ज़िंदा आदमी का बना दिया मृत्यु प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र बनवाने गया था शख्स, मचा हड़कंप।
Ajab Ghazab: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के नजीबाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत तातारपुर लालू में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक जीवित व्यक्ति, अनुपम अग्रवाल, ने
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के नजीबाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत तातारपुर लालू में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक जीवित व्यक्ति, अनुपम अग्रवाल, ने जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की गड़बड़ी के चलते उनका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। यह प्रमाण पत्र जब उनके घर पहुंचा, तो परिवार और रिश्तेदारों में हड़कंप मच गया। जीवित व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र देखकर घर में शोक जैसी स्थिति बन गई। यह घटना 24 अगस्त 2025 को उस समय सामने आई, जब नजीबाबाद निवासी अनुपम अग्रवाल को उनके घर पर एक मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ।
अनुपम ने बताया कि उन्होंने कुछ महीने पहले अपने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र के लिए स्थानीय पंचायत कार्यालय में आवेदन किया था। आवश्यक दस्तावेज, जैसे कि अस्पताल का जन्म रिकॉर्ड और पहचान पत्र, जमा करने के बाद उन्हें प्रमाण पत्र मिलने की उम्मीद थी। लेकिन जब डाक के जरिए प्रमाण पत्र उनके घर पहुंचा, तो उसमें अनुपम अग्रवाल का नाम मृतक के रूप में दर्ज था। यह देखकर उनके परिवार में डर और आश्चर्य का माहौल बन गया। अनुपम ने बताया, “मैंने जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था, लेकिन मुझे मेरा ही मृत्यु प्रमाण पत्र मिला। यह देखकर मेरी पत्नी और बच्चे डर गए। रिश्तेदारों ने फोन करके पूछना शुरू कर दिया कि क्या मैं ठीक हूं।”
स्थानीय लोगों और अनुपम के परिवार ने इस गलती को प्रशासन की घोर लापरवाही बताया। अनुपम ने कहा कि इस गलती के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। अगर यह मृत्यु प्रमाण पत्र सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता, तो उन्हें कई कानूनी और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता था। उदाहरण के लिए, बैंक खाते, संपत्ति हस्तांतरण, या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत हो सकती थी। परिवार ने इस मामले की तुरंत शिकायत नजीबाबाद के उप-जिलाधिकारी (SDM) कार्यालय में दर्ज की और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। नजीबाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत तातारपुर लालू के पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) पर इस गलती का ठीकरा फोड़ा गया है। न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह गलती डेटा एंट्री के दौरान हुई, जब पंचायत कार्यालय में कर्मचारियों ने गलत जानकारी सिस्टम में दर्ज कर दी। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पंचायत स्तर पर जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों के सत्यापन और डेटा एंट्री में अक्सर लापरवाही होती है। इस मामले में भी, अधिकारी ने बिना उचित सत्यापन के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया। अमर उजाला ने बताया कि इस गलती के लिए जिम्मेदार कर्मचारी की पहचान कर ली गई है, और जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
बिजनौर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) अरुण कुमार ने इस मामले को गंभीर बताया और कहा कि इसकी उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “यह प्रशासनिक चूक का गंभीर मामला है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी गलतियां न हों।” DM ने यह भी निर्देश दिया कि अनुपम अग्रवाल का सही जन्म प्रमाण पत्र तुरंत जारी किया जाए और गलत मृत्यु प्रमाण पत्र को रिकॉर्ड से हटाया जाए। इसके अलावा, उन्होंने सभी पंचायत अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रमाण पत्र जारी करने से पहले दस्तावेजों का गहन सत्यापन करें। यह मामला केवल अनुपम अग्रवाल तक सीमित नहीं है। आज तक की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिजनौर और आसपास के जिलों में पहले भी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों में गलतियों की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। कई बार गलत नाम, तारीख, या अन्य विवरण दर्ज होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर डेटा एंट्री में प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी और तकनीकी संसाधनों का अभाव इस तरह की गलतियों का प्रमुख कारण है। इसके अलावा, ऑनलाइन पोर्टल्स पर डेटा अपलोड करने में भी कई बार त्रुटियां हो जाती हैं।
सोशल मीडिया पर इस घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है। कई यूजर्स ने इसे प्रशासन की लापरवाही का बड़ा उदाहरण बताया। एक X यूजर ने लिखा, “यह शर्मनाक है कि एक जीवित व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र बन जाता है। सरकार को अपने सिस्टम को सुधारना होगा।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “अनुपम अग्रवाल के साथ जो हुआ, वह किसी के साथ भी हो सकता है। प्रशासन को ऐसी गलतियों के लिए जवाबदेह बनाना जरूरी है।” इस मामले ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। भारत में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत, हर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य है। इसके लिए भारत सरकार ने सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) पोर्टल (dc.crsorgi.gov.in) शुरू किया है, जो आधिकारिक तौर पर जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करता है। बिजनौर में यह प्रक्रिया स्थानीय पंचायतों, नगर परिषदों, और स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से संचालित होती है। हालांकि, कई बार स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की लापरवाही और तकनीकी खामियों के कारण गलतियां हो जाती हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले की गहन जांच हो और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी किया जाए, ताकि मानवीय गलतियों की संभावना कम हो। अनुपम अग्रवाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो और भविष्य में किसी और को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े। जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और एक जांच समिति गठित की गई है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही, प्रशासन ने सभी पंचायत अधिकारियों को प्रशिक्षण देने और डेटा एंट्री प्रक्रिया को मजबूत करने का फैसला किया है। DM ने यह भी कहा कि अनुपम अग्रवाल को हुई असुविधा के लिए माफी मांगी जाएगी और उनका सही जन्म प्रमाण पत्र जल्द से जल्द जारी किया जाएगा। यह घटना प्रशासनिक प्रणाली में सुधार की जरूरत को सामने लाती है। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज न केवल व्यक्ति की पहचान और कानूनी स्थिति को दर्शाते हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसी गलतियां न केवल परिवारों को परेशान करती हैं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं।
Also Read- 44 साल पहले सिडनी के एक 10 वर्ग मीटर एरिया में बना था अटलांटियम साम्राज्य, आज हैं 3000 नागरिक।
What's Your Reaction?