Viral: दारोगा ने ऑटो चालक को थूक चटवाया, कहा- 'ब्राह्मण को देखना भी नहीं चाहता', SP ने सस्पेंड किया

थानाध्यक्ष प्रवीण चंद्र दिवाकर ने अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया है। उनका दावा है कि प्रद्युमन कुमार ने गश्ती कर रही एक महिला सिपाही को देखकर सीटी मारी थी, जिसके कार...

Jul 2, 2025 - 23:47
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Viral: दारोगा ने ऑटो चालक को थूक चटवाया, कहा- 'ब्राह्मण को देखना भी नहीं चाहता', SP ने सस्पेंड किया

By INA News.

बिहार के शेखपुरा जिले के मेहुस थाना क्षेत्र में 1 जुलाई 2025 की शाम को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसमें मेहुस थाना प्रभारी प्रवीण चंद्र दिवाकर पर एक ऑटो चालक, प्रद्युमन कुमार, की बेरहमी से पिटाई करने और उससे जबरन थूक चटवाने का आरोप लगा है। पीड़ित प्रद्युमन कुमार (26), मेहुस गांव के निवासी और अजय मिश्रा के पुत्र, ने बताया कि थानाध्यक्ष ने उससे उसकी जाति पूछी और जब उसने अपनी जाति ब्राह्मण बताई, तो थानाध्यक्ष ने कथित तौर पर कहा, "ब्राह्मण जाति के लोगों को देखना भी पसंद नहीं है, इस जाति से मुझे नफरत है।" इसके बाद उसे जमीन पर थूकने के लिए मजबूर किया गया और उसका थूक चटवाया गया। यह घटना थाने के अंदर हुई, जहां पीड़ित को न्याय की उम्मीद थी।

घटना का कारण कथित तौर पर यह था कि प्रद्युमन कुमार ने सड़क पर थानाध्यक्ष की बुलेट मोटरसाइकिल को साइड देने में देरी की। थानाध्यक्ष उस समय सादे कपड़ों में थे, जिसके कारण पीड़ित उन्हें पहचान नहीं पाया। गुस्से में आए थानाध्यक्ष ने पहले सड़क पर ही प्रद्युमन की लाठियों से पिटाई की और फिर उसे थाने ले जाकर और मारपीट की। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष ने उसका मुंह सूंघकर शराब पीने का आरोप लगाने की कोशिश की, लेकिन जब यह साबित नहीं हुआ, तब भी उसकी पिटाई जारी रही। घटना की जानकारी स्थानीय लोगों के माध्यम से बरबीघा के जदयू विधायक सुदर्शन कुमार को मिली, जिन्होंने तुरंत शेखपुरा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) बलराम चौधरी से संपर्क किया और दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और मेहुस थाना प्रभारी प्रवीण चंद्र दिवाकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर लाइन हाजिर कर दिया।शेखपुरा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) राकेश कुमार ने मामले की जांच की और प्रारंभिक जांच में पिटाई के आरोपों को सही पाया। उन्होंने कहा, "इस तरह की घटना पुलिस महकमे के लिए धब्बा है।" अन्य आरोपों, जैसे थूक चटवाने और जातिगत टिप्पणी, की जांच अभी जारी है। एसपी बलराम चौधरी ने भी पुष्टि की कि विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

थानाध्यक्ष प्रवीण चंद्र दिवाकर ने अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया है। उनका दावा है कि प्रद्युमन कुमार ने गश्ती कर रही एक महिला सिपाही को देखकर सीटी मारी थी, जिसके कारण उसे थाने लाया गया और पिटाई की गई। हालांकि, पीड़ित और स्थानीय लोगों ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे बहाना बताया है। प्रद्युमन कुमार को मारपीट के कारण गंभीर चोटें आई हैं, और उनके परिजनों ने उन्हें शेखपुरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। पीड़ित ने थानाध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस घटना की कड़ी निंदा कर रहे हैं और पीड़ित को सरकारी मुआवजा व सुरक्षा प्रदान करने की मांग कर रहे हैं।

यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, और कई लोगों ने इसे पुलिस की बर्बरता और जातिवादी मानसिकता का उदाहरण बताया है। एक्स पर कई पोस्ट्स में इस घटना की निंदा की गई है, जिसमें इसे "वर्दी में जातिवाद" और "पुलिस की गुंडागर्दी" करार दिया गया। कुछ यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि क्या थानाध्यक्ष का निलंबन पर्याप्त है, और मांग की कि उन्हें बर्खास्त कर केस दर्ज किया जाए। यह घटना न केवल पुलिस की बर्बरता को उजागर करती है, बल्कि जातिगत भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दों पर भी सवाल उठाती है। शेखपुरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष को निलंबित तो कर दिया है, लेकिन पीड़ित और स्थानीय लोगों की मांग है कि इस मामले में और सख्त कार्रवाई हो, जैसे एफआईआर दर्ज करना और बर्खास्तगी। इस घटना ने बिहार पुलिस की कार्यशैली और समाज में व्याप्त जातिगत मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, एक एक्स पोस्ट में थानाध्यक्ष का बचाव करते हुए दावा किया गया कि यह मामला झूठा है और बिना जांच के एक "ईमानदार बहुजन अधिकारी" को निलंबित किया गया। इस पोस्ट में इसे जातिवाद का झूठा आरोप बताया गया, लेकिन इस दावे की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। थानाध्यक्ष प्रवीण चंद्र दिवाकर को निलंबित कर दिया गया है, और विभागीय जांच शुरू हो चुकी है। जांच में पिटाई की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन थूक चटवाने और जातिगत टिप्पणी के आरोपों की जांच जारी है। स्थानीय लोग और विधायक सुदर्शन कुमार ने मांग की है कि अगर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो थाने के सामने धरना दिया जाएगा। यह मामला एक्स और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां लोग पुलिस सुधार और जातिगत भेदभाव के खिलाफ सख्त कानून की मांग कर रहे हैं। प्रद्युमन कुमार ने थानाध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की है, साथ ही सरकारी मुआवजा और सुरक्षा की भी मांग की गई है।

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