियो ने इस चलन को और उजागर किया, जिसमें अश्लील गानों और डांस ने यात्रा की पवित्रता पर सवाल उठाए।
अनुराधा पौड़वाल, जिन्हें “भजन क्वीन” के रूप में जाना जाता है, ने अपनी टिप्पणी से इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया। 27 अक्टूबर, 1954 को जन्मी अनुराधा ने 1973 में फिल्म ‘अभिमान’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। वह 1980 और 1990 के दशक में बॉलीवुड की प्रमुख पार्श्व गायिका रहीं, और बाद में उन्होंने भक्ति भजनों पर ध्यान केंद्रित किया। उनकी आवाज ने टी-सीरीज़ के कई भजनों को अमर बना दिया। 2017 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया था।
अनुराधा ने अपने बयान में कहा कि कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजन में अश्लीलता की कोई जगह नहीं है। उन्होंने इसे “नॉनसेंस” करार देते हुए इस तरह की गतिविधियों को तुरंत रोकने की मांग की।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। एक यूजर ने लिखा, “यह भगवान शिव की भक्ति का अपमान है। कांवड़ यात्रा में इस तरह की हरकतें बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “यह यात्रा आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, न कि मनोरंजन का।”
कुछ यूजर्स ने प्रशासन से इस घटना की जांच करने और भविष्य में ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त नियम लागू करने की मांग की। हिंदू संगठनों ने भी इस वीडियो पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि कांवड़ यात्रा में इस तरह की हरकतें स्वीकार्य नहीं हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने अनुराधा पौड़वाल की टिप्पणी की सराहना की और इसे धार्मिक मर्यादा की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा के लिए सख्त नियम लागू किए हैं ताकि इसकी पवित्रता और व्यवस्था बनी रहे। इस साल, यात्रा के दौरान डीजे की ऊंचाई और चौड़ाई पर सीमा तय की गई थी, और रात 11 बजे के बाद डीजे चलाने पर रोक लगाई गई थी। इसके अलावा, आपत्तिजनक, भड़काऊ, या अश्लील गानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था।
उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ मार्ग पर खाद्य प्रतिष्ठानों के लिए क्यूआर कोड अनिवार्य किए हैं, ताकि उनकी पहचान और खाद्य लाइसेंस की जानकारी सत्यापित की जा सके। खुले में मांस और अंडा बेचने पर भी प्रतिबंध है। बस्ती की इस घटना के बाद, स्थानीय प्रशासन ने जांच शुरू करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी। कुछ हिंदू संगठनों ने मांग की है कि इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो।
हाल के वर्षों में, कांवड़ यात्रा में डीजे और तेज संगीत का चलन बढ़ा है, जो कई बार विवाद का कारण बनता है। कुछ कांवड़ समूह डीजे पर भक्ति भजनों के बजाय लोकप्रिय फिल्मी गाने या आपत्तिजनक गाने बजाते हैं, जो यात्रा की मर्यादा के खिलाफ माना जाता है। इस साल, 16 साल की एक महिला कांवड़िया लावण्या ने बीबीसी को बताया कि डीजे पर होने वाला अश्लील डांस उन्हें असहज करता है। उन्होंने कहा, “कई लोग गलत तरीके से डांस करते हैं, जिससे असहजता होती है।”
इसके बावजूद, कुछ कांवड़ियों का मानना है कि डीजे और डांस से यात्रा में उत्साह बढ़ता है। एक वायरल वीडियो में एक कांवड़िया ‘गणपति के पिताजी’ गाने पर नाचता दिखा, जिसे कुछ लोगों ने सराहा। लेकिन अधिकांश लोगों का मानना है कि धार्मिक यात्रा में मर्यादा का पालन करना जरूरी है, और अश्लीलता से बचना चाहिए।
इस घटना ने कांवड़ यात्रा की छवि पर असर डाला है। यह यात्रा लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है, और इस तरह की घटनाएं धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे हिंदू संस्कृति पर हमला बताया और मांग की कि भविष्य में ऐसी गतिविधियों को रोका जाए।
इस विवाद ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों को आधुनिक मनोरंजन के साथ जोड़ा जाना चाहिए। कुछ लोगों का मानना है कि डीजे और डांस जैसे तत्व युवाओं को यात्रा में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं, लेकिन इसे मर्यादित और भक्ति-केंद्रित रखना जरूरी है। अनुराधा पौड़वाल की टिप्पणी ने इस बहस को और हवा दी है, और समाज में धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है।
यह पहली बार नहीं है जब कांवड़ यात्रा विवादों में आई है। हाल ही में, बरेली में एक शिक्षक रजनीश गंगवार ने कांवड़ यात्रा पर एक कविता पढ़ी, जिसमें उन्होंने इसे अनावश्यक बताया। इस कविता पर हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई, और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसके अलावा, कुछ वीडियो गलत तरीके से रजनीश से जोड़े गए, जिनमें एक व्यक्ति डांस करता दिखा। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि वह वीडियो बुलंदशहर के गौरव कुमार का था, और इसका कांवड़ यात्रा से कोई संबंध नहीं था।
इन घटनाओं से पता चलता है कि कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में छोटी-छोटी बातें भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। सोशल मीडिया ने इन मुद्दों को और बढ़ावा दिया है, जिससे प्रशासन और आयोजकों पर नियमों को सख्त करने का दबाव बढ़ा है।
इस घटना ने कांवड़ यात्रा के आयोजन और प्रबंधन पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत को उजागर किया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि:
सख्त नियम लागू हों: डीजे और संगीत के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश हों, जिसमें केवल भक्ति गीतों को अनुमति दी जाए।
जागरूकता अभियान: कांवड़ियों को यात्रा की मर्यादा और नियमों के बारे में जागरूक किया जाए।
प्रशासन की निगरानी: यात्रा मार्ग पर नियमित जांच हो, ताकि अश्लीलता या अनुचित व्यवहार को तुरंत रोका जा सके।
सामुदायिक सहयोग: धार्मिक संगठनों और स्थानीय समुदायों को यात्रा की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
कांवड़ यात्रा में अश्लील डांस का वायरल वीडियो और अनुराधा पौड़वाल की नाराजगी ने धार्मिक आयोजनों में मर्यादा और अनुशासन की जरूरत को रेखांकित किया है। यह घटना न केवल बस्ती की एक घटना तक सीमित है, बल्कि यह पूरे देश में कांवड़ यात्रा की छवि और प्रबंधन पर सवाल उठाती है। अनुराधा पौड़वाल की टिप्पणी ने इस मुद्दे को व्यापक चर्चा में लाया, और समाज से यह अपेक्षा की जा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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