Hardoi News: किसान भाई धान मे लग रहें रोगों से करे इस तरह से बचाव, पढ़ें पूरी खबर।
धान की फसल मे कीट रोग का प्रकोप दिखायी दे रहा....
हरदोई। कृषि रक्षा अधिकारी ने किसान भाईयों को सूचित किया है कि वर्तमान समय मे धान की फसल मे कीट रोग का प्रकोप दिखायी दे रहा है, जिसका उपचार बचाव करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि धान मे कंडुआ रोग जो पुष्पीकरण के दौरान दिखते है। धान के दाने पीले हरे या काले हो जाते है। जल भराव व नाइट्रोजन की अधिक मात्रा इस रोग के फैलने मे मदद करती है।
इसके बचाव के लिए कॉपरऑक्सीक्लोराइड रसायन का 2 किग्रा०/हे० एवं प्रोपिकोनाजोल 25 प्रति० 500 मिली०प्रति हे० की दर से 500-600 ली० पानी में घोल बनाकर छिडकाव करे। धान मे एक और रोग जिसे भूरा फुदका कहते है इस कीट के प्रौढ भूरे रंग के पंखयुक्त तथा शिशु पंखहीन भूरे रंग के होते है इस कीट के शिशु एवं प्रौढ दोनो ही पत्तियों एवं किल्लों के मध्य रस चूसकर क्षति पहुंचाते है।
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इसके बचाव के लिए एसिटमिप्रिड 20प्रति0एस0पी0 100ग्रा0/हे० अथवा 0.1520 प्रति0इ0सी0 एजाडिरेक्टिन 2. 5ली0/हे० 500-600 ली० पानी मे मिलाकर स्प्रे करे। एक और रोग जिसे गंधीबग कहते है इसका कीट धान के तने पर बैठकर पौधे का रस चूसता है जिससे फसल सूख जाती है। इसके लिए मैलाथियान 5 प्रति0 25 किग्रा० धूल मे मिलाकर प्रति हे० छिडकाव करे।
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