'रेपिस्ट, रेपिस्ट होता है...': उन्नाव रेप सर्वाइवर का दर्द भरा बयान, CBI की कथित देरी पर सवाल

सर्वाइवर ने कहा कि वह कोर्ट के सामने पेश होने का इरादा रखती हैं। वे जजों के सामने तथ्य रखने और जांच तथा ट्रायल में हुई लंबी देरी के लिए जवाबदेही तय करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने

By INA News Desk
Dec 28, 2025 - 10:18
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'रेपिस्ट, रेपिस्ट होता है...': उन्नाव रेप सर्वाइवर का दर्द भरा बयान, CBI की कथित देरी पर सवाल
'रेपिस्ट, रेपिस्ट होता है...': उन्नाव रेप सर्वाइवर का दर्द भरा बयान, CBI की कथित देरी पर सवाल

उन्नाव रेप केस की सर्वाइवर ने 27 दिसंबर 2025 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने से जुड़ी कथित देरी पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पावर और राजनीतिक प्रभाव अपराध की गंभीरता को कम नहीं कर सकते। सर्वाइवर ने जोर देकर कहा कि बाहुबल मायने नहीं रखता, रेपिस्ट रेपिस्ट होता है, चाहे वह कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो। यह बयान दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 23 दिसंबर 2025 को पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित करने और जमानत देने के फैसले के बाद आया है। हाई कोर्ट ने सजा निलंबित करते हुए सेंगर को 15 लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड और तीन जमानतदारों के साथ जमानत दी। साथ ही सेंगर को सर्वाइवर के दिल्ली स्थित निवास के 5 किलोमीटर के दायरे में न जाने, उन्हें कोई धमकी न देने और साप्ताहिक पुलिस रिपोर्टिंग जैसे सख्त शर्तें लगाई गईं।

सर्वाइवर ने कहा कि वह कोर्ट के सामने पेश होने का इरादा रखती हैं। वे जजों के सामने तथ्य रखने और जांच तथा ट्रायल में हुई लंबी देरी के लिए जवाबदेही तय करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार आश्वासन के बावजूद मामले में प्रगति धीमी रही, जिससे उन्हें समय पर न्याय नहीं मिला। लंबी कानूनी प्रक्रिया ने संस्थागत जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं, खासकर उन मामलों में जहां प्रभावशाली आरोपी शामिल होते हैं। सर्वाइवर ने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं होना चाहिए। उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट देरी पर ध्यान देगा और कड़े निर्देश जारी करेगा। देर से मिला न्याय न मिलने के बराबर है। जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती, वे लड़ती रहेंगी।

CBI ने 26 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। CBI ने याचिका में कहा कि हाई कोर्ट का आदेश कानून के खिलाफ और विकृत है। गंभीर अपराध में दोषी को जमानत देना न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है और पीड़िता की सुरक्षा तथा मनोबल को प्रभावित करता है। सेंगर प्रभावशाली व्यक्ति हैं जिनके पास मसल पावर और मनी पावर है। उनकी रिहाई से सर्वाइवर और परिवार की जान को खतरा होगा तथा न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास कम होगा। CBI ने याचिका में कहा कि लंबी कैद होना सजा निलंबन का आधार नहीं बन सकता, खासकर नाबालिग के साथ रेप जैसे जघन्य अपराध में। ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर 2019 में सेंगर को उम्रकैद और 25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। CBI ने हाई कोर्ट के फैसले का अध्ययन करने के बाद SLP दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट 29 दिसंबर 2025 को CBI की याचिका पर सुनवाई करेगा। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच करेगी।

2017 में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ अपहरण और रेप का मामला सामने आया था। मामला 2018 में तब सुर्खियों में आया जब सर्वाइवर ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर खुद को आग लगाने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में पांच संबंधित मामलों को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर किया। ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को दोषी ठहराया। सेंगर फिलहाल जेल में हैं क्योंकि सर्वाइवर के पिता की कस्टोडियल मौत के मामले में उन्हें 10 वर्ष की सजा हो चुकी है और उसमें जमानत नहीं मिली है। सर्वाइवर ने CBI पर आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने सेंगर के साथ मिलीभगत की। उन्होंने CBI से जांच अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। मामले में विरोध प्रदर्शन जारी रहे। दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर महिलाओं ने धरना दिया। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

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