Agra : उटंगन नदी के बाढ़ क्षेत्र चिन्हांकन और रेहावली बांध निर्माण का मुद्दा फिर उठाएंगी जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू भदौरिया

उटंगन नदी आगरा जिले की एक प्रमुख अंतरराज्यीय नदी है, जो राजस्थान के करौली जिले से निकलकर उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है। यहां यह लगभग 88 किलोमीटर लंबा सफ

By INA News Desk
Oct 2, 2025 - 11:34
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Agra : उटंगन नदी के बाढ़ क्षेत्र चिन्हांकन और रेहावली बांध निर्माण का मुद्दा फिर उठाएंगी जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू भदौरिया
Agra : उटंगन नदी के बाढ़ क्षेत्र चिन्हांकन और रेहावली बांध निर्माण का मुद्दा फिर उठाएंगी जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू भदौरिया
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आगरा जिले में उटंगन नदी की बाढ़ समस्याओं से निपटने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू भदौरिया ने सक्रिय कदम उठाने का फैसला किया है। उन्होंने सिंचाई विभाग को नदी के जल विस्तार क्षेत्र का चिन्हांकन करने और खूंटियां लगाने का निर्देश दिया है। यह कार्य मानसून के बाद जल स्तर घटने के समय में किया जाएगा, ताकि भविष्य में बाढ़ की स्थिति का सटीक आकलन हो सके। भदौरिया ने कहा कि नदी का प्रबंधन व्यवस्थित करने से फसल क्षति कम होगी और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों की पहचान तेजी से हो सकेगी। इसके अलावा, वे जल्द लखनऊ यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर रेहावली गांव में बांध बनाने का मुद्दा फिर उठाएंगी। यह प्रस्ताव पहले भी रखा जा चुका है, लेकिन अब जल संकट और बाढ़ दोनों मुद्दों को जोड़कर जोर दिया जाएगा। सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के सदस्यों के साथ बैठक में भदौरिया ने पर्यावरणीय बदलावों का हवाला देते हुए नदी प्रबंधन की जरूरत पर बल दिया।

उटंगन नदी आगरा जिले की एक प्रमुख अंतरराज्यीय नदी है, जो राजस्थान के करौली जिले से निकलकर उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है। यहां यह लगभग 88 किलोमीटर लंबा सफर तय करती है और फतेहाबाद तहसील के रिहावली गांव के पास यमुना नदी में मिल जाती है। नदी का अधिकांश भाग मानसून पर निर्भर है, जब स्थानीय जलग्रहण क्षेत्र से पानी भरपूर आता है। लेकिन राजस्थान में ऊपरी क्षेत्रों से पानी रोके जाने के कारण सूखे के समय यह नदी लगभग सूखी रहती है। हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से मानसून के अलावा अप्रत्याशित बारिश बढ़ी है, जिससे बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नदी के किनारे खेरागढ़, किरावली और फतेहाबाद तहसीलों के कई गांव प्रभावित होते हैं। इस वर्ष मानसून में राजस्थान के आंगई बांध से पानी छोड़े जाने पर फतेहाबाद के शायकापुरा, खलकापुरा, भोगपुरा, बाग भोगपुरा, रिहावली और बरना जैसे गांवों में 500 बीघा से अधिक फसलें डूब गईं। इसके अलावा, नदी में डूबने की घटनाएं भी बढ़ी हैं, जैसे हाल ही में फतेहाबाद के तीन युवकों का हादसा, जहां पशुओं को बचाने के चक्कर में एक की जान चली गई।

भदौरिया ने सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के प्रतिनिधियों अनिल शर्मा, असलम सलीमी और राजीव सक्सेना के साथ बैठक में कहा कि नदी का पानी अब उतर चुका है, इसलिए सिंचाई विभाग तृतीय वृत्त के अधीन आगरा कैनाल के लोअर खंड के अधिशासी अभियंता को तुरंत चिन्हांकन कार्य शुरू करने को कहा गया है। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र लिखने का इरादा जताया, ताकि नदी तटीय गांवों के लेखपाल सहयोग करें। जिला पर्यावरण समिति की 4 सितंबर की बैठक में जिलाधिकारी ने पहले ही सिंचाई विभाग को डूब क्षेत्र चिन्हांकित करने और मुद्दियां लगाने के निर्देश दिए थे। यह कदम नदी के जीर्णोद्धार के लिए महत्वपूर्ण है। भदौरिया ने जोर दिया कि बाढ़ क्षेत्र का सही चिन्हांकन होने से किसानों को पहले से चेतावनी मिलेगी, फसल बीमा प्रक्रिया तेज होगी और राहत वितरण में देरी नहीं होगी। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से आगरा क्षेत्र अब अधिक संवेदनशील हो गया है, जहां अप्रत्याशित वर्षा से बाढ़ का जोखिम बढ़ा है। इसलिए, नदी प्रबंधन को मजबूत बनाना जरूरी है, जिसमें कचरा फेंकने पर जुर्माना और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सक्रियता शामिल है।

रेहावली बांध का मुद्दा उटंगन नदी के लिए लंबे समय से लंबित है। भदौरिया ने बताया कि वे जल्द लखनऊ जाएंगी और मुख्यमंत्री से मिलने पर इस प्रस्ताव को फिर रखेंगी। पहले भी, इस वर्ष अप्रैल में भदौरिया और पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री से मुलाकात में यही मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि आगरा से गुजरने वाली सात नदियों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट है। रेहावली में बांध बनने से मानसून का अतिरिक्त पानी रोका जा सकेगा, जो सिंचाई, भूजल रिचार्ज और बाढ़ नियंत्रण में मदद करेगा। सिंचाई विभाग ने हाल ही में इस परियोजना को मंजूरी के लिए प्रस्तावित किया है, जो यमुना की सहायक नदियों के जल को संरक्षित करने का हिस्सा है। सिविल सोसायटी के अनिल शर्मा ने कहा कि बांध से नदी का बैकफ्लो कम होगा, जो वर्तमान में यमुना के बाढ़ से उटंगन में उल्टा बहाव पैदा करता है। असलम सलीमी ने फोटो जर्नलिस्ट के रूप में नदी के प्रदूषण और कटाव की तस्वीरें साझा कीं, जबकि राजीव सक्सेना ने स्थानीय किसानों की समस्याओं पर चर्चा की। सिविल सोसायटी ऑफ आगरा एक सक्रिय संगठन है, जो पर्यावरण, जल संरक्षण और सामाजिक मुद्दों पर काम करता है। इस संगठन ने पहले भी ताजमहल विवादों, एसिड अटैक रोकथाम और जल संकट पर अभियान चलाए हैं।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। जल शक्ति विभाग के अनुसार, राज्य में 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है, जिसमें आगरा जैसे जिले शामिल हैं। उटंगन जैसी नदियों में बांध निर्माण से लाखों क्यूबिक मीटर पानी संरक्षित हो सकता है, जो गर्मियों में सिंचाई के लिए उपयोगी होगा। हाल के बाढ़ों में यमुना का जलस्तर 15 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ चुका है, जिससे उटंगन पर दबाव बढ़ा। भदौरिया ने कहा कि यह प्रयास न केवल बाढ़ रोकेंगे, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद करेंगे। जिला प्रशासन ने बाढ़ चौकियां सक्रिय की हैं और राहत टीमों को निर्देश दिए हैं।

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