Agra: ताज लिटरेचर क्लब की काव्य संध्या में ब्रजभाषा और हिंदी काव्य का संगम। 

ताज लिटरेचर क्लब द्वारा मंगलवार को क्लब के आगरा कार्यालय में वर्ष 2025 की अंतिम काव्य संध्या का सफल आयोजन किया

By INA News Desk
Dec 2, 2025 - 20:36
45 Views
Agra: ताज लिटरेचर क्लब की काव्य संध्या में ब्रजभाषा और हिंदी काव्य का संगम। 
ताज लिटरेचर क्लब की काव्य संध्या में ब्रजभाषा और हिंदी काव्य का संगम। 
आगरा: ताज लिटरेचर क्लब द्वारा मंगलवार को क्लब के आगरा कार्यालय में वर्ष 2025 की अंतिम काव्य संध्या का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अशोक अग्रवाल, अध्यक्ष ई. राजकुमार शर्मा, संस्थापिका भावना वरदान शर्मा एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।काव्य संध्या में आगरा के ख्याति प्राप्त साहित्यकारों ने हिंदी एवं ब्रजभाषा में अपनी सुंदर रचनाएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. रामप्रकाश चतुर्वेदी, डॉ. ऊषा गिल, डॉ. रामेंद्र शर्मा ‘रवि’, प्रभु दत्त उपाध्याय, कामेश मिश्रा ‘सनसनी’, अरविंद कपूर और अशोक अग्रवाल ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ सुनाईं।

प्रभु दत्त उपाध्याय ने ये पंक्तियां सुना कर श्रोताओ को मंत्रमुग्ध कर दिया।- 

मजहबी उन्माद कुछ फैला है ऐसा देश में। 
भेडिये हैं घूमते यहाँ आदमी के भेष में। 
बेटियां काफिर की हैं तो ये भी काफिर  बन गये। 
हरण सीता का करें ये साधुओं के भेष में।

डॉ रामेंद्र शर्मा रवि ने कुंडलियां प्रस्तुत की -

'रवि' की कुण्डलिया...
कुण्डलिया नित लिखि रयौ, लै वाणी कौ नाम।
मोकूँ इतनी सक्ति दै, करूँ सृजन अविराम। 
करूँ सृजन अविराम, बैठि चरननि में त्यारे।
तन वृन्दावन होइ, हृदय में स्याम हमारे।
बोलै जग ब्रजभास, है 'रवि' नै प्रण लयौ। 
तामारै हूँ नित्य, ब्रज कुण्डलिया लिखि रयौ।


डॉ अरविंद कपूर द्वारा कविता 'मौन प्रीति ' प्रस्तुत की गई 

यहाँ मौन है चिरस्थायी सा
मंत्र मुग्ध कली शर्मायी सा
पवन बहती है उनसे पूछ पूछ
पत्ता ना विलग हो बेल अल्साई का

मौन मंत्रों ने बांध दिया बादल
ओस ठहर गई हो ध्यान मगन
तरुवर भी स्थिर शांत चित यहाँ
यहाँ खेल नहीं किसी तमाशाई का

डॉ ऊषा गिल ने कविता पतझड़ सुनाई -तुझ बिन पतझड और वीराने 

दोस्त बने सभी अनजाने 
सुनते है कई आयी बहारें 
सहज तेरा आना मुश्किल है
और सभी कुछ सह सकते है 
घुटन का सहना मुश्किल है 
सच को सुनना और सुनाना 
आज भी कितना मुश्किल है........

कार्यक्रम में डॉ. कृष्णा दत्ता चार्य, डॉ. वेद प्रकाश त्रिपाठी, सुरेश शर्मा, पूरन सिंह यादव, ओमप्रकाश अग्रवाल, राकेश शर्मा, वरदान शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।धन्यवाद ज्ञापन सचिव सुरेश शर्मा ने किया। संचालन संस्थापिका भावना वरदान शर्मा ने किया तथा कहा कि पिछले 10 वर्षों से ताज लिटरेचर क्लब निरंतर हिंदी और विशेष रूप से ब्रजभाषा के प्रचार-प्रसार में लगा हुआ है। इस तरह की काव्य गोष्ठियाँ ब्रज क्षेत्र की माटी की भाषा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और ब्रज साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने का सशक्त माध्यम हैं।यह आयोजन वर्ष 2025 की क्लब की अंतिम काव्य गोष्ठी थी। उपस्थित सभी साहित्यकारों व श्रोताओं ने इसे यादगार बताया।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow