Special Article: बिहार चुनाव परिणाम अप्रत्याशित NDA की क्लीन स्वीप, तेजस्वी पर जनता का भरोसा नाकाम।
बिहार चुनाव परिणाम निश्चित रूप से अप्रत्याशित हैं। अगर भाजपा अकेले चुनाव लड़ती तो भी क्लीन स्वीप तय था। कुल मिलाकर
लेखक:- डॉ कौशलेंद्र विक्रम सिंह
बिहार चुनाव 2025: बिहार चुनाव परिणाम निश्चित रूप से अप्रत्याशित हैं। अगर भाजपा अकेले चुनाव लड़ती तो भी क्लीन स्वीप तय था। कुल मिलाकर जनता का विश्वास तेजस्वी यादव नहीं जीत पाए।
दरअसल यह चुनाव लालू यादव ने नहीं लड़ा। यह चुनाव तेजस्वी ने लड़ा। लालू में एक कला थी वह अपने जंगलराज और पिछड़ापन को भी जस्टिफाई कर ले जाते थे। वे पिछड़ों के नेता थे। कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा होते हुए भी बिहार की जनता की नज़्म को पकड़कर स्वयं की विचारधारा को आगे रखते थे। तेजस्वी यहाँ चूक गए। वे राहुल के पीछे हो लिए। जो प्रयोग यूपी में अखिलेश ने किया वही उन्होंने तेजस्वी से करा डाला। 22 विधानसभा में अखिलेश ने घूमघूम कर PDA का नारा दिया, जिसमें से 20 में तेजस्वी हार गए। रीजनिंग में एक सवाल आता है ;त्रिभुज की गणना का। PDA कुछ ऐसा ही है। महागठबंधन वाले 85 प्रतिशत की आबादी के त्रिभुज को गिन लेते हैं। Bjp इन त्रिभुजों के बाहर एक हिंदुत्व का बड़ा त्रिभुज खड़ा कर देती हैं, यहीं महागठबंधन चूक जाता है।
आरक्षण का महत्व केवल सरकारी नौकरी तक है। सरकारी नौकरी कितनी है ? राहुल गांधी ने भारत जोड़ों यात्रा में जो छवि बनाई थी इधर कुछ दिनों में वे उसे खो चुके हैं। इनके साथ खड़ा होने वाला भी उन्हीं की कतार में आ जाता है। भारतीय जनता में राष्ट्रवाद कूट कूट कर भरा है। ओवैसी जो कभी कट्टर थे, राष्ट्र के प्रति उनके भाव देखकर वह हीरो बनकर उभरे। राहुल ने चुनाव में सेना की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाया, उसमें आरक्षण की मांग की। जनता ने इसे खारिज कर दिया। नीतीश ने बिहार में शराब बंदी की। बिहार का राजस्व कम हो गया लेकिन नीतीश ग्रामीण महिलाओं के नायक बनकर उभरे। तेजस्वी ने एक बार भी नहीं कहा कि वे आयेंगे तो शराबबंदी लागू रहेगी। स्वाभाविक है महिलाएं कभी नहीं चाहेंगी कि शराब बंदी हटे। तेजप्रताप और प्रशांत किशोर की पार्टी ने जो मुद्दे उठाए, वे nda के भी थे। इन्होंने विमर्श बनाया लेकिन उस विमर्श से बने मतदान व्यवहार को nda ने अपने पक्ष में कर लिया। सुशासन और विकास के मुद्दे के साथ साथ बीजेपी के पास दो बड़े ब्रह्मास्त्र हैं 1. राष्ट्रवाद 2. हिंदुत्व
महागठबंधन इसका प्रतिकार 2 अस्त्रों से करता है। 1. सेकुलरिज्म. 2 PDA
भारतीय मुस्लिम मतदाता मुख्य रूप से मुस्लिम महिलाएं हिंदुत्व को लेकर भले ही बीजेपी की विरोधी हों लेकिन राष्ट्रवाद में वह भी भाजपा को वोट कर रहे हैं, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसी तरह PDA सचमुच में कोई PDA है ही नहीं। यहाँ जातिगत पहचान राष्ट्रीय पहचान की चमक में धूमिल हो जाती है।
अन्य दलों को आत्म चिंतन करना होगा। उन्हें बीजेपी से बेहतर विकास मॉडल , उससे बेहतर राष्ट्रवाद, उससे बेहतर रोजगार, उससे बेहतर सुशासन, उससे बेहतर ईमानदारी का मॉडल प्रस्तुत करना होगा।
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